Category: लघु-कथा

काकी – सियारामशरण गुप्त

Post Views: 714 बाल कहानी उस दिन शामू की नींद बड़े सवेरे खुल गई। उसने देखा कि घर में कोहराम मचा हुआ है। उसकी काकी जमीन पर सो रही है।

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राधेश्याम भारतीय – दु:ख

Post Views: 526 लोक कथा गांव में कर्मवीर के पिता की मृत्यु के बाद मास्टर जी  उसके घर शोक प्रकट करने आए थे। ”बेटे! मुझे कल ही पता चला था

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बंडवारा – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 140 हरियाणवी  लघुकथा पहला – मैं तो यो घर लेऊंगा, मैं छोटा सूं दूसरा – मैं तो इसमैं घणेए साल तै रहूं सूं, तूं प्लाट ले ले तीसरा

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बिजली – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 159 हरियाणवी लघुकथा एक – भाई इस सरकार नै तो आग्गै लोग एक बी बोट ना दें। दूसरा – कत्ती नाश होर्या सै भाई, इन ससुरा नै न्यूं

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बाबाजी – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 245 हरियाणवी लघुकथा होटल बरगै कमरे म्ह एक बड्डे से सोफे पै बाबाजी बैठे थे। एसी फुल स्पीड म्हं हवा देण लागर्या था, मौसम कती चिल्ड। एक-एक करके

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सरकार – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 199 हरियाणवी लघुकथा हुक्के की गुड़गुड़ाहट गेल बात होरी थी। एक बुड्ढ़ा – रै कत्ती नाश हो लिया, आड़ै सरकार नाम की तो चीज ए कोनी दिखदी। दूसरा

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खबर – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 299 हरियाणवी लघुकथा शहर के बड्डे कारोबारी पै इनकम टैक्स की रेड पड़ी थी। एक रिपोर्टर सबेर तैए इनकम टैक्स की रेड पर नजर राख र्या था। आज

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बदहाल मानसिकता – कृष्ण चंद्र महादेविया

Post Views: 208 लघु कथा आज फिर युवा बेटी के पेट में दर्द शुरू हुआ तो लक्ष्मी ने अपने पति को भिजवा कर तुरंत गांव की दाई को बुलवा लिया।

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नरेश कुमार 'मीत’ – आजादी

Post Views: 259 लघु-कथा शुक्ला जी सुबह उठकर पौधों को निहार रहे थे कि उन्हें गमले के पीछे कुछ फडफ़ड़ाहट सी सुनाई दी। उन्होंने गौर से देखा तो एक तोता

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राष्ट्र का सेवक – प्रेमचंद 

Post Views: 232 लघुकथा राष्ट्र के सेवक ने कहा – देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सलूक, पतितों के साथ

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