बाबाजी – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 238 हरियाणवी लघुकथा होटल बरगै कमरे म्ह एक बड्डे से सोफे पै बाबाजी बैठे थे। एसी फुल स्पीड म्हं हवा देण लागर्या था, मौसम कती चिल्ड। एक-एक करके…

सरकार – धर्मेंद्र कंवारी

Post Views: 183 हरियाणवी लघुकथा हुक्के की गुड़गुड़ाहट गेल बात होरी थी। एक बुड्ढ़ा – रै कत्ती नाश हो लिया, आड़ै सरकार नाम की तो चीज ए कोनी दिखदी। दूसरा…