Tag: इतिहास

इतिहास- हरभगवान  चावला

Post Views: 1,156 हरभगवान चावला (हरभगवान चावला सिरसा में रहते हैं। हरियाणा सरकार के विभिन्न महाविद्यालयों में  कई दशकों तक हिंदी साहित्य का अध्यापन किया। प्राचार्य पद से सेवानिवृत हुए।

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हरियाणा-आक्रमण तथा एकीकरण का इतिहास – बुद्ध प्रकाश

Post Views: 586 बुद्ध प्रकाश इस प्रकार लोग कृषि-कार्य में प्रवृत्त हो गये जबकि पूर्व में साम्राज्य-वादी गतिविधियों तथा उत्तर-पश्चिम में आक्रमणकारी शक्तियों की गति तीव्र से तीव्रतर होती गई।

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शंवाई-पंझेई – दो लड़कियों की बलि देकर बनाया गया था शिव मंदिर

Post Views: 285 – अर्शदीप सिंह चंबा जिले की सुंदर वादियों में स्थित है एक छोटी सी तहसील चुराह। चुराह तहसील ऊंचे पहाड़ों पर बसने वाले दो गांव इस इलाके

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हरियाणा का इतिहास-सतनामियों का विद्रोह – बुद्ध प्रकाश

Post Views: 529 यद्यपि अकबर (1556-1605), जहांगीर (1605-1627) तथा शाहजहां (1627-1658) के राज्यकाल में हरियाणा में शांति रही और यहां पर सड़कों, सरायों, कोशमीनारों तथा कुओं का निर्माण किया गया,

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हरियाणा में 1857 का राष्ट्रीय विद्रोह – प्रोफेसर सूरजभान

Post Views: 3,257  भारत में इस वर्ष 1857 के राष्ट्रीय विद्रोह की 150वीं सालगिरह मनाई जा रही है। इस विद्रोह को देसी और विदेशी इतिहासकारों ने अपनी – अपनी दृष्टियों

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लोहारू का खूनी संघर्ष – लाजपत राय

Post Views: 1,973 चौधरी लाजपत राय लोहारू एक छोटी सी स्टेट थी। इसमें श्योराण जाटों के 52 गांव बसते थे। यह उस समय के जिला हिसार की तहसील भिवानी के

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हरियाणा में सांग परम्परा – सपना रानी

Post Views: 3,237 आलेख हरियाणा में लोक मंच को ‘सांग’ के नाम से जाना जाता है। ‘सांग’ शब्द,  स्वांग शब्द से बना है जो नाट्य शास्त्र के ‘रूपक’ शब्द का

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नारनौल के सतनामी – सूरजभान

सतनामी सम्प्रदाय में जाट, चमार, खाती आदि छोटी जातियों के लोग शामिल थे। परन्तु उन्होंने अपने जातिगत भेद मिटा दिए थे। वे सादा भोजन करते और फकीरों जैसा बाना पहनते थे। सतनामी हर प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ थे। इसलिए अपने साथ हथियार लेकर चलते थे। दौलतमंदों की गुलामी करना उन्हें बुरा लगता  था। उनका उपदेश था कि गरीब को मत सताओ। जालिम बादशाह और बेईमान साहूकार से दूर रहो।  … Continue readingनारनौल के सतनामी – सूरजभान

जलियांवाळे बाग का मंजर

Post Views: 592 मनोज पवार ‘मौजी’ मेरी भोळी सूरत कांब गई, मैं छोड़ रै आपणी धीर गया जलियांवाळे बाग का मंजर, मेरा काळजा चीर गया दन-दनादन गोळी चाली, दुश्मन के

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औरंगज़ेब और हिन्दू मंदिर – बी.एन. पाण्डे

एक उर्दू शायर ने बड़े दर्द के साथ लिखा है-
तुम्हें ले  दे के, सारी दास्तां में, याद है इतना;
कि आलमगीर हिन्दुकुश था, ज़ालिम था, सितमगर था! … Continue readingऔरंगज़ेब और हिन्दू मंदिर – बी.एन. पाण्डे