Category Archives: विरासत

धर्म और कार्ल मार्क्स

जगदीश्वर चतुर्वेदी अनेक लोग हैं जो कार्ल मार्क्स के धर्म संबंधी विचारों को विकृत रूप में व्याख्यायित करते हैं। वे मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं को गलत देखते हैं फिर सभी मार्क्सवादियों पर हमला आंरंभ कर देते हैं। सवाल यह है क्या मार्क्स की धर्म संबंधी मान्यताओं से धर्म की कोई सही समझ बनती है ?क्या दुनिया में मार्क्सवादी धर्म

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वैचारिक एवं वैज्ञानिक संघर्ष के पुरोधा क्रांति पुरुष महामना रामस्वरूप वर्मा

एडवोकेट रवीन्द्र कुमार कटियार निष्कलंक, निष्पक्ष, स्वयं चेता मानवतावादी! लोभ नहीं धन, पद का चिंतक, त्यागी, समतावादी! जिसके तर्क अकाट्य विरोधी भी सुनते हों आतुर! किया असंभव को भी संभव चाहे जितना भी हो दुष्कर!!      उत्तर भारत में सर्वाधिक बौद्धिक वैज्ञानिक एवं वैचारिक संघर्ष के पुरोधा, क्रांति सृष्टा महामना राम स्वरूप वर्मा का जन्म 22 अगस्त सन् 1923 ई0

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ईसामसीह की दयालुता

डा. कामिल बुल्के ईसामसीह के दिल में सबके लिए प्रेम था। वह किसी से भी घृणा नहीं करते थे। लोग जिन्हें पापी और बुरा मानते थे, उनके लिए भी ईसा के दिल में दया का भाव रहता था। उनके जमाने में एक सम्प्रदाय था फरीसी। उस सम्प्रदाय के मानने वाले मूसा-संहिता की बहुत ही संकीर्ण व्याख्या करते थे और उस

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अमूल्य धरोहर है सांस्कृतिक मेवात

सिद्दीक अहमद ‘मेव’   ( सिद्दीक अहमद मेव पेशे से इंजीनियर हैं, हरियाणा सरकार में कार्यरत हैं। मेवाती समाज, साहित्य, संस्कृति के  इतिहासकार हैं। इनकी मेवात पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। मेवाती लोक साहित्य और संस्कृति के अनछुए पहलुओं पर शोधपरक लेखन में निरंतर  सक्रिय हैं। मेवाती संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को उद्घाटित करता उनका लेख यहां प्रस्तुत है

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भारत  विभाजन  के उत्तरदायी

असगर अली इंजीनियर, अनु. डा. सुभाष चंद्र साम्प्रदायिक सवाल मुख्यत: सत्ता में हिस्सेदारी से जुड़ा था, चूंकि सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल का आखिर तक कोई संतोषजनक हल नहीं निकला और अंतत: देश का विभाजन हो गया। यहां तक कि जिन्ना के चौदह सूत्री मांग पत्र, जो उन्होंने 1929 के प्रारंभ में ही (नेहरू रिपोर्ट विवाद के बाद) तैयार कर

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लोक देवता गुग्गा पीर का बदलता स्वरूप

सुरेंद्रपाल सिंह  (राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गुग्गा पीर की विशेष मान्यता है। यह लोकनायक सांझी संस्कृति का विशिष्ट उदाहरण है। यहां हिंदू-मुस्लिम धर्म के लोग बराबर सहभागिता करते रहे हैं। गुग्गा का संबंध पौराणिक-शास्त्रीय कथाओं से नहीं, बल्कि ब्राह्मणी परंपराओं व मान्यताओं के चौखटे से बाहर हुआ है। लेकिन बदली

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विभाजन की यादें

अंशु मालवीय की गोपाल राम अरोड़ा से बातचीत श्री गोपाल राम अरोड़ा, हिसार, हरियाणा में रहते है। सरकारी नौकरी से रिटायर हुए कई बरस बीत गए। पत्नी और बच्चों के साथ रहते हैं। हिसार में एक ख़ामोश-सी सुबह उनसे बात हुई। जब वक्त रुक गया था और पुरानी यादों के स्याह-सफेद साये रूबरू हुए थे। ये यादें थीं मुल्क की

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मानवीय मूल्यों के रक्षक भी थे कुछ लोग

उदयभानु हंस मेरा जन्म 2 अगस्त 1926 को पश्चिमोत्तर पंजाब की मुलतान-मियांवाली रेलवे लाईन पर 60-70 मील दूर जिला मुजफ्फरगढ़ के एक कस्बे में हुआ। देश-विभाजन के समय जब साम्प्रदायिक हिंसा की आग सर्वत्र भड़क रही थी, हमारा जिले का अधिकांश क्षेत्र मुस्लिम-बहुल होते हुए भी यथापूर्व अपेक्षाकृत शांत बना रहा। मेेरे जन्मस्थान ‘दायरादीन पनाह’ में जून 1947 में अचानक

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दिवाली के मिथकीय और लोकधारात्मक संदर्भ

डा. कर्मजीत सिंह अनु- सुभाष चंद्र दिवाळी भारतीयों का विशिष्ट त्योहार है। यह रौशनी का त्योहार है, इस लिए ज्ञान का प्रतीक बन गया है जिसकी अज्ञानता पर जीत का जश्न मनाया जाता है। ओर गहरे अर्थों में मानव अंदरूनी अंधेरे पर रौशनी की जीत का प्रतीक भी बन गया है। इस को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक भी माना

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हरियाणाः तब और अब

राजेंद्र सिंह ‘सोमेश’  हरियाणा का वर्तमान स्वरूप एक नवम्बर सन् उन्नीस सौ छियासठ को मिला। तब से लेकर अनेक उतार-चढ़ावों को पार करते इस प्रांत ने कई पड़ाव पार किए हैं। सर्वाधिक प्रगति तो हरियाणा ने कृषि क्षेत्र में की है। पहले हरियाणा का अधिक क्षेत्र असिंचित क्षेत्र था और ज्यादा भू-भाग में पानी की अनुपलब्धता थी। इस कारण बाजरा,

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