placeholder

पंडित बिरजू महाराज : सम्पूर्ण सृष्टि में नृत्य तलाशने वाला नर्तक- जगन्नाथ दुबे

बिरजू महाराज का निधन वाकई भारतीय नृत्य कला के लिए एक बड़ी क्षति है। वे महान नर्तक के अलावा अच्छे साहित्य के पारखी थे। बिरजू महाराज ने हिंदी साहित्य के अनेक रचनाकारों की रचनाओं को कथक नृत्य कला में प्रवेश दिलवाया। जगन्नाथ दुबे यहाँ बिरजू महाराज के जीवन के बारे में संक्षिप्त रुप में बात कर रहे हैं।

placeholder

हरियाणवी लोकनृत्यों का अद्भुत रचना संसार – अनिल कुमार पाण्डेय

Post Views: 29 भारत विविधताओं का देश है। देश की संस्कृति अत्यंत ही समृद्ध, मनोहारी होने के साथ ही विस्मयकारी भी है। हर अंचल विशेष की सांस्कृतिक पहचान अत्यंत ही…

placeholder

उस्ताद धुलिया खान

लखमी चंद जब भी कोई धुन रचते और उस्ताद धुलिया खान से सारंगी के मधुर वादन पर उस धुन को सुनते तो झूम उठते और तब एक ही बात उनकी जुबान से निकला करती – उस्ताद। कमाल कर दिया। 

placeholder

हरियाणवी लोक सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक है पगड़ी – महासिंह पूनिया

किसी समाज की संस्कृति, रहन-सहन, भोजन व वेशभूषा को वहां के जीवनयापन के साधन व वहां की जलवायु सर्वाधिक प्रभावित करती है। अस्तित्व के संघर्ष में उत्पन्न आवश्यक वस्तुएं कालांतर में सांस्कृतिक प्रतीकों व चिह्नों में तब्दील हो जाया करती हैं। मानव समाज इन्हें अपनी पहचान से जोड़ लेता है। समाज विशेष की वेशभूषा ने इस सांस्कृतिक सफर को तय किया है। गर्मी-सर्दी से बचने के लिए तथा काम करते वक्त सिर ढकने वाला कपड़ा कब पुरुषों की इज्जत व स्त्रिायों की लाज का प्रतीक बन जाएगा। कब यह सामन्ती ठसक का रूप लेकर उत्पीड़न का प्रतीक बन जाएगी। महासिंह पूनिया का ‘पगड़ी’ पर केन्द्रित आलेख प्रकाशित कर रहे हैं।