placeholder

भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो – विक्रम राही

Post Views: 706 भीतरला हो साफ मणस का चाहे रंग बेशक तै काला हो हो रंग भी काला दिल भी काला उसका के उपराला हो भूरा हो जै देखण मैं…

placeholder

पीछा करो उनका

Post Views: 570 बड़े चतुर हैं वे गजब के वाचाल और जादूगर रूमाल झटकते हैं तो उड़ने लगती हैं रंग-बिरंगी तितलियां खाली डिब्बों पर घुमाते हैं अपना हाथ और आसमान…

placeholder

बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै- विक्रम राही

Post Views: 271 बेटी गैल्यां धोखा होग्या इब के कह दयूं सरकार तनै जै गर्भ बीच तै बचा लई तो आग्गे फेर दई मार तनै लिंगानुपात सुधर गया इसका कारण…

placeholder

संतराम उदासीः जन संघर्षों व आंदोलनों का प्रेरक- प्रोफेसर सुभाष चंद्र

Post Views: 682 संतराम उदासी का संबंध पंजाबी कविता की क्रांतिकारी धारा से है। संतराम उदासी की रचनाओं में दलित कविता तथा इंकलाबी कविता के सरोकारों का संगम है। संतराम…

placeholder

सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का गिरता स्तर

Post Views: 168 अमरजीत सैनी शिक्षा ही मनुष्य को सही मायने में मानव बनाती है। समय परिवर्तन के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्रों में बहुत परिवर्तन हुए। सरकार ने शिक्षा के…

placeholder

आई टी आई करनाल में छात्रों व शिक्षकों पर पुलिस की दमनात्मक करवाई

Post Views: 496 सुदेश कुमारी जन संघर्ष मंच हरियाणा की तथ्यान्वेषी टीम की रिपोर्ट 16 अप्रैल 2019 को जन संघर्ष मंच हरियाणा की एक तथ्यान्वेषी टीम ने बाबू मूल चंद…

placeholder

दयाल चंद जास्ट की कविताएं

Post Views: 645 (दयाल चंद जास्ट, रा.उ.वि.खेड़ा, करनाल में हिंदी के प्राध्यापक हैं। कविता लेखन व रागनी लेखन में निरंतर सक्रिय हैं) (1) मैं सूखे पत्ते सी उड़ रही हूं…

placeholder

राजस्थानी कविताएं – रामस्वरूप किसान

Post Views: 1,089 राजस्थानी कविताएं – रामस्वरूप किसान ‘हिवड़ै उपजी पीड़ सुप्रसिद्ध राजस्थानी लोक कवि रामस्वरूप किसान जी ने ये कविताएं देस हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव में…

placeholder

गांधी क्या बला है! – चौधरी छोटू राम

Post Views: 814 अनुवाद-हरि सिंह बटलर ने अन्य विषयों के अलावा भारतीय राजनीति पर छाई गांधी नामक परिघटना को भी अपने इस किसान-मित्र के माध्यम से जानना चाहा। जवाब में…