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वो जिसने सब पे जादू कर दिया है – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 145 ग़ज़ल वो जिसने सब पे जादू कर दिया है, नहीं मेरी तो फिर किस की सदा है। ये माना मरहले1 हैं रास्ते में, मगर हमने ये रस्ता…

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सभी तो आदमी हैं – दीपचंद्र निर्मोही

Post Views: 277  कविता मस्तिष्क के किसी कोने में चिपके हैं कई प्रश्रचिन्ह और मैं उदास हूं भीड़ के पास हूं जो निरी तेज दर्द में लिपटी हुई रक्त के…

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यारो! ख़ूब ज़माने आए – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 120 ग़ज़ल यारो! ख़ूब ज़माने आए, ज़ालिम ज़ख़्म दिखाने आए। ज़ुल्म से लडऩे जब निकले हम, लोग हमें समझाने आए। ज़ख़्म हमें देने वाले भी, ख़ुद एहसान जताने…

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सुधीर डांगी – सरकार से किसान को अपनापन नहीं मिलता

Post Views: 199 खेती-बाड़ी यह विडम्बना ही है कि कृषि-प्रधान देश में आज किसान किसी भी प्रकार से केंद्र में नही है। चाहे कोई भी सरकार हो, किसी भी सरकार…

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डॉ नवमीत – डेंगू के बारे में

Post Views: 500 डेंगू के बारे में चंद बातें डॉ नवमीत आजकल देश में डेंगू फैला हुआ है और हजारों लोग इसकी चपेट में हैं। कई लोगों की मृत्यु हो…

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कितनी ही बार -सुरेश बरनवाल

Post Views: 132 कविता कितनी ही बार कोई पिघलती नदी पहाड़ों से उतरती ठिठक जाती है मैं किसी चट्टान पर जब उसे उदास बैठा मिलता हूं। कितनी ही बार आसमां…

एमिली डिकिंसन की तीन कविताएं

Post Views: 251 एमिली डिकिंसन (1830-1886)  अनुवाद – दिनेश दधीचि (1) जड़े मोती हैं जिन प्यालों में उनमें ढाल कर मैंने चखा है स्वाद उस मय का कि जैसी बन नहीं…

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कौन समझ सकता था उसको, सारा खेल निराला था – बलबीर सिंह राठी

Post Views: 149 ग़ज़ल कौन समझ सकता था उसको, सारा खेल निराला था, घोर अंधेरों की बस्ती में चारों ओर उजाला था। जिस के रूप की धूप से बिखरे लाखों…