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जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है- आबिद आलमी

Post Views: 164 जो शख़्स तुझ को फरिश्ता दिखाई देता है।वो आईने से डरता सा दिखाई देता है॥ किया था दफ़्न जिसे फर्श के नीचे कल रात,वो आज छत से…

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ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूद – आबिद आलमी

Post Views: 153 ख़ला से भी कभी उभरा है ज़िन्दग़ी का वजूदतेरी निगाह कहाँ टकराई है दीवाने!तेरे दिमाग़, तेरे ज़हन पर मसलत हैहसीन उम्रगेज़ सत्ता के चन्द अफ़सानेहवा का झौंक…

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अच्छे आदमी से पूछताछ – बर्तोल्त ब्रेख़्त

Post Views: 371 बर्तोल्त ब्रेख़्त (1898-1956) अनुवाद – दिनेश दधीचि एक क़दम आगे: हमने सुना है कि तुम अच्छे आदमी हो। तुम्हें ख़रीदा नहीं जा सकता। लेकिन उससे क्या? ख़रीदा…

राह जिस पर चले नहीं – राबर्ट फ़्रॉस्ट

Post Views: 237 राबर्ट फ़्रॉस्ट (1874-1963) अनु. – डा. दिनेश दधीचि पतझड़ था; दो राहें जाती थीं जंगल में माफ़ कीजिए; एक मुसाफ़िर दो रस्तों पर कैसे चलता? खड़ा रहा…

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खो गया हूँ – रवींद्र नाथ टैगोर

Post Views: 166 रवींद्र नाथ टैगोर  (1861-1941) अनुवाद – दिनेश दधीचि खो गया हूँ बीच अपने जन्मदिन के मैं कहीं । चाहता हूँ मीत अपने, स्पर्श उनका, साथ ही मिल जाय…

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उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो- आबिद आलमी

Post Views: 175 उसकी ये शर्त की हर लफ़्ज़-लफ़्ज़ उसका हो।मेरी ये ज़िद्द के जो मानी हो मेरा अपना हो॥ ओंठ सिल जाएँ तो आँखों से बयां हो जाए,दर्द ऐ…

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मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले- आबिद आलमी

Post Views: 111 ग़ज़ल मुझको जब ग़ौर से तकते हैं ज़माने वाले। हों न हों लगते हैं तस्वीर बनाने वाले॥ वक़्त रख देगा तेरी पीठ पे शब का पहाड़। बोझ…

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यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था – आबिद आलमी

Post Views: 120 ग़ज़ल यूं तो हमारी राह में दरया कहीं न था।इक इक क़दम पे हमको मगर डूबना पड़ा॥ पहले तो देर तक वो मुझे घूरता रहा,फिर जाने किस…