Tag Archives: अमित मनोज

दुख कोई चिड़िया तो नहीं

डॉ. विजय विद्यार्थी जब भी कोई दुख पहुँचता है अमित मनोज यह गीत गाता है ‘दुख कोई चिड़िया तो नहीं’ यह अभिव्यक्ति न सिर्फ कवि के दुखी या उदास मन की पराकाष्ठा है अपितु समाज के जख्मों पर मरहम लगाने और घावों को भरने की पुरजोर चेष्टा है। यह कवि के हृदय से निकली एक अन्तर्ध्वनि है जो समाज से

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कच्चे रास्तों का धनी-धोरी

अमित मनोज                 जिमाड़ों में हमारी खास रूचि हो गई थी। स्कूल में पढ़ाते हुए हम और चीजों की बजाय खाने-पीने में ही ज्यादा ध्यान देते। आस-पास के जिमाड़ों में हम सहर्ष शामिल होते और दूर के जिमाड़ों में भी निमंत्रण मिलने पर किराये की गाड़ी से पहुंच जाते। हममें से पीने वाले साथी इस तरह की स्वतंत्रताओं का बड़ा

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हरियाणा में हिन्दी कहानी का परिदृश्य

ज्ञान प्रकाश विवेक ज्ञान प्रकाश विवेक हरियाणा के प्रख्यात कथाकार हैं। उन्होंने नई कथा-भाषा का सृजन करते हुए कहानी को कलात्मक उच्चता प्रदान की है। अपने समय के यथार्थ की जटिलता, व्याकुलता, बेचैनी तथा उपभोक्तावादी समाज में बदल रहे सामाजिक संबंधों व सामाजिक संकट के विभिन्न आयामों को बेबाकी से अभिव्यक्त किया। विवेक के पास कथा कहने का विशिष्ठ कौशल

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राजेन्द्र गौतम -हरियाणा में रचित हिन्दी कविता की अर्धशती

साहित्य हरियाणा में रचित समकालीन हिन्दी कविता पर बात करते हुए एक दिक्कत सामने आती है। कविता का पार्थक्य भाषाओं और अलग-अलग काल-खंडों के आधार पर तो समझा जा सकता है पर सोनीपत से शामली की हिंदी कविता का अंतर समझ पाना अथवा पंचकूला से मोहाली की कविता को अलगा कर देखना थोड़ा कठिन है। यह मैं इसलिए कह रहा

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अमित मनोज – किसानी का मतलब है मौत !

                दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले दिनों एक घटना घटी। वह यह कि वहाँ कुछ किसानों  ने अपना मूत्र इसलिए पी लिया था कि महीने भर तरह-तरह के प्रदर्शन के बाद भी उनकी सुनी नहीं जा रही थी।  वो तो अगले ही दिन अपना मल भी खाने वाले थे, पर शुक्र है कि उनके राज्य के मुख्यमंत्री के आश्वासन पर

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