पूंजीवाद और स्वास्थ्य सेवाओं की बीमारी – नवमीत

Post Views: 294 सार्वजनिक स्वास्थ्य का आधुनिक इतिहास भारत में ब्रिटिश काल से शुरू होता है जब अंग्रेजों ने भारत में अपना शासन सुदृढ़ करने के लिए अन्य चीजों के…

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पुस्तक संस्कृति विकसित करने की जरूरत है – प्रोफेसर कृष्ण कुमार

Post Views: 346 मैं एक ऐसी बात कहना चाहूँगा जो शायद आपको कुछ नागवार गुजरे। कोई भी इस बात से असहमत नहीं है कि स्कूलों में लाइब्रेरी होनी चाहिए और…

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डॉ नवमीत – डेंगू के बारे में

Post Views: 501 डेंगू के बारे में चंद बातें डॉ नवमीत आजकल देश में डेंगू फैला हुआ है और हजारों लोग इसकी चपेट में हैं। कई लोगों की मृत्यु हो…

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हरियाणा में स्कूली शिक्षा की बिगड़ती स्थिति – नरेश कुमार

Post Views: 208 हरियाणा में स्कूली शिक्षा की तस्वीर आए दिन लगातार धुंधली होती जा रही है। हाल ही में राज्य सरकार ने प्रदेश में 25 हजार नए शिक्षकों की…

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परीक्षा से अधिक कठिन है मूल्यांकन – कमलानंद झा

Post Views: 1,358 मेरे बिहार (वैसे लगभग पूरे देश में) में मूल्यांकन के संदर्भ में एक फिकरा अत्यंत प्रसि़द्ध है कि एक साल की पढा़ई तीन घंटे की लिखाई और…

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बाजार के हवाले शिक्षा -सुरेन्द्र ढिल्लों

Post Views: 164 शिक्षा हरियाणा प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र  में आए परिवर्तनों पर जैसे ही नजर जाती है, तो यह बात स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है कि प्रदेश…

उमंग स्कूल – जिसका तसव्वुर करने के लिए साहस चाहिए…. -विरेन्द्र सरोहा

Post Views: 509 शिक्षा प्रतियोगिता की दौड़ में जकड़े और अंक हासिल करने के बचपन विरोधी माहौल में एक ऐसा स्कूल जिसमें परीक्षाएं नहीं होंगी, खेल खेल के लिए होंगे,…

स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरियाणा के 50 साल – डा. रणबीर सिंह दहिया

Post Views: 211 सेहत एक तरफ हरियाणा में धनाढ्य वर्ग है दूसरी तरफ बड़ा हरियाणा इस विकास की अन्धी दौड़ में गिरता पड़ता गुजर बसर कर रहा है। एक हिस्सा…

हरियाणा में स्कूली शिक्षा दशा और दिशा- अरुण कुमार कैहरबा

अधिकतर निजी स्कूलों के पास ना तो खेल के मैदान हैं, ना ही बच्चों की संख्या के अनुकूल बड़ा प्रांगण। कमरों के आकार छोटे हैं। कइ अध्यापकों के पास बुनियादी प्रशिक्षण नहीं है। स्कूलों के मालिक और प्रबंधकों की मुनाफाखोरी अलग से आफत है। अधिकतर निजी स्कूलों में पढ़ा रहे प्रशिक्षित और गैर-प्रशिक्षित अध्यापकों का मानदेय इतना कम है कि वे मुश्किल से गुजारा कर पाते हैं। तमाम पहलुओं के बावजूद समय का यथार्थ यही है कि निजी शिक्षा संस्थान लगातार बढ़ रहे हैं। सरकार द्वारा भी उन्हें संरक्षण दिया जा रहा है। जबकि सरकारी स्कूलों की उपेक्षा हो रही है।

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रेनू यादव – भारत में उच्च शिक्षा और युवा वर्ग

Post Views: 912 शिक्षा आज भारत का उच्च शिक्षा का ढांचा पूरे विश्व में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों…