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आंसू- अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

Post Views: 13 तुम पड़ो टूट लूटलेतों पर। क्यों सगों पर निढाल होते हो।। दो गला, आग के बगूलों को। आँसुमो गाल क्यों भिगोते हो। आँसुओं और को दिखा नीचा…