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पथ की साथी सुभद्राकुमारी चौहान – महादेवी वर्मा

Post Views: 8 हमारे शैशवकालीन अतीत और प्रत्यक्ष वर्तमान के बीच में समय- प्रवाह का पाठ ज्यों-ज्यों चौड़ा होता जाता है त्यों-त्यों हमारी स्मृति में अनजाने ही एक परिवर्तन लक्षित…

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मुक्तिबोध : एक संस्मरण – हरिशंकर परसाई

Post Views: 13 भोपाल के हमीदिया अस्पताल में मुक्तिबोध जब मौत से जूझ रहे थे, तब उस छटपटाहट को देखकर मोहम्मद अली ताज ने कहा था – उम्र भर जी के भी न जीने का अन्दाज आयाजिन्दगी छोड़ दे पीछा मेरा मैं बाज आया जो मुक्तिबोध…

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प्रसाद : जैसा मैंने पाया – अमृतलाल नागर

Post Views: 11 प्रसादजी से मेरा केवल बौद्धिक संबंध ही नहीं, हृदय का नाता भी जुड़ा हुआ है। महा‍कवि के चरणों में बैठकर साहित्‍य के संस्‍कार भी पाए हैं और…

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पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ- नामवर सिंह

इन पोथियों का मूल्य उन पर लिखी कीमत में नहीं, दुकानदार की आँखों में नहीं, मेरी डिग्रियों में नहीं, अध्यापक के वेतन में नहीं। उस कोटि-कोटि जनता के हृदय में है, उसकी आँखों में है, उसके हाथों में है। (लेख से )

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यादों के आइने में भगतसिंह और उनके साथी – यशपाल

Post Views: 625 मैं यह कहानी व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर लिख रहा हूं। भगत सिंह, सुखदेव और मैं कालिज के सहपाठी थे। भगवतीचरण हम लोगों से दो बरस आगे…

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और सफर तय करना था अभी तो, सरबजीत! – ओमप्रकाश करुणेश

Post Views: 200 ओम प्रकाश करुणेश  (कथाकर व आलोचक सरबजीत की असामयिक मृत्यु पर लिखा गया संस्मरण) सरबजीत के साथ पहली मुलाकात ठीक ठाक से तो याद नहीं, पर खुली-आत्मीय भरी…

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राठी साहिब के साथ आधी सदी – वी बी अब्रोल

Post Views: 232  वी.बी.अबरोल (प्रोफेसर वी बी अबरोल राजस्थान विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करके जाट कालेज, रोहतक में अंग्रेजी के प्राध्यापक नियुक्त हुए। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में चले शिक्षक आंदोलन…

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हम ढूंढते फिरे जिन्हें खेतों और गलियों में – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 371 शमशेर बहादुर सिंह  (13-1-1911—12-5-1993) आज से करीब 64 साल पहले मैं शमशेर के इलाके में ही पैदा हुआ था। उनके पैतृक गांव ऐलम (मुज्जफरनगर) से मेरा पैतृक…

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पितृतुल्य प्रो. शिव कुमार मिश्र – ओम सिंह अशफाक

Post Views: 348 शिव कुमार मिश्र (2-2-1931—21-6-2013) जी का जाना हिन्दी जगत में सक्रिय विमर्श और रचनात्मक आलोचना के एक स्तम्भ का उखड़ जाना है। समकालीन परिदृश्य में इस वय में…