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हिन्दी की उन्नति – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 159 हिन्दी भाषा के संबंध में शुभ केवल इतना ही देखने में आता है कि कुछ लोगों को इसे उन्नत देखने की इच्छा हुई है। किंतु केवल इच्छा…

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हिंदी भाषा की भूमिका – बालमुकुंद गुप्त

हिन्दी फारसी भाषा का शब्द है। उसका अर्थ है हिन्द से संबंध रखने वाली, अर्थात् हिन्दुस्तान की भाषा। ब्रजभाषा में फारसी, अरबी, तुर्की आदि भाषाओं के मिलने से हिन्दी की सृष्टि हुई।

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राजभाषा संबंधी संवैधानिक प्रावधान

Post Views: 131 हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में 14 सितम्बर सन् 1949 को स्वीकार किया गया । इसके बाद संविधान में राजभाषा के सम्बन्ध में धारा 343…

वैदिक साहित्य में भाषाई चिन्तन- डॉ. रणवीर सिंह

Post Views: 348   वैदिक साहित्य में सभी स्तरों पर भाषा के संबंध में सूक्ष्म चिन्तन किया गया है । ऋग्वेद के कई पूरे सूक्तों में तथा अन्य वेदों, ब्राह्मणों,आरण्यकों,उपनिषदों…

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एक हजार बरस पहले हिन्दुस्तान में मौलिक चिंतन समाप्त हो गया – डॉ.राम मनोहर लोहिया

डा.राम मनोहर लोहिया भारतीय स्वतनत्रता सेनानी, प्रखर विचारक, राजनेता और सुप्रसिद्ध समाजवादी थे। डॉ.लोहिया  विचारों के बल पर राजनीति का रुख बदलने वाले नेता थे। डॉ.लोहिया ने हमेशा भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अंग्रेजी से अधिक हिंदी को प्राथमिकता दी। उनका विश्वास था कि अंग्रेजी शिक्षित और अशिक्षित जनता के बीच दूरी पैदा करती है। प्रस्तुत है – डॉ. लोहिया के हिन्दी भाषा के प्रति विचार ।

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राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्या – भीष्म साहनी

Post Views: 234 मैं भाषा वैज्ञानिक नहीं हूं, भाषाएं कैसे बनती और विकास पाती हैं, कैसे बदलती हैं, इस बारे में बहुत कम जानता हूं, इसलिए किसी अधिकार के साथ…

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हिंदी भाषा चुनौतियां और समाधान – मोहम्मद इरफान मलिक

Post Views: 789 मोहम्मद इरफान मलिक अरबी विभाग पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला यह लेख हरियाणा सृजन उत्सव 2019 में पंजाबी युनिवर्सिटी पटियाला, अरबी विभाग के मोहम्मद इरफान मलिक ने पेश किया…

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चुराही पहेलियां (फड़ौणी)

Post Views: 91 चुराही (चंबा जिले के चुराह तहसील की पहाड़ी बोली) में पहेलियों को फड़ौणी कहा जाता है। जब बर्फ गिर रही होती है तो घर के सारे सदस्य…

हरियाणा का आर्थिक विकास और सांस्कृतिक पिछड़ापन – प्रोफेसर टी आर कुण्डू

Post Views: 1,253 एक नवम्बर 2015 को कुरुक्षेत्र में ‘देस हरियाणा’ पत्रिका की ओर से हरियाणाः साहित्य समाज और संस्कृति विषय पर सेमिनार का आयोजन किया। जिसमें अर्थशास्त्री प्रो. टी….