Category Archives: विरासत

हरियाणा का इतिहास-राजकीय वैभव के पथ पर

बुद्ध प्रकाश गुप्त युग में शांतिकाल के दौरान हरियाणा का भौतिक एवं आर्थिक विकास हुआ। यहां के लोग देश के अन्य भागों में फैल गए, जहां वे अपने क्षेत्र का नाम ले गए। गुजरात में बसे लोगों ने मैत्रक सम्राट ध्रुवसेन प्रथम (519-549 ईसवी) के गनेसगद मुद्रणपट्टों में वर्णित बस्ती का नाम हरियाणा रखा, अन्य लोग मत्तमयूर का नाम मध्यप्रदेश

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मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम

मैक्सिम गोर्की का पत्र रूसी कामरेडों के नाम गरीबी की क्रूरता के विरुद्ध संघर्ष का अर्थ है, दुनिया में फैले उत्पीडऩ के जाल से मुक्ति के लिए छेडी गई जंग, और ढेरों असभ्य विरोधाभासों से भरी इस लड़ाई को लोग बहुत ही कमजोर तरीके से लड़ रहे हैं. आप पुरुषोचित तरीके से पूरी ताकत के साथ इस जाल को काटने

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पंज प्यारे – जातिवाद पर कड़ा प्रहार और जनवाद का प्रतीक

अपना शीश देने के लिए तैयार हुए पांचों व्यक्तियों में से ज्यादा समाज द्वारा नीची समझी जाने वाली जातियों में थे और खासतौर पर दस्तकार थे। उनमें से एक खत्री था, एक जाट, एक धोबी, एक नाई और एक कुम्हार था। इस से पता चलता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी को तमाम जातियों और खासकर छोटी समझी जाने वाली जनता का अपार समर्थन था। उसे मेहनतकश किसान और मजदूरों का समर्थन हासिल था। उसे व्यापारी वर्ग का समर्थन था।

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हरियाणा का इतिहास-प्रतिहारों तथा तोमरों का शासन

बुद्ध प्रकाश हर्ष के पश्चात् उत्तरी भारत इतना कमजोर हो गया कि उस पर कोई भी कब्जा कर सकता था। चीन-तिब्बती आक्रमण से स्थिति अनिश्चित हो गई। कन्नौज के यशोवर्मन के उत्थान से कुछ शक्ति तथा व्यवस्था स्थापित हुई। पूर्वी तथा दक्षिणी भारत पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् उसने हूणों तथा तुर्कों के आक्रमणों को रोकने के लिए श्रीकण्ठ,

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हरियाणा का इतिहास-गज़नी तथा काश्मीर से आक्रमण

बुद्ध प्रकाश ग्यारहवीं शती में, तोमर यद्यपि प्रतिहारों से स्वतंत्र हो गए थे, तथापि उन्हें गजनवी-तुर्कों के आक्रमणों का सामना करना पड़ा। 1014 में महमूद गजनवी ने थानेसर पर आक्रमण करके चक्रतीर्थस्वामिन की प्रतिमा को नष्ट करते हुए मंदिरों को भ्रष्ट कर दिया। तोमर शासक ने गज़नवियों को भगाने के लिए भारतीय शासकों से सहायता की अभ्यर्थना की, ताकि उत्तरी

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हरियाणा का इतिहास-आर्थिक समृद्धि तथा सांस्कृतिक विकास

बुद्ध प्रकाश प्रतिहारों तथा तोमरों के शासन के दौरान हरियाणा में व्यापार, कला तथा संस्कृति सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गई, जिसका आभास हमें दशवीं शताब्दी में लिखित सोमदेव के ‘यशस्तिकलकचम्पू’ से मिलता है। उसका कथन है कि यौधेय देश, अर्थात् हरियाणा प्रदेश पृथ्वी को सुशोभित करता था तथा सुख-समृद्धियों से परिपूर्ण था। यहां के लोग धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष

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‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ – पंजाब में होली नहीं मनाया जाता है होल्ला-मोहल्ला

‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ –

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हरियाणा का इतिहास-कुरुक्षेत्र तथा कम्बोडिया

बुद्ध प्रकाश                प्रगति तथा समृद्धि के इस काल में हरियाणा के लोग विदेशों में जाकर बस गए और वहां बस्तियां बना लीं। सौभाग्यवश कम्बोडिया के एक उपनिवेश के संबंध में कुछ रोचक सूचना उपलब्ध है। वतफू के एक शिलालेख से यह स्पष्ट होता है कि मेकांग नदी के साथ का पूर्वी प्रदेश कुरुक्षेत्र

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कुछ स्मरणीय सूक्तियां-गांधी का भारत

गांधी जी की कुछ स्मरणीय सूक्तियां-   हमें ये सारी बातें भुला देनी हैं कि ‘मैं हिंदू हूं, तुम मुसलमान हो’, या ‘मैं गुजराती हूं, तुम मद्रासी हो।’ ‘मैं’ और ‘मेरा’ को हमें भारतीय राष्ट्रीयता की भावना के अंदर डुबो देना है। हम आजाद तभी होंगे, जब एक ही साथ जीने या मरने का निश्चय करने वालों की काफी बड़ी

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ज़िन्दा जला कर शहीद कर दिया था क्रांति कुमार को

क्रांति कुमार कौन? नौजवान भारत सभा का पहला महासचिव । शहीद भगत सिंह का चहेता प्यारा दोस्त । जेल में रहते ही तो भगत सिंह ने इसे क्रांति कुमार नाम दिया था । वास्तव में उनके हंस राज नाम का एक साथी पुलिस का मुखबिर बन गया तो भगत सिंह ने अपने इस दूसरे साथी जिसका भी नाम हंसराज था

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