समुंद्र सिंह के दो हरियाणवी गीत

समुंद्र सिंह का जन्म बहलबा, रोहतक हरियाणा में हुआ। इनके यू ट्यूब पर अनेक भजन और गीत, अनेक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, गजल, गीत, भजन,लेख आदि प्रकाशित हुए हैं। अकाशवाणी और दूरदर्शन से भी भजन और गीत प्रसारित हुए हैं ।

लोक साहित्य : प्रतिरोध की चेतना ही उसकी समृद्धि है – डॉ. अमरनाथ

लोक साहित्य में लोक जीवन का यथार्थ है, पीड़ा है, दुख है, मगर उस दुख और पीड़ा से जूझने का संकल्प भी है, मुठभेड़ करने का साहस भी है. यहां सादगी है, प्रेम है, निष्ठा है, ईमानदारी है और सुसंस्कार है. हमारे लोक साहित्य में लोक का जो उदात्त चरित्र चित्रित है वह शिष्ट साहित्य में दुर्लभ है. शिष्ट साहित्य और लोक साहित्य के बीच का फासला वस्तुत: दो वर्गों के बीच का फासला है.

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बराबरी की मांग करता है रविदास का साहित्य – डॉ. सुभाष चन्द्र

Post Views: 206 गुरू रविदास की जयंती के अवसर पर देस हरियाणा पत्रिका और सत्यशोधक फाउंडेशन की ओर से सावित्रीबाई-जोतिबा फुले पुस्तकालय, सैनी समाज भवन, कुरूक्षेत्र में एक विचार गोष्ठी…

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‘तीज रंगीली री सासड़ पींग रंगीली’ – प्रो. राजेंद्र गौतम

Post Views: 419 हरियाणवी कवि लखमीचन्द की कविता की कला को जितनी-जितनी बार निरखा जाता है, उसकी सुंदरता की उतनी-उतनी नई परतें खुलती चली जाती हैं। वह साधारण में असाधारणता…

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हरियाणा में रागनी की परम्परा और जनवादी रागनी की शुरुआत – डा. ओमप्रकाश ग्रेवाल

रागनी की असली जान, ठेठ लोकभाषा के मुहावरों में सीधी-सादी लय अपनाने में और ऐसे मर्म-स्पर्शी कथा प्रसंगों के चुनाव में होती हैं ” जो लोगों के मन में रच-बस गये हों। इन सबके सहारे ही रागनी लोगों की भावनाओं को, उनकी पीड़ाओं तथा दबी हुई अभिलाषाओं को सुगम और सरल ढंग से प्रस्तुत करने में सफल होती हैं।

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आबादी को उसकी भाषा से वंचित कर देना तो जुल्म है – डा. नवमीत नव

लेकिन अब एमबीबीएस के बाद ढाई साल के अध्यापन और फिर एमडी के तीन साल और अब एक साल से फिर अध्यापन के अनुभव से मुझे एक चीज पता चली कि आप किसी को पढ़ाना/ समझाना चाहें या किसी से पढ़ना/समझना चाहें तो यह काम सबसे बेहतर आपकी अपनी मातृभाषा में ही हो सकता है।

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नई रागनी के शिखर पुरुष पं. जगन्नाथ से संवाद – रोशन वर्मा 

नई रागनी के शिखर पुरुष पं. जगन्नाथ हमारे बीच नहीं रहे। देस हरियाणा की ओर से कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि। रचनाकार के स्वयं के बारे में जानना भी एक अनूठा अनुभव होता है। पं. जगन्नाथ जी के अवदान को याद करते हुए प्रस्तुत है  2013 में  रोशन वर्मा की पंडित जगन्नाथ से हुआ संवाद –

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1857, किस्सा सदरूद्दीन मेवाती का – सहीराम 

Post Views: 1,125 नौटंकी पात्र : नट तथा नटी। दो देहाती (बार-बार उन्हीं को दोहराया जा सकता है),एक ढिढ़ोरची (दो देहातियों में एक हो सकता है या नट भी हो…

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कुछ मुंबइया फिल्में और हरियाणवी जनजीवन का यथार्थ – सहीराम

Post Views: 384                 सिनेमा अभी तक यही माना जाता रहा है कि हरियाणवी जन जीवन खेती किसानी का बड़ा ही सादा और…