Category Archives: विविध

मार्क्स के जन्म को दो सौ साल पूरे हो चले

अमन वासिष्ठ (मार्क्स के जन्म को दो सौ साल हो चुके हैं, मार्क्स ने समाज को नए ढंग से व्याख्यायित किया। द्वंद्वात्मक भौतिकवाद, ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग-संघर्ष के सिद्धांतों को स्थापित किया। मार्क्सवादी विचारधारा ने साहित्य-कलाओं को भी गहरे से प्रभावित किया है। मार्क्स के विचारों ने दुनिया को समझने में क्रांतिकारी परिवर्तन किया। इसके परिणामस्वरुप दुनिया में नई किस्म की

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प्रदीप कासनी – सरबजीत : एक दोस्त एक अदीब

आखिर दिसम्बर ‘98 का यह दिन आना ही था। दक दुर्निवार खिंच से आबद्ध कवि सधे कदमों से उस पाले को लांघ गया, जहां हम सब स्तब्ध और लाचार खड़े थे। पिछले साल के आखिरी माह की तेरह तारीख को सरबजीत नहीं रहा। अपनी मृत्यु से कुछ माह पहले एक अच्छे-भले, चलते-फिरते, हंसते-बोलते, सोचते और महसूसते शख्स को एक दिन

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डा. सुभाष चंद्र – मंहगाई डायन खाए जात है

मंहगाई की प्राकृतिक आपदा या संकट नहीं है, बल्कि इसके पीछे निहित स्वार्थ हैं। वे स्वार्थ हैं अधिक से अधिक लाभ कमाने के। पूंजीवादी व्यवस्था लाभ पर टिकी होती है। लाभ कमाने के दो ही तरीके अभी तक पूंजीवाद कर पाया है। एक तो श्रम का कम हिस्सा देकर तथा दूसरा अपने उत्पाद के बदले में अधिक लेकर। जब बाजार

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 डॉ. गुरमीत सिंह – मीडिया और खाप पंचायते

जहां तक ऑनर किलिंग की घटनाओं की रिपोर्टिंग का प्रश्न है तो सभी समाचार पत्रों, चैनलो व बाकी माध्यमों ने इस नृशंस अपराध को पर्याप्त संवेदना के साथ रिपोर्ट किया है। हालांकि मीडिया द्वारा बार बार प्रयुक्त किए जा रहे ऑनर किलिंग शब्द के प्रयोग से कहीं न कहीं अपराधियों के महिमामंडन का संदेश भी जाता है। हत्या के साथ

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विपिन सुनेजा – खेतों में लहलहाता संगीत

संगीत हमारे देश की मिट्टी में बसा है। इस मिट्टी में अन्न उगाने वाले कि सान के जीवन में अनेक ऐसे क्षण आते हैं, जब वह भाव-विभोर होकर गाने लगता है। ग्राम्य जीवन पर आधारित अनेक फिल्मों में किसान के मनोभावों को व्यक्त करते हुए गीत रखे जाते रहे हैं, जिनका दृश्यांकन भी ऐसा रहा है कि वे दर्शकों के

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अमृतराय – प्रेम चंद

जीवनी (यशस्वी लेखक एवं प्रेमचंद के पुत्र ने जिस रूप में देखा-जाना प्रेमचंद को।) कैसा था यह आदमी देखने-सुनने मेें? हड्डियां बहुत चौड़ी। इन हड्डियों पर कभी बहुत काफी मांस था, खासा भरा हुआ, चौड़ा-चकला, रजपूती शरीर था वो जिसकी एक फोटो मिलती है, मय साफे और घनी-घनी लंबी मूछों के….यह देह सदा नहीं रही, चौदह साल की लंबी पेचिश

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दुलीचन्द रमन – करनाल : कर्ण नगरी से स्मार्ट सिटी

शहर आज जब हम करनाल की ऐतिहासिक यात्रा पर नजर दौड़ाते हैं तो यह महाभारतकालीन शहर करनाल अपनी जड़ें इतिहास में तलाशता हुआ दानवीर कर्ण से जुड़ता है। कर्णताल, कर्ण झील, कर्ण पार्क, कर्ण स्टेडियम इसके प्रमाण हैं कि वर्तमान में भी यह अपनी पुरातन पहचान समेटे हुए है। कभी सुरक्षा की दृष्टि से चाक-चौबंद और किलेबंदी के रूप में

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कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया – हरियाणा के सम्मुख सामाजिक चुनौती

समाज एक नवम्बर 1966 से पहले हरियाणा कभी भी प्रशासनिक व राजनीतिक ईकाई (यूनिट) नहीं था। इसके बावजूद इस क्षेत्र (हरियाणा) की एक विशिष्ट सांस्कृतिक व सामाजिक पहचान रही है, जिसका मौलिक स्वरुप आज तक निरन्तर बना रहा है। हरियाणा के सांस्कृतिक व सामाजिक विकास में भौगोलिक कारकों का बहुत योगदान रहा है। इस क्षेत्र में बहती घग्गर और यमुना

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नरेश कुमार – हरियाणा में प्रवासी मजदूर

सामाजिक न्याय हरियाणा इस वर्ष अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। ये 50 साल हर क्षेत्र में हुए बदलावों के गवाह हैं। हरित क्रांति के प्रभावों से कृषि पैदावार में गुणात्मक बढ़ोतरी हुई थी और  कृषक आबादी को बदहाली से उबरने मे कुछ राहत मिली थी। नब्बे के दशक तक प्रदेश की किसान-आबादी कृषि कार्यों में जी तोड़ मेहनत में

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हौसलों से उड़ान होती है – राजेश कुमार

मेरे पांव लडख़ड़ाते हैं लेकिन मेरे हौसलों को कभी लडख़ड़ाने नहीं दिया क्योंकि मुझे बहुत आगे तक जाना है इन्हीं पांवों से चलकर और बस आगे बढ़ते जाना है।’                      सुनील कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग से पीएचडी कर रहे सुनील कुमार का जन्म जींद जिले के थुआ नामक गांव में

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