Category Archives: आधी दुनिया

छाती, तू और मैं – निकिता आजाद

निकिता आजाद (युनिवर्सिटी ऑफ आक्सफोर्ड) में पढ़ी हैं। उन्होंने  ‘हैपी टु ब्लीड’ लिखे सैनिटरी नैपकिन के साथ अपनी तसवीर पोस्ट करते हुए लोगों को पितृसत्तात्मक रवैए के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी और सोशल मीडिया पर #happytobleed मुहिम चलाई थी। contact – nikarora0309@gmail.com तू हमेशा कहता रहा ये बहुत छोटी हैं बहुत ढीली हैं बहुत चपटी हैं और

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8 मार्च – अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

– सोनी सिंह 8 मार्च अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस दुनिया भर में हर साल मनाया जाता है। यह महिलाओं की आर्थिक, राजनीतिक और सामजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। यह कोई सामान्य दिवस नहीं है बल्कि इस के लिए सैकड़ों महिलाओं, मजदूरों ने अपनी जान कुर्बान की है और संघर्ष किया है। आज इसको केवल महिला

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एक विद्रोही स्त्री – आलोक श्रीवास्तव

इस समाज में शोषण की बुनियाद पर टिके संबंध भी प्रेम शब्द से अभिहित किये जाते हैं एक स्त्री तैयार है मन-प्राण से घर संभालने, खाना बनाने कपड़ा धोने और झाड़ू-बुहारी के लिये मुस्तैद है पुरुष उसके भरण-पोषण में हां, बिचौलियों के जरिये नहीं, एक-दूसरे को उन्होंने ख़ुद खोजा है और इसे वे प्यार कहते हैं और मुझे वेरा याद

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खतरनाक औरत

खतरनाक औरत यह कविता देस हरियाणा द्वारा आयोजित तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव में 9 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय बहुभाषी कवि सम्मेलन में सुनाई गयी थी। रचनाकार और आवाज – नीतू अरोड़ा देस हरियाणा youtube चैनल को सबस्क्राईब जरुर करें   Des Haryana  

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प्रेम विवाह

डा. कामिनी साहिर   हमारे यहां मनुष्य को सामाजिक प्राणी कहा गया है, विदेशी भाषा में इसका रूपान्तर सामाजिक पशु है। दोनों मनुष्य की परिभाषा  हेतु पर्यायवाची शब्द हैं परन्तु विदेशी शब्द यथार्थ के अधिक निकट है, उसमें वास्तविकता और विवशता का सतर्क समन्वय है – पशुता प्राकृतिक है और सामाजिकता बुद्धिजन्य, परिस्थितिगत विवशता। हमारे शब्द में वास्तविकता अनावृत नहीं है,

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मुनाजात-ए-बेवा

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   मुनाजात-ए-बेवा (1884) ए सब से अव्वल1 और आखिर2 जहाँ-तहाँ हाजि़र और नाजि़र3 ए सब दानाओं से दाना4 सारे तवानाओं से तवाना5 ए बाला हर बाला6 तर से चाँद से सूरज से अम्बर से ए समझे बूझे बिन सूझे जाने पहचाने बिन बूझे सब से अनोखे सब से निराले आँख से ओझल दिल के उजाले ए

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सावित्रीबाई फुले : जीवन जिस पर अमल किया जाना चाहिए

7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन 09 Jan 2018 7 जनवरी को दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM), दिल्ली ने भारत की पहली महिला शिक्षक सावित्रीबाई फुले की 187वें जन्मदिवस पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया I इस कार्यक्रम

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सावित्रीबाई फुले: आधुनिक भारत की प्रथम शिक्षिका

प्रमोद दीक्षित ‘मलय‘ .भारतवर्ष में 19वीं शताब्दी का उत्तरार्ध शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक आंदोलनों एवं समाज में व्याप्त अस्पृश्यता, बाल विवाह, सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या एवं अशिक्षा के विरुद्ध लड़ाई का स्वर्णिम काल था। आज देश में शिक्षा का स्तर बढ़ा है, सबके लिए विकास के समान अवसर उपलब्ध हैं पर डेढ़ सौ साल पहले यह कल्पना करना भी

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बेटियों की निस्बत

अल्ताफ़ हुसैन हाली पानीपती   ज़ाहलियत के ज़माने में ये थी रस्मे अरब के किसी घर में अगर होती थी पैदा दुख़्तर1 संग दिल2 बाप उसे गोद से लेकर माँ की गाड़ देता था ज़मीं में कहीं जि़न्दा जाकर रस्म अब भी यही दुनिया में है जारी लेकिन जो के अन्धे हैं हिय्ये के नही कुछ उनको ख़बर लोग बेटी

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दुपट्टा एक लड़की के गले का फंदा है

हरमन दिनेश जिस मुल्क में बेटियों की भ्रूण हत्या को रोकने के लिए बेटी बचाओ जैसा कैंपेन चलाना पड़े उस देस में बेटियाँ कितनी सशक्त होंगी यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है, जिन बेटियों को कैंपेन चला कर, कानूनी धाराएं लगा कर बचाया गया है उनका भविष्य कहाँ तक सुरक्षित है और वे लड़कियाँ कितनी स्वतंत्र होंगी अपने फैसला

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