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संपादकीय

जनपक्षीय राजनीति का मार्ग प्रशस्त करें

प्रोफेसर सुभाष चंद्र                    सेवा देश दी जिंदड़िए बड़ी ओखी, गल्लां करणियां ढेर सुखल्लियां ने। जिन्नां देश सेवा विच पैर पाइया उन्नां लख मुसीबतां झल्लियां ने।                   ...

वैचारिक बहस को जन्म दे रही है ‘देस हरियाणा’

प्रोफेसर सुभाष चंद्र विकास होग्या बहुत खुसी, गामां की तस्वीर बदलगी भाईचारा भी टूट्या सै, इब माणस की तासीर बदलगी -रामेश्वर गुप्ता पिछले दस-बारह सालों से 'हरियाणा...

लिंग-संवेदी भाषा की ओर एक कदम

डा. सुभाष चंद्र अपने अल्फ़ाज पर नज़र रक्खो, इतनी बेबाक ग़ुफ्तगू न करो, जिनकी क़ायम है झूठ पर अज़मत, सच कभी उनके रूबरू न करो। - बलबीर सिंह राठी आजकल संवेदनशील...

सम्पादकीय – इनआमे-हरियाना

 संपादकीय इनआमे-हरियाना हमें जिस रोज से हासिल हुआ इनआमे-हरियाना। बनारस की सुबह से खुशनुमा है शामे-हरियाना। न क्यों शादाब हो हर फ़र्दे-खासो आमे हरियाना। तयूरे-बाग़ भी लेते हैं जबकि...