placeholder

सुल्तान प्रजा की सेवा के लिये

Post Views: 24 सुल्तान की सवारी निकल रही थी और बूढा फकीर उसके रास्ते में ही बैठा हुआ था। वजीर पंहुचा – बाबा ! दुनियाँ का सबसे ताकतवर सुल्तान इस…

गुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 666 भादव के शुरू होते ही डेरू बजने की परम्परा भी जीवंत होती है. गांव देहात मे भादव के आने पर डेरू वाले एकम से लेकर नवमी तक…

placeholder

सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

Post Views: 581 हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या…

placeholder

हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

Post Views: 600 प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने…

placeholder

डरैगा सो मरैगा

Post Views: 285 राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै…

placeholder

किताब का लिख्या

Post Views: 264  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा…