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हाथरस प्रकरण पर तथ्यान्वेषी दल की रिपोर्ट- डॉ.पूनम तुषामड़

बीते 11 अक्टूबर, 2020 को दिल्ली से सात लोगों का एक तथ्यान्वेषी दल उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बूलगढ़ी गांव के लिए रवाना हुआ। इस दल में प्रो. हेमलता महिश्वर, डॉ.रजत रानी मीनू, डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी,डॉ. सीमा माथुर, डॉ. पूनम तुषामड़, फारवर्ड प्रेस के हिंदी संपादक नवल किशोर कुमार व मीडियाकर्मी मनोज पिप्पल शामिल थे।

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पहाड़ के पितामह चंडीप्रसाद भट्ट – अमर नाथ

नदियाँ हिन्दुस्तान की धमनियाँ हैं। इनमें जल रूपी रक्त का संचार पहाड़ों से होता है। इन धमनियों की अविरलता बनाए रखने के लिए पहाडों और उनके जंगलों को बचाए रखना अनिवार्य है। चंडीप्रसाद भट्ट ने पर्यावरण के संबंध में अपना ज्ञान अपने अनुभव से अर्जित किया। वे पहाड़ पर जन्मे, पहाड़ पर पले -बढे और उन्होंने पहाड़ को कर्मस्थली बनाकर उसे जिया।

समाज की धड़कनों को पढ़ लेता है रचनाकार – टी. आर. कुण्डू

समाज व्यक्तियों का घर नहीं है, समूह नहीं, ये एक संवेदनशील सामूहिकता है। जिसका एक मिजाज है, जिसकी एक अंतरात्मा है, जो हमें बुरे-भले की समझ का बोध कराते हैं। मूलत: यह एक नैतिकता में ही बसी हुई है। इसी के बलबूते हम आगे बढ़े हैं। कोई भी संरचना अंतिम नहीं है। उसके बाह्य व भीतरी समीकरण है जो बदलते रहते हैं। हर बदलाव के कुछ दबाव होते हैं। कुछ तनाव होते हैं। कुछ पीड़ाएं होती हैं। सबसे पहले इसकी आहट आप रचनाकारों को मिलती है।

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वरिष्ठ नागरिकों के प्रति वारिसों के कर्तव्य – राजविंदर सिंह चंदी

सरकार द्वारा 2007 में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 बनाया, ताकि माता-पिता वरिष्ठ व नागरिकों का भरण-पोषण व सुरक्षा दी जा सके।

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क्रांतिकारी शहीद भगवतीचरण बोहरा व दुर्गादेवी – डा. सुभाष चंद्र

भगवतीचरण बोहरा व दुर्गादेवी (क्रांतिकारी इन्हें दुर्गा भाभी कहकर पुकारते थे) का क्रांतिकारी इतिहास में उल्लेखनीय योगदान है। संगठन की रणनीति बनाने का काम हो, परचे-पेम्फलेट लिखने का काम हो, धन जुटाने को काम हो, सूचनाएं एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम हो या फिर बम बनाने का क्रांतिकारियों के हर काम में इस दंपति ने अग्रणी भूमिका निभाई।

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‘हम भारत के लोग‘ और आप बाबा साहब? – कनक तिवारी

बाबा साहब! ताजा इतिहास में गांधी सुकरात की तरह सत्य के उपासक, नेहरू प्लेटो की तरह गणतंत्र के रचयिता और आप पूरा ज्ञानशास्त्र विवेक, जेहन और कर्म में बिखेरते महान अरस्तू की भूमिका में रहे। तीनों हमारी आत्मा के रचयिता नहीं होते, तो ‘हम भारत के लोग‘ गोरों की गुलामी से कहां छूटते। गांधी और नेहरू ने इतिहास की खुर्दबीन से तुम्हें ढूंढ़कर नायाब हीरा निकाला।

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भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले – सुभाष चंद्र

भारत की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले ने भारतीय समाज में मौजूद धर्मभेद, वर्णभेद, जातिभेद, लिंगभेद के खिलाफ कार्य किया। वे जैविक बुद्धिजीवी थी, जिन्होंने अपने अनुभवों से ही अपने जीवन-दर्शन का निर्माण किया। सावित्रीबाई फुले ने समाज में सत्य, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और मानव भाईचारे की स्थापना के लिए अनेक क्रांतिकारी कदम उठाए।

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ठाकुर का कुआँ – ओम प्रकाश वाल्मीकि

Post Views: 412 चूल्हा मिट्टी कामिट्टी तलाब कीतालाब ठाकुर का। भूख रोटी कीरोटी बाजरे कीबाजरा खेत काखेत ठाकुर का। बैल ठाकुर काहल ठाकुर काहल की मूठ पर हथेली अपनीफसल ठाकुर…

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सामाजिक सुरक्षा के नाम पर – रीतिका खेड़ा

अफसोस की बात यह है कि हमारे यहां अभिजात वर्ग के बीच सामाजिक सुरक्षा पर सहमति और समर्थन कमजोर है। हम यह भूल जाते हैं कि खुद की सफलता में सौभाग्य या लॉटरी का उतना ही हाथ है, जितना खुद के जतन या मेहनत का है।

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अंतर-जातीय विवाह से मिटेगा जातिवाद – स्वामी अग्निवेश

Post Views: 374 हमें अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों के पक्ष में अभियान चलाना होगा, क्योंकि प्रेमी जोड़े किसी दबाव में आकर शादी नहीं करते हैं बल्कि अपने मन के…