जाट कहवै, सुण जाटणी – प्रदीप नील वशिष्ठ

Post Views: 807 एक बात ने कई सालों से मुझे परेशान कर रखा था। और वह शर्म की बात यह कि अपने  हरियाणा में हरियाणवी बोलने वाले को नाक-भौं चढ़ा…

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आपणे की चोट

Post Views: 289  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) एक सुनार था। उसकी दुकान…

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ऊकडूं बैठणा अर फूंक मारणा ए घरेलू सै

Post Views: 171 एक देहाती शहर के डाक्टर धोरै जाकै बोल्या-डाक्टर साब, मेरै खांसी जुकाम होर्या सै कोए देशी घरेलू सा नुक्सा बताओ नै। डाक्टर बोल्या-1 किलो चीनी, 50 ग्राम…

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लेके रहेंगे-लेके रहेगे

Post Views: 302 एक बै जागरूक माच्छरां नै मिलकै एक सभा बुलाई-उनका नेता बोल्या-भाईयो! ‘हमारे साथ बड़ी बेइन्साफी हो रही है-जुल्म ढाए जा रहे हैं। देखो-साबुन के लिए साबुणदानी, मसालों…

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मेज तलै है जी

Post Views: 174 एक बै एक स्कूल में डी.ओ. चली गई। उस स्कूल को दसमी कलास में छोरे पढ़ाई में रद्दी थे अर उनके नाम थे-होशियार सिंह और कशमीर सिंह।…

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वेरी गुड

Post Views: 179   एक अणपढ़ माणस नै अंग्रेजी सीखण का शौंक होग्या। सिखाण आला मास्टर भी भागां करकै ए मिलग्या। एक हफ्ते में तीन शब्द सिखाए-‘यश, नो, वैरी गुड’।…