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हमें फाँसी देने के बजाय गोली से उड़ाया जाए

फाँसी पर लटकाए जाने से 3 दिन पूर्व- 20 मार्च, 1931 को – सरदार भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव ने पंजाब के गवर्नर से माँग की थी की उन्हें युद्धबन्दी माना जाए तथा फाँसी पर लटकाए जाने के बजाय गोली से उड़ा दिया जाए।

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पति-पत्नी नहीं, बनें एक-दूसरे के साथी – पेरियार

मैं ‘विवाह’ या ‘शादी’ जैसे शब्दों से सहमत नहीं हूँ। मैं इसे केवल जीवन में साहचर्य के लिए एक अनुबन्ध मानता हूँ । इस तरह के अनुबन्ध में मात्र एक वचन; और यदि आवश्यकता हो, तो अनुबन्ध के पंजीकरण के एक प्रमाण की जरूरत है। अन्य रस्मों-रिवाजों की कहाँ आवश्यकता है? इस लिहाज से मानसिक श्रम, समय, पैसे, उत्साह और ऊर्जा की बर्बादी क्यों?

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मैं नास्तिक क्यों हूँ? – भगत सिंह

यह लेख भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार “ द पीपल “ में प्रकाशित हुआ । इस लेख में भगतसिंह ने ईश्वर कि उपस्थिति पर अनेक तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण , मनुष्य के जन्म , मनुष्य के मन में ईश्वर की कल्पना के साथ साथ संसार में मनुष्य की दीनता , उसके शोषण , दुनिया में व्याप्त अराजकता और और वर्गभेद की स्थितियों का भी विश्लेषण किया है । यह भगत सिंह के लेखन के सबसे चर्चित हिस्सों में रहा है।

स्वतन्त्रता सेनानी बाबा रणधीर सिंह 1930-31के बीच लाहौर के सेन्ट्रल जेल में कैद थे। वे एक धार्मिक व्यक्ति थे जिन्हें यह जान कर बहुत कष्ट हुआ कि भगतसिंह का ईश्वर पर विश्वास नहीं है। वे किसी तरह भगत सिंह की काल कोठरी में पहुँचने में सफल हुए और उन्हें ईश्वर के अस्तित्व पर यकीन दिलाने की कोशिश की। असफल होने पर बाबा ने नाराज होकर कहा, “प्रसिद्धि से तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है और तुम अहंकारी बन गए हो जो कि एक काले पर्दे के तरह तुम्हारे और ईश्वर के बीच खड़ी है। इस टिप्पणी के जवाब में ही भगतसिंह ने यह लेख लिखा।

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आर्य समाज और सांप्रदायिक तत्व – राम मोहन राय

Post Views: 24 आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में की थी। इसके लिए सर्वप्रथम उन्होंने इसके नियमों की रचना की और बाद में स्थानादि की…

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सावित्रीबाई फुले का पहला पत्र

Post Views: 29 सावित्रीबाई फुले ने जोतीबा फुले को तीन पत्र लिखे। ये पत्र ऐतिहासिक दस्तावेज हैं, जिनसे तत्कालीन समाज का विश्वसनीय ढंग से पता चलता है। फुले दंपति के…

क्रांतिकारी सूफी संत कवि बू अली शाह कलंदर – अरुण कुमार कैहरबा

Post Views: 188 जाति, धर्म, सम्प्रदाय, बोली-भाषा, क्षेत्र, रंग व लिंग आदि के नाम पर लोगों को बांटने की कोशिशें होती आई हैं। लेकिन पीरों, फकीरों और पैगंबरों ने हमेशा…

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क्रान्तिकारी दल में आज़ाद का प्रवेश- विश्वनाथ वैशंपायन

Post Views: 89 जेल में बेंतों की सजा खाने और उन घावों के ठीक हो जाने के पश्चात् आजाद काशी विद्यापीठ में भरती हो गए। 1921 में बनारस में महात्मा…

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गुरु रविदास और उनका बेगमपुरा – सुभाष चन्द्र

Post Views: 262 मध्यकालीन संतों और भक्तों के जन्म-मृत्यु व पारिवारिक जीवन के बारे में आमतौर पर मत विभिन्नताएं हैं। संत रविदास की कृतियों में उनके रैदास, रोहीदास, रायदास, रुईदास…