Category: लोक कथा

रुरु जातक

Post Views: 11 रुरु एक मृग था। सोने के रंग में ढला उसका सुंदर सजीला बदन; माणिक, नीलम और पन्ने की कांति की चित्रांगता से शोभायमान था। मखमल से मुलायम

Continue readingरुरु जातक

सम्पूर्ण जातक कथाएँ

Post Views: 40 जातक या जातक पालि या जातक कथाएँ बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक का भाग है ।  जातक कथाओं को विश्व की प्राचीनतम लिखित कहानियों में गिना जाता है जिसमे

Continue readingसम्पूर्ण जातक कथाएँ

सुल्तान प्रजा की सेवा के लिये

Post Views: 49 सुल्तान की सवारी निकल रही थी और बूढा फकीर उसके रास्ते में ही बैठा हुआ था। वजीर पंहुचा – बाबा ! दुनियाँ का सबसे ताकतवर सुल्तान इस

Continue readingसुल्तान प्रजा की सेवा के लिये

गुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

Post Views: 747 भादव के शुरू होते ही डेरू बजने की परम्परा भी जीवंत होती है. गांव देहात मे भादव के आने पर डेरू वाले एकम से लेकर नवमी तक

Continue readingगुगा पीर की छड़ी, नानी कूद के पड़ी – सोनिया सत्या नीता

सोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

Post Views: 607 हरियाणवी लोककथा एक गाम म्हं दो पाळी आपणे डांगर चराया करदे। एक रात नै दोनों की म्हैस ब्याण का सूत बेठग्या। उनमैं जो आलसी था वो बोल्या

Continue readingसोंद्या कै तो काटड़े ही जामें

कछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

Post Views: 437 लोक कथा एक था कछुआ, एक था खरगोश। दोनों ने आपस में दौड़ की शर्त लगाई। कोई कछुए से पूछे कि तूने शर्त क्यों लगाई? क्या सोचकर

Continue readingकछुआ और खरगोश – इब्ने इंशा

हुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

Post Views: 658 प्रस्तुती – दुर्गेश नंदन एक चोर था । छोटी-मोटी चोरियां करके अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहा था पर गुज़ारा वामुश्किल होता । चोर ने

Continue readingहुण दस्स चौकीदारा! – हिमाचली लोक कथा

डरैगा सो मरैगा

Post Views: 300 राजकिशन नैन एक बै जंगल के सारे खरगोशां नै आपणी सभा करी अर सभ आपणे-आपणे दुःखां का रोणा रोण लागे। एक जणां बोल्या, ‘आखिर कित लिकड़ कै

Continue readingडरैगा सो मरैगा

किताब का लिख्या

Post Views: 277  राजकिशन नैन (राजकिशन नैन हरियाणवी संस्कृति के ज्ञाता हैं और बेजोड़ छायाकार हैं। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं उनके चित्र प्रकाशित होते रहे हैं।) घसीटा कतई भोला अर घणा सीधा

Continue readingकिताब का लिख्या