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सुल्तान प्रजा की सेवा के लिये

Post Views: 18 सुल्तान की सवारी निकल रही थी और बूढा फकीर उसके रास्ते में ही बैठा हुआ था। वजीर पंहुचा – बाबा ! दुनियाँ का सबसे ताकतवर सुल्तान इस…

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राजा आलोचना नहीं सुनना चाहता

Post Views: 12 राजा और उसके मन्त्री विलासी थे। खजाना खाली हो गया। आश्रमों की वृत्ति बंद हो गयी। ऋषि ने कहा कि  देश की संस्कृति और देश की प्रज्ञा…

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सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

Post Views: 569 हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या…

कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

Post Views: 380 लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर…

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डरैगा सो मरैगा

Post Views: 278 राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै…

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किताब का लिख्या

Post Views: 259  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा…

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म्हारै गाम का चौकीदार

Post Views: 380 म्हारै गाम का चौकीदार बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा…

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सोनकेसी – पहाड़ी लोक-कथा

Post Views: 770 एक बार एक साहुकार था। उसके चार पुत्र थे ।चार में से बड़े तीन पुश्तैनी धन्धे के साथ अपना-अपना काम धन्धा  भी करते थे पर सबसे छोटा…