Tag: आबिद आलमी

रात भर लोग अंधेरे की बलि चढ़ते हैं – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 255 ओमसिंह अशफाक  आबिद आलमी (4-6-1933—9-2-1994) पिछले दिनों अम्बाला में तरक्की पसंद तहरीक में ‘फिकोएहसास के शायर’ जनाब आबिद आलमी हमसे हमेशा के लिए बिछड़ गए। उनका मूल

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न घर में चैन है उसको न ही गली में है-आबिद आलमी

Post Views: 220 न घर में चैन है उसको न ही गली में है,मेरे ख़याल से वो शख्स ज़िन्दगी में है। खटक रहा है निगाहों में आसमां कब सेइसे उठाके

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घरौंदे नज़रे-आतिश और ज़ख्मी – आबिद आलमी

Post Views: 199 घरौंदे नज़रे-आतिश और ज़ख्मी जिस्मो-जां कब तकबनाओगे इन्हें अख़बार की यों सुर्खियाँ कब तक यूँ ही तरसेंगी बाशिंदों की खूनी बस्तियाँ कब तकयूँ ही देखेंगी उनकी राह

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जब कहा मैंने कुछ हिसाब तो दे -आबिद आलमी

Post Views: 245 ग़ज़ल जब कहा मैंने कुछ हिसाब तो दे।क्यों फ़रिश्तों की झुक गई आँखें।। इतने ख़ामोश क्यों हैं शहर के लोग।कुछ तो पूछें, कोई तो बात करें॥ अजनबी

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जब तलातुम से हमें मौजें पुकारें आगे -आबिद आलमी

Post Views: 391 जब तलातुम से हमें मौजें पुकारें आगे।क्यों न हम ख़ुद को ज़रा उबारें आगे।। शहरे हस्ती में तो हम औरों से पीछे थे ही,क़त्लगाहों में भी थीं

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ये मैंने माना कुछ उसने कहा है – आबिद आलमी

Post Views: 205 ग़ज़ल ये मैंने माना कुछ उसने कहा है, लेकिन क्या !हमारा हाल सब उसको पता है,  लेकिन क्या! मेरी सलीब तो रखवा दो मेरे कन्धों पर,कतार लम्बी

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बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगे – आबिद आलमी

Post Views: 163 ग़ज़ल बस्ती के हर कोने से जब लोग उन्हें ललकारेंगेआवाज़ों के घेरे में वो कैसे वक्त गुज़ारेंगे। आख़िर कब तक उसके घर के आगे हाथ पसारेंगे,इक दिन

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रात का दश्त है जलता है तो जल जाने दो- आबिद आलमी

Post Views: 193 रात का दश्त है जलता है तो जल जाने दोयूँ भी यह राह से टलता है तो टल जाने दो ऐन मुमकिन है कि मिल जाए कोई

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वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है -आबिद आलमी

Post Views: 115 ग़ज़ल वो जिन्हें हर राह ने ठुकरा दिया है,मंज़िलों को ग़म उन्हीं को खा रहा है मेरा दिल है देखने की चीज़ लेकिनइस को छूना मत कि

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जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है- आबिद आलमी

Post Views: 166 जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है।वो आईने से डरता सा दिखाई देता है॥ किया था दफ़्न जिसे फर्श के नीचे कल रात,वो आज छत से

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