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बौद्धकालीन भारतीय विश्वविद्यालय – आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 4 बौद्धकालीन भारतीय विश्वविद्यालयों के स्वरूप, शिक्षा व्यवस्था, पाठ्यक्रम व उसकी उपयोगिता पर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का ज्ञानवर्धक आलेख.

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भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है – भारतेंदु हरिश्चंद्र

Post Views: 6 आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे…

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प्रेमचंद निरंतर प्रासंगिक रहेंगे – महादेवी वर्मा

Post Views: 4 [11-12 अप्रैल 81 को नागरी प्रचारिणी सभा, आरा में आयोजित प्रेमचंद-जन्म शताब्दी समारोह के लिये प्रेषित हिन्दी को सुप्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती महादेवी वर्मा का उद्घाटन भाषण] समागत…

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प्रेमचंद का महत्व – आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

Post Views: 5 अगर उत्तर भारत को समस्त जनता के आचार-विचार, भाव-भाषा, रहन-सहन, आशा-आकांक्षा, दुःख-सुख और सूझ-बूझ को जानना चाहते हैं तो में आपको निःसंशय बता सकता हूँ कि प्रेमचन्द…

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प्रेमचन्द का महत्व – आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

Post Views: 7 डॉ० हजारीप्रसाद द्विवेदी आधुनिक हिन्दी साहित्य के गंभीर अन्वेषक और मौलिक चिंतक हैं। आपकी रचनाओं में पांडित्य और सरसता का सुन्दर सामंजस्य पाया जाता है। बाणभट्ट की…

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निंदा-रस – हरिशंकर परसाई

Post Views: 7 निंदा कुछ लोगों की पूंजी होती है। बड़ा लंबा-चौड़ा व्यापार फैलाते हैं वे इस पूंजी से। कई लोगों की ‘रिस्पेक्टेबिलिटी’ (प्रतिष्ठा) ही दूसरों की कलंक-कथाओं के पारायण…

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ठाकुर का कुआँ – प्रेमचंद

Post Views: 3 हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस…