Category Archives: सामयिक

अंतहीन संकट

डा. महावीर शर्मा 1929-30 में अमरीका में महामंदी का संकट आया, जिसमें बड़े-बड़े बैंक व अन्य वित्तीय संस्थान दिवालिया हो गए। दुनिया के शेयर बाजारों में अफरा-तफरी फैल गई। इसका व्यापक असर यूरोप व अन्य देशों पर भी पड़ा। यह महामंदी द्वितीय विश्व युद्ध तक जारी रही। अमरीकन सरकार की ‘न्यू डील’ भी इसका असर दूर करने में असफल रही।

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सनक में तब्दील होती सेल्फी और वीडियो बनाने की भेड़चाल

अनिल पाण्डेय (लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से प्रसारण पत्रकारिता में स्नातकोत्तर हैं। लेखक पूर्व में प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवम् संचार विश्वविद्यालय के मीडिया प्रबंधन विभाग सहित इलेक्ट्रानिक मीडिया विभाग में बतौर सहायक प्राध्यापक (अतिथि) अध्यापन कार्य कर चुके हैं। लेखक संप्रति कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सेक्टर-1, पंचकूला, हरियाणा में बतौर सहायक

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मार्क्स के जन्म को दो सौ साल पूरे हो चले

अमन वासिष्ठ (मार्क्स के जन्म को दो सौ साल हो चुके हैं, मार्क्स ने समाज को नए ढंग से व्याख्यायित किया। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग-संघर्ष के सिद्धांतों को स्थापित किया। मार्क्सवादी विचारधारा ने साहित्य-कलाओं को भी गहरे से प्रभावित किया है। मार्क्स के विचारों ने दुनिया को समझने में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसके परिणामस्वरुप दुनिया में नई किस्म की

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हरियाणा में अनुसूचित जाति आयोग

सुरेंद्र पाल सिंह  हरियाणा में जाति आधारित शोषण-उत्पीड़न अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा। सामाजिक स्तर पर बहुत जघन्य कांड  हरियाणा के समाज ने देखे। शासकीय मशीनरी में भी भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। निदान के लिए मानवाधिकार आयोग और अनुसूचित जाति आयोग के गठन की जरूरत महसूस की गई और लोगों ने इस तरह की व्यवस्था बनाने

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खाप पंचायत – वर्तमान स्वरूप

डी.आर. चौधरी एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में हर साल सम्मान के नाम पर लगभग एक हतार हत्याएं होती हैं । इसमें 900 हत्याएं पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, देहात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होती हैं । इस कुकृत्य में हरियाणा सबसे आगे है । पिछले कुछ महीनों में तो इस छोटे से प्रदेश में ऐसी हत्याओं की बाढ़ सी आ

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हरियाणाः तब और अब

राजेंद्र सिंह ‘सोमेश’  हरियाणा का वर्तमान स्वरूप एक नवम्बर सन् उन्नीस सौ छियासठ को मिला। तब से लेकर अनेक उतार-चढ़ावों को पार करते इस प्रांत ने कई पड़ाव पार किए हैं। सर्वाधिक प्रगति तो हरियाणा ने कृषि क्षेत्र में की है। पहले हरियाणा का अधिक क्षेत्र असिंचित क्षेत्र था और ज्यादा भू-भाग में पानी की अनुपलब्धता थी। इस कारण बाजरा,

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नरेश कुमार – हरियाणा में स्कूली शिक्षा की बिगड़ती स्थिति

हरियाणा में स्कूली शिक्षा की तस्वीर आए दिन लगातार धुंधली होती जा रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश में 25 हजार नए शिक्षकों की नियुक्ति का ऐलान किया है। पिछले दिनों से नए शिक्षकों की भर्ती के लिए आ रही नए-नए नियमों की खबरें असमंजस की स्थिति में ही बढ़ोतरी कर रही है। इन शिक्षकों की भर्ती

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धर्मवीर सिंह – गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम नहीं आरक्षण

बीच बहस में डीएसपी ऑफिस से निकलते ही उस सिपाही के चेहरे पर गुस्से और हिकारत का भाव था। गेट पर खड़े उसके साथी संतरी ने पूछा कि छुट्टी मंजूर हो गई क्या? गुस्से से तमतमाए सिपाही ने अपनी परंपरागत नफरत के साथ कहा, साले चमार ने मना कर दिया। करीब 22 साल पहले का जींद जिले के नरवाना उपमंड़ल

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डा. सुभाष चंद्र – मंहगाई डायन खाए जात है

मंहगाई की प्राकृतिक आपदा या संकट नहीं है, बल्कि इसके पीछे निहित स्वार्थ हैं। वे स्वार्थ हैं अधिक से अधिक लाभ कमाने के। पूंजीवादी व्यवस्था लाभ पर टिकी होती है। लाभ कमाने के दो ही तरीके अभी तक पूंजीवाद कर पाया है। एक तो श्रम का कम हिस्सा देकर तथा दूसरा अपने उत्पाद के बदले में अधिक लेकर। जब बाजार

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विकास साल्याण – अलीगढ़ : समलैंगिकता पर विमर्श

समलैंगिकता को अलग-अलग दृष्टि से देखा जाता है कुछ समलैंगिकता को मानसिक बीमारी मानते हैं। कुछ इसे परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आदत मानते हैं तो कुछ एक सामान्य प्राकृतिक कृत्य मानते हैं। लेकिन तीनों ही स्थितियों में किसी भी प्रकार से इसे अपराध या पाप नहीं माना जा सकता। वह कार्य जिसे बिना किसी को कोई नुकसान पहुंचाए अपनी इच्छा

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