सूचना कानून इतिहास और बदलाव – राजविंदर सिंह चंदी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के अनुसार हर भारतीय नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। हमने संसदीय लोकतंत्र अपनाया है। जनतंत्र में राज्य की सारी शक्तियाँ जनता में निहित होती हैं। जनता द्वारा अपने कार्यों जिनमें नीतियां, कानून-व्यवस्था,परियोजनाओं, निर्णय, प्राशसनिक गतिविधियों का क्रियान्वयन आदि शामिल है, के लिए सरकार चुनी जाती है।

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पहाड़ के पितामह चंडीप्रसाद भट्ट – अमर नाथ

नदियाँ हिन्दुस्तान की धमनियाँ हैं। इनमें जल रूपी रक्त का संचार पहाड़ों से होता है। इन धमनियों की अविरलता बनाए रखने के लिए पहाडों और उनके जंगलों को बचाए रखना अनिवार्य है। चंडीप्रसाद भट्ट ने पर्यावरण के संबंध में अपना ज्ञान अपने अनुभव से अर्जित किया। वे पहाड़ पर जन्मे, पहाड़ पर पले -बढे और उन्होंने पहाड़ को कर्मस्थली बनाकर उसे जिया।

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हिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ

वैश्वीकरण के बाद अनुसंधान के क्षेत्र में और भी तेजी से गिरावट आई है. अब तो हमारे देश की पहली श्रेणी की प्रतिभाएं मोटी रकम कमाने के चक्कर में मैनेजर, डॉक्टर और इंजीनियर बनना चाहती हैं और जल्दी से जल्दी विदेश उड़ जाना चाहती हैं. किसी ट्रेडिशनल विषय में पोस्टग्रेजुएट करके शोध करना उन्हें नहीं भाता. जो डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाते वे ही अब मजबूरी में शोध का क्षेत्र चुन रहे हैं. वैश्वीकरण और बाजारवाद ने नयी प्रतिभाओं का चरित्र ही बदल दिया है.

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‘हम भारत के लोग‘ और आप बाबा साहब? – कनक तिवारी

बाबा साहब! ताजा इतिहास में गांधी सुकरात की तरह सत्य के उपासक, नेहरू प्लेटो की तरह गणतंत्र के रचयिता और आप पूरा ज्ञानशास्त्र विवेक, जेहन और कर्म में बिखेरते महान अरस्तू की भूमिका में रहे। तीनों हमारी आत्मा के रचयिता नहीं होते, तो ‘हम भारत के लोग‘ गोरों की गुलामी से कहां छूटते। गांधी और नेहरू ने इतिहास की खुर्दबीन से तुम्हें ढूंढ़कर नायाब हीरा निकाला।

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शाहीन बाग़ के प्रकाशपुंज – स्वराजबीर – अनु. – जगजीत विर्क

गुरु गोबिन्द सिंह की अगुवाई में सिखों ने चमकौर की गढ़ी और नारनौल के सतनामियों ने नारनौल इलाके की कच्ची गढ़ियों में से हाकिमों के विरुद्ध लड़ाई लड़ी थी। उन गढ़ियों में से उठे संघर्ष कामयाब हुए और लाल किले में बैठे हाकिमों को हार का मुंह देखना पड़ा। ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना अपने आप में मानवता की जीत है। जम्हूरियत के लिए हो रहे संघर्षों की खुशबू बसी हुई है और खुशबू को कत्ल नहीं किया जा सकता।

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ननकाना साहिब : एक ऐतिहासिक विरासत – सुरेंद्र पाल सिंह

आजकल करतारपुर कॉरिडोर खुल चुका है और गुरु नानकदेव जी की 550वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में रोजाना हज़ारों श्रद्धालु पाकिस्तान जा पा रहे हैं. फ़रवरी 1921 में ननकाना साहब गुरुद्वारा के महंत नारायण दास ने पठानों के हाथों 139 सिक्खों को (थॉर्नबर्न ICS के अनुसार) या तो ज़िन्दा जलवा दिया था या मरवा दिया था क्योंकि उसे शक था कि वे उसे गद्दी से हटाना चाहते थे.

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हिटलर के नाम गांधी के पत्र

Post Views: 329 गांधी जी संवाद पूरा करने में विश्वास रखते थे। मन में कोई ग्लानि हो, किसी से शिकायत हो, अपनी बात किसी तक पहुंचाने की ज़रूरत हो या…

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सामाजिक सुरक्षा के नाम पर – रीतिका खेड़ा

अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां अभिजात वर्ग के बीच सामाजिक सुरक्षा पर सहमति और समर्थन कमजोर है। हम यह भूल जाते हैं कि खुद की सफलता में सौभाग्य या लॉटरी का उतना ही हाथ है, जितना खुद के जतन या मेहनत का है।

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अंतर-जातीय विवाह से मिटेगा जातिवाद – स्वामी अग्निवेश

Post Views: 374 हमें अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों के पक्ष में अभियान चलाना होगा, क्योंकि प्रेमी जोड़े किसी दबाव में आकर शादी नहीं करते हैं बल्कि अपने मन के…

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जाति प्रथा से भीषण है लैंगिक विषमता – तस्लीमा नसरीन

धार्मिक कट्टरवाद तो पहले से ही दुनिया के अनेक देशों में है। अब भारत में भी धर्म को ज्यादा महत्व दिया जाने लगा है। जब कि इतिहास गवाह है कि जहां-जहां धार्मिक कट्टरवाद को बढ़ावा मिलता है, वहां वहां समाज के कमजोर वर्गों, जैसे निचली जातियों और महिलाओं, का शोषण और बढ़ जाता है।