Category Archives: विविध

म्हारै गाम का चौकीदार – #MainBhiChowkidar

म्हारै गाम का चौकीदार बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने ए देणा पड़े करदा। कोटा म्हं चीनी मिलणी होंदी, माटी का तेल मिलणा होंदा, पिलसण मिलणी होंदी, पंचैत होंदी, या फैर बोट पड़ने होंदे या सांग होंदा। ओ सारा गाम

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भारतीय सेना का पाक-अधिकृत कश्मीर पर हमला

भारतीय वायु सेना ने पाक-अधिकृत कश्मीर के कस्बे बालकोट में सुबह 3.30 मिनट पर हमला किया है। इस हमले के लिए 12 लाड़कू विमानों ने सुबह 3 बजे अंबाला से उड़ान भरी थी। विदेश सचिव ने संवादाताओं को जानकारी देते हुए बताया विश्वसनीय खुफिया जानकारी मिली थी कि 12 दिन पहले पुलवामा हमले को अंजाम देने के बाद जैश ए

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सुनो – कविता वर्मा

कविता सुनो!  मुठ्ठी भर रंग घोल दो  , जिंदगी में । नही देखे रंग और रौशनी के त्यौहार । एक उमर और जी लूं , हवाँए नई साँसों में घोल दो। सुनो, फीके सा ज़ायका है ढलते से दिनों का , कोई सूरज चमका दो कहीं। सुनो मुठ्ठी भर रंग घोल दो, बहती उमर में , ओढनी तो ओढ लूँ,

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सांप

रत्न कुमार सांभरिया वरिष्ठ साहित्यकार रत्न कुमार सांभरिया कहानी के नामचीन हस्ताक्षर हैं। कहानी सृजन के क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी कहानियों में ठेठ देसीपन व जमीनी गंध है। इन दिनों सांभरिया ‘सांप’ नामक उपन्यास का लेखन कर रहे हैं, जो घुमंतू जाति सपेरा-कालबेलिया के जीवन लोक, सामाजिक स्तर, शिक्षा, रीति-रिवाज और दुर्दशा पर आधारित

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चुराही पहेलियां (फड़ौणी)

चुराही (चंबा जिले के चुराह तहसील की पहाड़ी बोली) में पहेलियों को फड़ौणी कहा जाता है। जब बर्फ गिर रही होती है तो घर के सारे सदस्य रसोई में जमा रहता हैं। रसोई में लोहे का बड़ा चुल्हा होता है जिसे वह तंदूर कहते हैं वह पूरे कमरे को गर्म कर देता है। रसोई काफी बड़ी होती है। ठंड में

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हिमाचली व्यंजन

– अर्शदीप सिंह बिच्छु बूटी की सब्जी यह एक जहरीला पौधा है। हरे रंग और पान के आकार के पत्तों वाले इस पौधे पर असंख्य कांटे होते हैं। अगर कांटा कहीं छू जाए तो बिच्छु के काटने जैसा तेज दर्द होता है। यह दर्द लगभग 24 घंटे रहता है। इस लिए इस को बिच्छु बूटी कहा जाता है। जहां पर

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शंवाई-पंझेई – दो लड़कियों की बलि देकर बनाया गया था शिव मंदिर

– अर्शदीप सिंह चंबा जिले की सुंदर वादियों में स्थित है एक छोटी सी तहसील चुराह। चुराह तहसील ऊंचे पहाड़ों पर बसने वाले दो गांव इस इलाके के प्रसिद्ध गांव है एक का नाम है पंझेई और दूसरे का नाम है शंवाई। पंझेई ग्राम पंचायत है जिसके अंतर्गत लगभग 12 गांव आते हैं। इसको हिमगिरी इलाका भी कहा जाता है।

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जाट कहवै, सुण जाटणी

 प्रदीप नील वशिष्ठ आत्मकथ्य एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा कर इस नजऱ से देखा जाता है कि इस बेचारे को हिंदी या अंग्रेजी तो आती ही नहीं होगी। और यह या तो कम पढ़ा लिखा होगा या फिर

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मार्क्स के जन्म को दो सौ साल पूरे हो चले

अमन वासिष्ठ (मार्क्स के जन्म को दो सौ साल हो चुके हैं, मार्क्स ने समाज को नए ढंग से व्याख्यायित किया। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग-संघर्ष के सिद्धांतों को स्थापित किया। मार्क्सवादी विचारधारा ने साहित्य-कलाओं को भी गहरे से प्रभावित किया है। मार्क्स के विचारों ने दुनिया को समझने में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसके परिणामस्वरुप दुनिया में नई किस्म की

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प्रदीप कासनी – सरबजीत : एक दोस्त एक अदीब

आखिर दिसम्बर ‘98 का यह दिन आना ही था। दक दुर्निवार खिंच से आबद्ध कवि सधे कदमों से उस पाले को लांघ गया, जहां हम सब स्तब्ध और लाचार खड़े थे। पिछले साल के आखिरी माह की तेरह तारीख को सरबजीत नहीं रहा। अपनी मृत्यु से कुछ माह पहले एक अच्छे-भले, चलते-फिरते, हंसते-बोलते, सोचते और महसूसते शख्स को एक दिन

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