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सिंघु बॉर्डर पर निहंगों की शर्मनाक कारस्तानी – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 129 गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के नाम पर वास्तव में सरबलोह ग्रंथ के बहाने एक नशेड़ी, गरीब, दलित सिख लखबीर सिंह को जिस बेरहमी से निहंगों ने…

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पूजा में बलि- प्रथा- अमरनाथ

बलि के पीछे का मुख्य कारण इन्सान का मांस भक्षण है. जबतक इन्सान को दूसरे जानवरों के मांस में स्वाद मिलेगा तबतक वह उनकी कुर्बानी भी करता रहेगा, जानवरों की बलि भी देता रहेगा. इन्सान अपने ईश्वर को वही चीजें भेंट करता है जो वह खुद पसंद करता है (लेख से)

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डी.आर. चौधरी होने के मायने – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 314 2 जून को अलसुबह रोहतक से एक अजीज का फोन आया कि डी.आर. चौधरी का शायद इंतकाल हो चुका है। मेरे दिल ने तुरंत शायद को यकीन…

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आर्य समाज और सांप्रदायिक तत्व – राम मोहन राय

Post Views: 12 आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में की थी। इसके लिए सर्वप्रथम उन्होंने इसके नियमों की रचना की और बाद में स्थानादि की…

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डॉक्टर महावीर नरवाल

Post Views: 39 जीवन के संग्राम और समाज बदलने के संघर्ष में कभी हार न मानने वाले डॉक्टर महावीर नरवाल सांसों की लड़ाई हार गए। उन्होंने रोहतक के पोजीट्रॉन अस्पताल…

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बंगाल का वह पक्ष जिसे बाहर के लोग बहुत कम जानते हैं – अमरनाथ

Post Views: 37 आजकल बंगाल में हो रही राजनीतिक हिंसा की चर्चा चारों तरफ है. यहाँ राजनीतिक हिंसा का एक इतिहास है. मुझे लगता है कि इसकी जड़ें नक्सलबाड़ी आंदोलन…

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वर्तमान किसान आंदोलन: एक नज़र- सुरेन्द्र पाल सिंह

हिंदू- मुस्लिम- सिक्ख ने अपनी अपनी नकारात्मक विरासतों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया है और यही है इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी। (लेख से )

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बाज़ारवाद का नीतिगत विरोध नाकाफी, निजी जीवन में भी ज़रूरी-राजेन्द्र चौधरी

लेखक महर्षि दयानंद विश्विद्यालय, रोहतक के पूर्व प्रोफेसर तथा कुदरती खेती अभियान, हरियाणा के सलाहकार हैं.