Category: व्यंग्य

अपनी-अपनी हैसियत- हरिशंकर परसाई

फूहड़पन के लिए भी हैसियत चाहिए। मेरी हैसियत नहीं है तो लालाजी के बेटों पर हँस रहा हूँ। पैसा और फूहड़पन दोनों आ जाए तो मैं गहरा रंग खरीदकर चेहरे को रँगवा लूँ-एक गाल पीला, दूसरा लाल नाक हरी, कपाल नीला।।  (लेख से ) … Continue readingअपनी-अपनी हैसियत- हरिशंकर परसाई