placeholder

किसी मुक़ाम पे हम को रोकता कोई- आबिद आलमी

Post Views: 132 ग़ज़ल किसी मुक़ाम पे हम को रोकता कोई।मगर उड़ाये लिए जाती है हवा कोई॥ तमाम उम्र न मुझको मिला वजूद मिरा,तमाम उम्र मुझे सोचता रहा कोई ॥…

placeholder

क्या ख़बर कब से प्यासा था सहरा- आबिद आलमी

Post Views: 130 ग़ज़ल क्या ख़बर कब से प्यासा था सहरा,सारे दरया को पी गया सहरा। लोग पगडंडियों में खोए रहे,मुझ को रस्ते दिखा गया सहरा। धूप ने क्या किया…

placeholder

अपने-अपने दर्द का किस्सा सुनाओ- आबिद आलमी

Post Views: 197 ग़ज़ल अपने-अपने दर्द का किस्सा सुनाओ,रात भर देगी वगरना सबके घाव। कुछ सुलाओ आरज़ू को कुछ जगाओ,घटती-बढ़ती टीस की लज़्ज़त उठाओ। फिर कोई टहनी कोई पत्ता हिलाओ,ऐ…

placeholder

क्या ख़बर थी उस को जब मैं निकला अपने रास्ते से – आबिद आलमी

Post Views: 257 ग़ज़ल क्या ख़बर थी उस को जब मैं निकला अपने रास्ते सेउम्र हो जायेगी मुझको चार दिन के रास्ते से देखते ही रह गये उन को समंदर…

placeholder

नज़र की हद से परे अपना हर क़दम निकला- आबिद आलमी

Post Views: 173 ग़ज़ल नज़र की हद से परे अपना हर क़दम निकलावो आसमान हमारे सफ़र को कम निकला न पूछ कैसे मिली मेरे चाराग़र को निज़ातन पूछ कितने तरद्दुद…

placeholder

मैं घर में हूँ कि सफ़र में, हैं बेक़रार बहुत- आबिद आलमी

Post Views: 158 ग़ज़ल मैं घर में हूँ कि सफ़र में, हैं बेक़रार बहुत तलाश में हैं, परेशां हैं, पहरेदार बहुत अब ऐसे जलसों का चल निकला है रिवाज़ यहाँ…

placeholder

ज़र्रों को आसमान की जानिब रवाँ करूं- आबिद आलमी

Post Views: 483 ग़ज़ल ज़र्रों को आसमान की जानिब रवाँ करूंयानी फिर इनकलाब की तैयारियां करूं मौजों का साथ मिलने का इमकां है किस कदरकश्ती को बहर-बहर अगर मैं रवां…

placeholder

अमर शहीद राव तुलाराम – सूरजभान

Post Views: 455 प्रो.  सूरजभान  पिछले एक दौर में अपनी विरासत के बारे में हमारी चेतना बहुत कमजोर पड़ी है। हम काफी हद तक अपने इतिहास के बेहतर पहलुओं को…