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अवसरवादी मुस्टंडा

महावीर शर्मा एक नन्हा सा अवसरवादी मुस्टंडा जो मेरे जन्म के वक़्त किसी काली सुरंग से भीतर घुस आया था जवान हो गया है एक जहरीले नाग की तरह । जब वह मचलता है तो फुंकारता है उसकी चिरी हुई जीभ मेरे नथुनों में लपलपाती है मेरा सांस लेना दूभर हो जाता है और एक कंपकंपी दौड़ जाती है मेरे

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