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कोरोना के समय में ऑनलाइन स्कूली शिक्षा – राजेंद्र चौधरी

कोरोना महामारी ने जीवन के ऑनलाइन पक्ष को बढ़ावा दिया है और ऑनलाइन शिक्षा इसका एक प्रमुख घटक है। स्कूल और कॉलेज सबसे पहले बंद हुए थे और शायद सब से अंत में ही खुलें। इस लिए ऑनलाइन की समीक्षा ज़रूरी है।

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हिन्दी में शोध का धंधा – डॉ. अमरनाथ

वैश्वीकरण के बाद अनुसंधान के क्षेत्र में और भी तेजी से गिरावट आई है. अब तो हमारे देश की पहली श्रेणी की प्रतिभाएं मोटी रकम कमाने के चक्कर में मैनेजर, डॉक्टर और इंजीनियर बनना चाहती हैं और जल्दी से जल्दी विदेश उड़ जाना चाहती हैं. किसी ट्रेडिशनल विषय में पोस्टग्रेजुएट करके शोध करना उन्हें नहीं भाता. जो डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन पाते वे ही अब मजबूरी में शोध का क्षेत्र चुन रहे हैं. वैश्वीकरण और बाजारवाद ने नयी प्रतिभाओं का चरित्र ही बदल दिया है.

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सामाजिक सुरक्षा के नाम पर – रीतिका खेड़ा

अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां अभिजात वर्ग के बीच सामाजिक सुरक्षा पर सहमति और समर्थन कमजोर है। हम यह भूल जाते हैं कि खुद की सफलता में सौभाग्य या लॉटरी का उतना ही हाथ है, जितना खुद के जतन या मेहनत का है।

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जागरूकता से ही रोकी जा सकती है एड्स की महामारी – अरुण कुमार कैहरबा

Post Views: 311 दुनिया में एचआईवी/एड्स एक महामारी का रूप लेता जा रहा है। इस जानलेवा विषाणु के बारे में जागरूकता की कमी भारत सहित विकासशील देशों की सबसे बड़ी…

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निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहा असंतोष -दीपक राविश

Post Views: 292 वर्तमान समय में निजी स्कूल शिक्षा के प्रति बढ़ रहे असंतोष के दो मुख्य तात्कालिक कारण हैं। पहला समय-समय पर की जाने वाली फीस वृद्धियों से अभिभावकों…

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सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का गिरता स्तर

Post Views: 170 अमरजीत सैनी शिक्षा ही मनुष्य को सही मायने में मानव बनाती है। समय परिवर्तन के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्रों में बहुत परिवर्तन हुए। सरकार ने शिक्षा के…

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एक नदी के गंदे नाले में बदल जाने का सफर – पंकज चतुर्वेदी

Post Views: 455 पंकज चतुर्वेदी आज के हिंदुस्तान के सम्पादकीय पर यह लेख बहुत दुःख के साथ, हमारी काहिली के प्रति रोष के साथ है, काश इस लोकसभा चुनाव में…

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ज़ज़्बे की पाठशालाःगांधी स्कूल रोहतक -नरेश कुमार

Post Views: 578 शिक्षा व्यक्ति व समाज के विकास का माध्यम है। अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ स्कूल में प्रवेश और कक्षा में सर्वोच्च स्थान पर लाने की होड़ इस दौर…

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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन – डा. हरदीप राय शर्मा

Post Views: 1,575 (जीवन जीने के क्रम में मनुष्य कूड़ा कचरा उत्पन्न करता है, लेकिन अब कूड़े-कचरे को ठिकाने लगाने की समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है। पर्यावरण…

हिंदी साहित्य अध्ययन-अध्यापनः चुनौतियां और सरोकार- डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 1,923  1922-25 के आस-पास बी.एच.यू. और इलाहाबाद में हिन्दी विभाग खुलने शुरू हुए थे। अभी  उच्च शिक्षा में एक विषय के तौर पर हिंदी साहित्य-अध्ययन के सौ साल…