Category Archives: सामयिक

धर्म और हमारा स्वतन्त्रता संग्राम; भगत सिंह

धर्म और हमारा स्वतन्त्रता संग्राम – भगत सिंह“हमारी आज़ादी का अर्थ केवल अंग्रेजी चंगुल से छुटकारा पाने का नाम नहीं, वह पूर्ण स्वतंत्रता का नाम है जब लोग परस्पर घुल-मिलकर रहेंगे और दिमागी गुलामी से भी आज़ाद हो जायेंगे।” मई, 1928 के ‘किरती’ में यह लेख छपा। जिसमें भगत सिंह ने धर्म की समस्या पर प्रकाश डाला है। अमृतसर में

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म्हारै गाम का चौकीदार – #MainBhiChowkidar

म्हारै गाम का चौकीदार बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने ए देणा पड़े करदा। कोटा म्हं चीनी मिलणी होंदी, माटी का तेल मिलणा होंदा, पिलसण मिलणी होंदी, पंचैत होंदी, या फैर बोट पड़ने होंदे या सांग होंदा। ओ सारा गाम

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‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ – पंजाब में होली नहीं मनाया जाता है होल्ला-मोहल्ला

‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ –

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चुनाव आचार संहिता : आपके अधिकार और ‘उनकी’ ज़िम्मेदारी

चुनाव आचार संहिता : आपके अधिकार और ‘उनकी’ ज़िम्मेदारी मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट एक तरह का ऐसा दस्तावेज है, जिसपर सभी राजनीतिक दलों की सहमति होती है। सामान्य भाषा में समझें तो पॉलिटिकल पार्टी अपने बरताव पर खुद ही नियंत्रण करने की प्रतिबद्धता जाहिर करती है। समय-समय खुद ही इसमें सुधार करते रहते हैं। अजय कुमार 14 Mar 2019   

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यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? – #Desharyana_Counter_Fake_News

#Desharyana_Counter_Fake_News #देसहरियाणा-काउंटर-फेकन्यूज भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार सहिंता के अनुसार किसी मतदाता को मतदान करने के पक्ष में रिश्वत देना, डराना, धमकाना, मदतान केंद्र तक ले जाने के लिए वाहन आदि का प्रयोग करना अपराध है। पहली बार मतदान करने वाले युवकों को रिझाने के हथकंडे क्या यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? लोकतंत्र का महापर्व कहे

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पूंजीवाद को संभावित विद्रोहों से है गंभीर खतरा – पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

रघुराम राजन ने कहा कि समाज में संभावित ‘विद्रोह’ की स्थिति लोगों को अवसर नहीं मिल पाने के कारण पूंजीवाद खतरे में अवसर नहीं मिल पाने से पूंजीवाद के खिलाफ होता है विद्रोह 2008 के आर्थिक संकट से भी बड़ा होगा आने वाला संकट आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जताते हुए कहा है कि पूंजीवाद को ‘गंभीर

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राजगुरू, सुखदेव व भगत सिंह की शहादत पर – बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर संपादकीय लेख

समसामयिक विचार (जनता, 13 अप्रैल 1931) भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू इन तीनों को अन्ततः फांसी पर लटका दिया गया। इन तीनों पर यह आरोप लगाया गया कि उन्होंने सान्डर्स नामक अंग्रेजी अफसर और चमनसिंह नामक सिख पुलिस अधिकारी की लाहौर में हत्या की। इसके अलावा बनारस में किसी पुलिस अधिकारी की हत्या का आरोप, असेम्ब्ली में बम फेंकने का आरोप

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अछूत समस्या – विद्रोही उर्फ भगत सिंह

अछूत समस्या – पीडीएफ डाउनलोड करें शहीद भगत सिंह ने जब यह लेख लिखा वह मात्र 16 वर्ष के किशोर थे। लेकिन इस लेख से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि मात्र 16 वर्ष की आ यु में भी वह कितने महान बुद्धिजीवी थे। आज से 96 वर्ष पहले लिखे इस लेख में शहीद भगत सिंह ने अछूत समस्या का

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अन्तराष्ट्रीय-महिला दिवस का इतिहास – प्रोफेसर सुभाष सैनी

  अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष, 8 मार्च को मनाया जाता है। ये आइडिया एक औरत का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी औरतों की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस वक़्त कॉन्फ़्रेंस में 17 देशों की 100 औरतें मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया.

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