Category: स्त्री विमर्श

गीता प्रेस, गोरखपुर की स्त्री-विरोधी मुहिम – सुभाष सैनी

Post Views: 91 गीता प्रैस गोरखपुर की पुस्तकें बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों के स्टाल पर बिकती हुई मिल जायेंगीं। इन पुस्तकों की दो विशेषताएं हैं एक तो ये इतनी

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वैदिक समुदाय और स्त्री- मुद्राराक्षस

इन्द्र की स्तुति वैदिक समाज के अनेक लोग स्त्री पाने के लिए ही करते हैं। तवं र पिठीनसे मंत्र (म. 6, सू. 26) में है— हे इन्द्र ! पिठीनस को रजि नाम की स्त्री तुमने दी। मं. 10 के सू. 65 के मुन्युमंहसः मंत्र में अश्विनी द्वय ने विमद को सुन्दर स्त्री दी, यह प्रशंसा है। मं. 1, सू. 69 के अयं सोमः मंत्र में सोम से प्रार्थना की गई है, हमें रमणीय स्त्री दिलाओ। (लेख से) … Continue readingवैदिक समुदाय और स्त्री- मुद्राराक्षस

माँ टेरेसा : करुणा की देवी

सेवा मार्ग पर चलने में प्रेम के साथ साथ चिकित्सा और औषधि का प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करने की बहुत जरूरत थी। लोरेटो को अलविदा कहकर टेरेसा अपनी नयी वेशभूषा में ही 18 अगस्त 1948 को नर्सिंग की ट्रेनिंग लेने के लिए पटना की अमेरिकी मेडिकल मिशनरी के पास गईं। वहाँ तीन महीने की ट्रेनिंग लेकर वे दिसंबर माह में कोलकाता लौट आईं और ‘लिटिल सिस्टर्स ऑफ द पूअर’ संस्था में आकर रहने लगीं। … Continue readingमाँ टेरेसा : करुणा की देवी

इला रमेश भट्ट : ‘सेवा’ से दूसरी आजादी तक

रोजमर्रा के जीवन में कितनी ही बार हमारा सामना ऐसी महिलाओं से होता है, जो घरों में झाड़ू-पोंछा करके या फुटपाथ पर सब्जियाँ बेचते हुए अपना और अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। हम इतने व्यस्त होते हैं कि इनके चेहरे पर उम्र से पहले ही खिंच आईं प्रौढ़ता की लकीरों के पीछे छिपे दर्द को महसूस नहीं कर पाते। लेकिन अहमदाबाद की इला रमेश भट्ट ने स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं के इस दर्द को समझा। … Continue readingइला रमेश भट्ट : ‘सेवा’ से दूसरी आजादी तक

निर्मला जैन : आलोचना में पुरुष वर्चस्व को पहली चुनौती – अमरनाथ

“हिंदी के आलोचक” शृंखला में कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अमरनाथ ने 50 से अधिक हिंदी-आलोचकों के अवदान को रेखांकित करते हुए उनकी आलोचना दृष्टि के विशिष्ट बिंदुओं को उद्घाटित किया है। इन आलोचकों पर यह अद्भुत सामग्री यहां प्रस्तुत है। इस शृंखला को आप यहां पढ़ सकते हैं। … Continue readingनिर्मला जैन : आलोचना में पुरुष वर्चस्व को पहली चुनौती – अमरनाथ

भारत की पहली शिक्षिका – माता सावित्रीबाई फुले

दिनांक 03-01-2019 को जोतिबा-सावित्री बाई फुले पुस्तकालय, सैनी समाज भवन, कुरूक्षेत्र में माता सावित्री बाई फुले के जन्मोत्सव पर सत्य शोधक फाउंडेशन की ओर से एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें देस हरियाणा के संपादक और कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग प्रोफेसर डॉ. सुभाषचन्द्र द्वारा लिखित सावित्री बाई फुले के जीवन और चिंतन पर केन्द्रित पुस्तक ‘भारत की पहली शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले’ का विमोचन किया गया। … Continue readingभारत की पहली शिक्षिका – माता सावित्रीबाई फुले

भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले – सुभाष चंद्र

भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने भारतीय समाज में मौजूद धर्मभेद, वर्णभेद, जातिभेद, लिंगभेद के खिलाफ कार्य किया। वे जैविक बुद्धिजीवी थी, जिन्होंने अपने अनुभवों से ही अपने जीवन-दर्शन का निर्माण किया। सावित्रीबाई फुले ने समाज में सत्य, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानव भाईचारे की स्थापना के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठाए। … Continue readingभारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले – सुभाष चंद्र

जाति प्रथा से भीषण है लैंगिक विषमता – तस्लीमा नसरीन

धार्मिक कट्टरवाद तो पहले से ही दुनिया के अनेक देशों में है। अब भारत में भी धर्म को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है। जब कि इतिहास गवाह है कि जहां-जहां धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा मिलता है, वहां वहां समाज के कमजोर वर्गों, जैसे निचली जातियों और महिलाओं, का शोषण और बढ़ जाता है। … Continue readingजाति प्रथा से भीषण है लैंगिक विषमता – तस्लीमा नसरीन

अन्तराष्ट्रीय-महिला दिवस का इतिहास – प्रोफेसर सुभाष सैनी

Post Views: 180   अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है। ये आइडिया एक औरत का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी

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8 मार्च – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

Post Views: 458 – सोनी सिंह 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में हर साल मनाया जाता है। यह महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य त्यौहार

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