Category Archives: लघु कथा

मैं लड़की हूं न

कृष्ण चन्द्र महादेविया लघुकथा बस भरी तो थी किन्तु पाठशाला जाने वाले छोटे और बड़े बच्चे बस में चढ़ आते थे। कुछ अकेले तो कुछ को उनके अभिभावक बस की ऊंची पौडिय़ों से उठाकर चढऩे में सहायता करते थे। कर्ण और सुकन्या की दादी भी उन्हें पाठशाला छोडऩे और ले जाने आती थी। बस में सातवीं सीट के पास खड़े

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चौराहे का दीया

कमलेश भारतीय (वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश भारतीय दैनिक ट्रिब्यून से जुड़े रहे हैं। हरियाणा ग्रंथ अकादमी की पत्रिका कथा समय का संपादन किया। वर्तमान में नभछोर के साहित्यिक पृष्ठ का संपादन कर रहे हैं। साहित्यिक गतविधियों में निरंतर सक्रिय हैं। ) दंगों से भरा अखबार मेरे हाथ में है पर नजरें खबरों से कहीं दूर अतीत में खोई हुई  हैं ।

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कृष्ण चन्द्र महादेविया – जूठ

लघु कथा     (ग्रामीण विभाग के अधीक्षक पद से सेवानिवृत कृष्णचंद महादेविया हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदर नगर में रहते हैं। मूलतः लघुकथा व एंकाकी लेखक हैं और हिमाचल के लोक साहित्य के जानकार हैं -सं.) ‘ओए धर्मू, साले हरामी, अपनी नालायक औलाद संभाली नहीं जाती क्या?’ अपने आंगन में खडे़-खड़े डमलू ठाकर भेड़िए की तरह गुर्राकर बोला।

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कृष्ण चन्द्र महादेविया – सरनेम

 लघु कथा     (ग्रामीण विभाग के अधीक्षक पद से सेवानिवृत कृष्णचंद महादेविया हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदर नगर में रहते हैं। मूलतः लघुकथा व एंकाकी लेखक हैं और हिमाचल के लोक साहित्य के जानकार हैं -सं.) ‘मैं राज शर्मा, कनगढ़ से। यहां बैंक में कैशियर हूं।’ राज शर्मा का स्वर गुड़ की चासनी में भीगा हुआ था। ‘मैं

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काकी – सियारामशरण गुप्त

बाल कहानी उस दिन शामू की नींद बड़े सवेरे खुल गई। उसने देखा कि घर में कोहराम मचा हुआ है। उसकी काकी जमीन पर सो रही है। उस पर कपड़ा ढंका हुआ था। घर के  सब लोग उसे घेरे हैं। सब बुरी तरह रो रहे हैं। काकी को ले जाते  समय शामू ने बड़ा उधम मचाया। वह काकी के ऊपर

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राधेश्याम भारतीय – दु:ख

लोक कथा गांव में कर्मवीर के पिता की मृत्यु के बाद मास्टर जी  उसके घर शोक प्रकट करने आए थे। ”बेटे! मुझे कल ही पता चला था कि तुम्हारे पिता जी इस दुनिया में …।’’ यह सुुनते ही कर्मवीर की आंखें नम हो गई और कहने लगा – मास्टर जी, पिता जी तो हमें मुसीबतों की दलदल में डाल गए।’’

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धर्मेंद्र कंवारी – खबर

हरियाणवी लघुकथा शहर के बड्डे कारोबारी पै इनकम टैक्स की रेड पड़ी थी। एक रिपोर्टर सबेर तैए इनकम टैक्स की रेड पर नजर राख र्या था। आज सबरै तो इस चक्कर म्हं उसनै कलेवा भी नहीं करया। शाम नै फोटो अर आधे पेज की जानकारी गेल आफिस पहुंचा। एक चा मंगवाई अर उसनै पीके खबर घड़ण बैठग्या। नून तै रिपोर्टर

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बदहाल मानसिकता – कृष्ण चंद्र महादेविया

लघु कथा आज फिर युवा बेटी के पेट में दर्द शुरू हुआ तो लक्ष्मी ने अपने पति को भिजवा कर तुरंत गांव की दाई को बुलवा लिया। बुढिय़ाई दाई ने आते ही युवा बेटी के पेट पर कई बार ऊपर से नीचे, दाएं से बाएं पेट की मालिश की, किन्तु पेट की दर्द कतई शांत न हुई। दाई ने आंखें

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नरेश कुमार ‘मीत’ – आजादी

लघु-कथा शुक्ला जी सुबह उठकर पौधों को निहार रहे थे कि उन्हें गमले के पीछे कुछ फडफ़ड़ाहट सी सुनाई दी। उन्होंने गौर से देखा तो एक तोता उसके पीछे छिपने की कोशिश कर रहा था। रात में तेज तूफान आया था उसी दौरान यह आंगन में गिर गया था। शुक्ला जी ने पास जाकर पुचकारा तो इसने कातर दृष्टि से

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प्रेमचंद – राष्ट्र का सेवक

लघुकथा राष्ट्र के सेवक ने कहा – देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सलूक, पतितों के साथ बराबरी का बर्ताव। दुनिया में सभी भाई हैं, कोई नीच नहीं, कोई ऊँच नहीं। दुनिया ने जय-जयकार की – कितनी विशाल दृष्टि है, कितना भावुक हृदय! उसकी सुंदर लड़की इंदिरा ने सुना और

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