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ईएमएस नंबूदिरीपाद : दुनिया की पहली चुनी हुई कम्युनिस्ट सरकार के मुख्यमंत्री

ईएमएस ने जोर दे कर कहा था कि जातिगत शोषण ने केरल की नंबूदिरी जैसी शीर्ष ब्राह्मण जाति तक का अमानवीयकरण कर दिया है। उन्होंने ‘नंबूदिरी को इंसान बनाओ’ का नारा देते हुए ब्राह्मण समुदाय के लोकतंत्रीकरण की मुहिम चलाई। यह तथ्य इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे खुद इसी जाति से आते थे।

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इला मित्र  : तेभागा की रानी माँ

देश विभाजन के बाद 1948 में कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति पाकिस्तान सरकार के सख्त रवैये के कारण वहाँ की कम्युनिस्ट पार्टी ने भूमिगत होकर कार्य करने का निर्णय लिया। इला मित्र सहित  सभी नेताओं को भूमिगत हो जाने को कहा गया। इला मित्र उन दिनों गर्भवती थीं। वे छिपकर बार्डर पार करके कलकत्ता आ गईं और यहाँ अपने बेटे मोहन को जन्म दिया। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे को अपनी सास के पास रामचंद्रपुर में छोड़ा और तीन-चार सप्ताह बाद फिर से अपने पति के साथ नचोल किसान आन्दोलन में शामिल हो गईं।

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इंदिरा गाँधी : अटल की ‘दुर्गा’

सिफ़ारिश की गई थी कि सभी सिख सुरक्षाकर्मियों को उनके निवास स्थान से हटा लिया जाए। लेकिन जब वह फ़ाइल इंदिरा गाँधी के सामने रखी गई तो उन्होंने उसे अस्वीकार करते हुए बहुत ग़ुस्से में उस पर लिखा था, “आर नॉट वी सेकुलर?

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अन्ना हजारे : गाँधी-मार्ग का अंतिम पथिक – डॉ. अमरनाथ

अन्ना हजारे गाँधीजी के ग्राम स्वराज्य को भारत के गाँवों की समृद्धि का माध्यम मानते हैं। उनका मानना है कि ‘बलशाली भारत के लिए गाँवों को अपने पैरों पर खड़ा करना होगा।’

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वन संरक्षण कानून 1980 में प्रस्तावित संशोधन गैर लोकतांत्रिक

Post Views: 15 “वन संरक्षण कानून 1980 में प्रस्तावित संशोधन गैर लोकतांत्रिक” हिमाचल के जंगलों और पारिस्थितिकी पर इसका विपरीत असर होगा हाल ही में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन…

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शाहीन बाग़ के प्रकाशपुंज – स्वराजबीर – अनु. – जगजीत विर्क

गुरु गोबिन्द सिंह की अगुवाई में सिखों ने चमकौर की गढ़ी और नारनौल के सतनामियों ने नारनौल इलाके की कच्ची गढ़ियों में से हाकिमों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। उन गढ़ियों में से उठे संघर्ष कामयाब हुए और लाल किले में बैठे हाकिमों को हार का मुंह देखना पड़ा। ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना अपने आप में मानवता की जीत है। जम्हूरियत के लिए हो रहे संघर्षों की खुशबू बसी हुई है और खुशबू को कत्ल नहीं किया जा सकता।

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हरियाणा लोकसभा चुनाव : मुद्दे गायब, तिकड़म और जातीय समीकरण हार-जीत का आधार- अविनाश सैनी

Post Views: 365 -अविनाश सैनी हरियाणा में चुनावों की बिसात बिछ गई है। मोहरे तय हो चुके हैं। चालें चली जा रही हैं। अपनी-अपनी जीत के दावे ठोके जा रहे…

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लोकतंत्र की मजबूती, आम आदमी की बेहतरी और खुशहाल भारत के लिए चुनें नई सरकार – योगेंद्र यादव

Post Views: 825 लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक चिंतक और स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव से अविनाश सैनी की बातचीत अविनाश सैनी- योगेंद्र जी, राजनीतिक-सामाजिक विचारक होने के नाते…

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झूठा ही सही वायदा क्यूँ न यकीं कर लेते – सुरेन्द्र पाल सिंह

Post Views: 580 2019 में 17वीं लोकसभा के चुनावों के लिए मतदान का सिलसिला जारी है. हमारे राज्य में भी 12 मई को मतदान होना है. आमतौर पर राजनैतिक पार्टियों…

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हरियाणा की राजनीति में महिलाएं – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 740 महिला वोटरों की कम भागीदारी या फिर पुरुषवादी सोच या फिर पार्टियां ही महिला नेत्री को नहीं चाह रहीं मैदान में उतारना क्या है कारण..? हरियाणा प्रदेश…