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हरियाणवी लोकगीत

भूल गई रंग चाव, ए भूल गई जकड़ी

राजेन्द्र सिंह आज के इस युग में जब स्वयं हाशिए पर चले गए हिन्दी साहित्य में भी प्रकाशन का अर्थ सिर्फ  कहानियों, कविताओं या कुछ...

मेवाती लोक गीत -मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री

मेवाती लोक गीत मां मेरा पीसणों, कितनो पीसो री। जितनी दगड़ा में रेत, जणी सू कहियो री। इतनो गूंदो री, जितनी पोखर में कीच। जणी सू कहियो री... मां...

मेवाती लोक गीत – हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में

मेवाती लोक गीत हुकम करो तो मईयां आऊं तेेरे र भवन में। गइया को दूध हमारे बछड़ा ने बिगाड़ो। कांई की धार चढ़ाऊ, मईया तेरे र भवन...