Tag: अनुवाद

आइंस्टीन का पत्र

(इस पर आइंस्टीन के अलावा अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर थे। यह पत्र 2 दिसंबर 1948 को लिखा गया और 4 दिसंबर 1948 को प्रकाशित हुआ) … Continue readingआइंस्टीन का पत्र

रीढ़ – कुसुमाग्रज

Post Views: 53 रीढ़ “सर मुझे पहचाना क्या?” बारिश में कोई आ गया कपड़े थे मुचड़े हुए और बाल सब भीगे हुए पल को बैठा, फिर हँसा और बोला ऊपर

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एक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

पांच मिनट बीत गए पर कैदी ने कोई हरकत नहीं की। पंद्रह वर्ष के कारावास से उसे स्थिर बैठने का अभ्यास हो गया था। बैंकर ने अपनी उंगली से खिड़की पर दस्तक दी। जवाब में कैदी ने कोई हरकत नहीं की। फिर बैकर ने सावधानी से दरवाजे की सील तोड़ दी और ताले में चाबी घुमाई। जंग लगे ताले से एक कर्कश सी गुर्राने जैसी आवाज निकली। दरवाजा चरमरा उठा….(कहानी से) … Continue readingएक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

एक पाठक – मक्सिम गोर्की

“रुको नहीं, मेरे साथ तुम सही रास्ते पर हो” उसने कहा, “बात शुरू करो, तुम मुझे यह बताओ कि साहित्य का उद्देश्य क्या है ?” मेरा अचरज बढ़ता जा रहा था और आत्मसंतुलन घटना जा रहा था । आखिर यह आदमी मुझसे चाहता क्या है? और यह है कौन ? निस्संदेह वह एक दिलचस्प आदमी था, लेकिन मैं उससे खीज उठा था । (कहानी से) … Continue readingएक पाठक – मक्सिम गोर्की

वर्ष 2020 के लिए नोबेल पुरस्कार हेतु घोषित अमेरिकी कवियत्री लुईस ग्लूक की कविता- अवेर्नो, (अनुवाद-विनोद दास)

लुईस ग्लूक बेहद सम्मानित साहित्यकार हैं. वो सामाजिक मुद्दों पर भी काफी सक्रिय रहती हैं. लुईस येल यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं. उनका जन्म 1943 में न्यूयॉर्क में हुआ था. उनके नोबेल प्रशस्ति पत्र में कहा गया कि उनके लेखन में बाद की पुनरावृत्ति के लिए इन तीन विशेषताओं में एकजुट होना दिखाई देता ह्रै. लुईस ग्लुक के कविता के बारह संग्रह और कुछ संस्करणों को प्रकाशित हुए हैं. उनकी कविताओं में खुद के सपनों और भ्रमों के बारे में जो कुछ बचा है, उसे कहा गया है. स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि कवयित्री लुईस को उनकी बेमिसाल काव्यात्मक आवाज के लिए यह सम्मान दिया गया, जो खूबसूरती के साथ व्यक्तिगत अस्तित्व को सार्वभौमिक बनाता है. (स्त्रोत-इंटरनेट) … Continue readingवर्ष 2020 के लिए नोबेल पुरस्कार हेतु घोषित अमेरिकी कवियत्री लुईस ग्लूक की कविता- अवेर्नो, (अनुवाद-विनोद दास)

पंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

लोहड़ी पंजाब के मौसम से जुड़ा ऐसा त्यौहार है, जिसकी अपनी अनुपम विशेषताएं हैं। जैसे यह त्यौहार पौष की अंतिम रात को मनाया जाता है, जबकि भारत के दूसरे भागों में अगले दिन ‘संक्रांति’ मनाई जाती है। इस त्यौहार पर पंजाब के लोग आग जलाते हैं। संक्रांति पर ऐसा नहीं होता, केवल नदियों-सरोवरों में स्नान किया जाता है। लोहड़ी में तिलों और तिलों की रेवड़ियों की आहूति दी जाती है। … Continue readingपंजाब का सांस्कृतिक त्यौहार लोहड़ी – डा. कर्मजीत सिंह अनुवाद – डा. सुभाष चंद्र

बाह्मण – रविंद्रनाथ टैगोर, अनु – प्रोफेसर सुभाष चंद्र

‘मेरे लाडले,
द्विजां म्हं सै तू सबतै ऊपर,
सत्य सै तेरा बंश।’ … Continue readingबाह्मण – रविंद्रनाथ टैगोर, अनु – प्रोफेसर सुभाष चंद्र

बाबा नानक – संतोख सिंह धीर

गुरु नानक का जन्म 1469 में, पंजाब प्रान्त के ननकाना साहब नामक स्थान पर हुआ, जो आज कल पाकिस्तान में है। वे महान विचारक और समाज सुधारक थे। उनका व्यक्तित्व साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने इनसान की समानता का संदेश दिया। … Continue readingबाबा नानक – संतोख सिंह धीर

गांधी क्या बला है! – चौधरी छोटू राम

Post Views: 869 अनुवाद-हरि सिंह बटलर ने अन्य विषयों के अलावा भारतीय राजनीति पर छाई गांधी नामक परिघटना को भी अपने इस किसान-मित्र के माध्यम से जानना चाहा। जवाब में

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वेटिंग फॉर वीजा – डॉ. भीम राव आंबेडकर

Post Views: 811 ‘वेटिंग फॉर वीजा ‘ डॉ. भीम राव आंबेडकर डॉ. भीमराव आंबेडकर की पुस्तिका ‘वेटिंग फॉर वीजा’ संयुक्त राज्य अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल है।

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