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महर्षि दयानंद सरस्वती : हिंदी के प्रथम सेनापति – प्रो. अमरनाथ

Post Views: 42 आर्यसमाज के अवदान को आज लोग भूल चुके हैं किन्तु एक समय में हिन्दू समाज को कुरीतियों, कुप्रथाओं, अंधविश्वासों और कुसंस्कारों से मुक्त करने में आर्यसमाज की…

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बूढ़ासागर की पथरीली पटरियों पर: एक संस्मरण – कनक तिवारी

दिग्विजय महाविद्यालय के परिसर में अपने जिस पहले मकान में वे रहे थे, ठीक उसके पीछे बूढ़ासागर की पथरीली पटरियों पर बैठकर उस वक्त के शीर्षक ‘आशंका के द्वीपः अंधेरे में‘ वाली कविता का एकल श्रोता बनना मेरे नसीब में आया। (पोस्ट से)

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बाबा फरीद और हमारा समाज- सुमेल सिंह सिद्धू

सत्यशोधक फाउंडेशन व देस हरियाणा पत्रिका द्वारा आयोजित हरियाणा सृजन यात्रा के दौरान हांसी स्थित चार कुतुब में आयोजित सेमिनार में पंजाबी व सूफी साहित्य के जाने-माने विद्वान डॉ. सुमेल सिंह सिद्धू ने बाबा फरीद और हमारा समाज विषय पर व्याख्यान दिया। सेमिनार का संचालन करते हुए देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने कहा कि आज जान लेने वाले सड़क पर हैं, लेकिन देने वाले नहीं हैं। संतों-भक्तों व मध्यकाल के महापुरूषों के विचारों को खंगालने की जरूरत है, जोकि हमारी विरासत है। इस व्याख्यान की प्रस्तुति देस हरियाणा के सह-संपादक अरुण कुमार कैहरबा ने की है

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धर्म में लिपटी वतनपरस्ती क्या-क्या स्वांग रचाएगी – गौहर रज़ा

‘देस हरियाणा’ और ‘सत्यशोधक फाउंडेशन’ द्वारा 14-15 मार्च 2020 को कुरुक्षेत्र स्थित सैनी धर्मशाला में आयोजित ‘हरियाणा सृजन उत्सव-4’ में दोनों दिन सवाल उठाने और चेतना पैदा करने वाली कविताएं गूंजती रही। देश के जाने-माने वैज्ञानिक एवं शायर गौहर रज़ा के कविता पाठ के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। सत्र का संचालन रेतपथ के संपादक डॉ. अमित मनोज ने किया। पत्रकार गुंजन कैहरबा ने इसे लिपिबद्ध करके यहाँ प्रस्तुत किया है – सं.

त्रिमूर्ति राह दिखाएगी- सुभाष गाताड़े

‘गांधी, अंबेडकर और भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन’ विषय पर डॉ. भीम राव आंबेडकर के विचारों के विशेष संदर्भ में विचार रखने के लिए प्रसिद्ध दलित चिंतक सुभाष गाताड़े जी को आमंत्रित किया गया था। किन्हीं कारणों से वे सृजन उत्सव में नहीं पहुंच पाए। उन्होंने लिखित संदेश भेजा था जिसे देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने प्रस्तुत किया। उनका यह संदेश यहां दिया जा रहा है।- सं.

छुआछूत और सिक्ख पंथ: सौ साल पहले की कहानी- सुरेन्द्र पाल सिंह

जन्म – 12 नवंबर 1960 शिक्षा – स्नातक – कृषि विज्ञान स्नातकोतर – समाजशास्त्र सेवा, व्यावहारिक मनौवि‌ज्ञान, बुद्धिस्ट स्ट्डीज – स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से सेवानिवृत लेखन – सम सामयिक मुद्दों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित सलाहकर – देस हरियाणा कार्यक्षेत्र – विभिन्न संस्थाओं व संगठनों के माध्यम से सामाजिक मुद्दों विशेष तौर पर लैंगिक संवेदनशीलता, सामाजिक न्याय, सांझी संस्कृति व साम्प्रदायिक सद्भाव के निर्माण में निरंतर सक्रिय, देश-विदेश में घुमक्कड़ी में विशेष रुचि-ऐतिहासिक स्थलों, घटनाओं के प्रति संवेदनशील व खोजपूर्ण दृष्टि। पताः डी एल एफ वैली, पंचकूला मो. 98728-90401

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मीरा- प्रो. सुभाष चन्द्र

मीरा का जन्म सन् 1512 ई. में मेड़ता के राठौर वंश में रत्नसिंह के घर हुआ। मीरा के दादा दूदा के पांच पुत्र थे – वीरमदेव, रायसल, पंचायणा, रत्नसिंह तथा रायमल। दूदाजी ने मीरा के पिता रत्नसिंह को खर्च के लिए बारह गांव दिए हुए थे। कुड़की नामक गांव उनका केन्द्र था। कुड़की में पहाड़ी पर बसे छोटे-से दुर्ग में मीरा का जन्म हुआ। कुड़की मेड़ता से अठारह मील दूर है।

हम भारत के लोग और भारत का संविधान – कनक तिवारी

सत्यशोधक फाउंडेशन और देस हरियाणा पत्रिका द्वारा हर वर्ष आयोजित होने वाले चौथे हरियाणा सृजन उत्सव का शुभारंभ सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना पढ़ने के साथ हुआ। देस हरियाणा के संपादक डॉ. सुभाष चन्द्र ने अतिथियों का स्वागत करते हुए मौजूदा दौर की चुनौतियों के संदर्भ में साहित्यकारों व संस्कृतिकर्मियों की भूमिका पर चर्चा की। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता देस हरियाणा के सलाहकार प्रो. टी.आर. कुंडू ने की और संचालन डॉ. अमित मनोज ने किया। छत्तीसगढ़ से आए जाने-माने कानूनविद् श्री कनक तिवारी ने ‘हम भारत के लोग और भारत का संविधान’ विषय पर उद्घाटन भाषण दिया। उस भाषण को यहां दिया जा रहा है जिसकी प्रस्तुति देस हरियाणा के प्रबंधन टीम के सदस्य विकास साल्याण ने की है।

गाँधी, अम्बेडकर और भगत सिंह के चिंतन की सांझी जमीन- प्रोफेसर जगमोहन

हरियाणा सृजन उत्सव में ‘गाँधी, अम्बेडकर और भगत सिंह के चिन्तन की सांझी जमीन’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में शहीद भगत सिंह के भांजे व प्रख्यात चिंतक प्रो. जगमोहन सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए. सत्र का संचालन हरविन्द्र सिंह सिरसा ने किया. प्रस्तुति देस हरियाणा टीम के युवा सदस्य योगेश शर्मा ने की है.

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रहीम – राहुल सांकृत्यायन

रहीम असाधारण सुन्दर तरुण था। चित्रकार उसकी तस्वीरें उतारते थे, जिन्हें अमीर लोग अपनी बैठकों को सजाने के लिए लगाते थे। होश संभालते ही, रहीम का शायरों और कवियों, संगीतज्ञों और कलाकारों से संपर्क हुआ। लेकिन अकबर रहीम को कलाकार नहीं, सैनिक बनाना चाहता था। रहीम के जीवन का अधिकांश भाग सिपाही के तौर पर ही बीता।