Category Archives: साहित्य विमर्श

मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम

मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम गरीबी की क्रूरता के विरुद्ध संघर्ष का अर्थ है, दुनिया में फैले उत्पीडऩ के जाल से मुक्ति के लिए छेडी गई जंग, और ढेरों असभ्य विरोधाभासों से भरी इस लड़ाई को लोग बहुत ही कमजोर तरीके से लड़ रहे हैं. आप पुरुषोचित तरीके से पूरी ताकत के साथ इस जाल को काटने

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साहित्य से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रयास करने होंगे

रंजना अग्रवाल  रंजना अग्रवाल की स्वामी वाहिद काजमी से बातचीत  (वयोवृद्ध साहित्यकार स्वामी वाहिद काजमी अंबाला (छावनी) में रहते हैं। भारतीय इतिहास व साहित्य के जानकार हैं।  भारत की सांझी संस्कृति व उदार परंपराओं को विशेष तौर पर उदघाटन करते हैं। समाज की और विशेषतौर पर नई पीढ़ी की साहित्य से दूरी के प्रति चिंचित हैं। देस हरियाणा के पन्नों

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नयी सुबह तक

कुरुक्षेत्र, 10 मार्च देस हरियाणा द्वारा स्थानीय महात्मा ज्योतिबा फुले सावित्रीबाई फुले पुस्तकालय में देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिव रमन गौड के काव्य-संग्रह नयी सुबह तक पर समीक्षा गोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में शिव रमन गौड ने अपने काव्य-संग्रह की कविताओं का पाठ किया। संगोष्ठी का शुभारंभ महात्मा

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अन्तराष्ट्रीय-महिला दिवस का इतिहास – प्रोफेसर सुभाष सैनी

  अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है। ये आइडिया एक औरत का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी औरतों की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस वक़्त कॉन्फ़्रेंस में 17 देशों की 100 औरतें मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया.

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चेतना का रचनाकार तारा पांचाल

रविंन्द्र गासो                हरियाणा में लिखे जाने वाला साहित्य राष्ट्रीय विमर्शों में कम ही शामिल रहा। इसके कारण, कमियां या उपेक्षा अलग चर्चा का विषय है। इस सब में हरियाणा की रचनाधर्मिता का माकूल जवाब देने में तारा पांचाल का अकेला नाम ही काफी है। बेशक और ज्यादा नाम नहीं हैं। कई पक्ष-कारण हैं।

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प्रेमचंद की प्रासंगिकता

  आज के समय में प्रेमचंद के साथ हमारा क्या रिश्ता बनता है। प्रेमचंद और हमारे साहित्यकार किस तरह से आने वाली पीढिय़ों को रस्ता दिखाते हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण बात है। प्रेमचंद 1936 में इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन वे समय बीतने के साथ-साथ और अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं। वे 1880 में पैदा हुए और 1907-08

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साहित्य का अध्ययन-अध्यापन

  prof. Krishan Kumar, Ex-Director NCERT delivered a lecture on teaching and study of literature on sept. 13 at shahid Udham Singh Govt. College, Indri (Karnal). प्रो. कृष्ण कुमार की भाषण. साहित्य का अध्ययन-अध्यापन. शहीद उधमसिंह राजकीय महाविद्यालय, इंद्री (करनाल) में १३ सितबर २०१८। साहित्य के छात्रों और अध्यापकों के लिए शानदार संवाद। शिक्षा साहित्य भाषा के सवालों को छूता

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मुलाकात ‘डरी हुई लड़की’ से…

नवरत्न पांडे इस उपन्यास की कुछ सतरें सर, उस आत्मा को किस डिटर्जेंट पाउडर से धोऊं जो मैली हो चुकी है-डरी हुई लड़की ने कहा है। उसकी समूची देह प्रश्नवाचक हो गयी हो जैसे।  ऐसे शरीर को, जो मुझे प्रतिद्वंद्वी नज़र आता है, उसे अपने साथ रखना कितना कठिन है।  मैं एक खस्ताहाल चुप लेकर बैठा हूं, डाक्टर के सामने।

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