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हरियाणा में प्रजामण्डल आन्दोलन और तत्कालीन परिदृश्य – सुरेन्द्रपाल सिंह

प्रजामंडल आंदोलन के अग्रणी नेता चौ. निहाल सिंह तक्षक के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘चौ० निहाल सिंह तक्षक -विलीनीकरण अभियान के महानायक’ पुस्तक तत्कालीन सामाजिक-राजनैतिक हलचलों पर पर्याप्त प्रकाश डालती है।पुस्तक के संकलनकर्ता व लेखक डॉ. प्रकाशवीर विद्यालंकार हैं। हरियाणवी समाज की क्षेत्र विशेष गतिकी की बेहतर समझ और विमर्श के लिए यह पुस्तक महत्वपूर्ण है।

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कुर्सी के लिए कत्ल- गोपाल प्रधान

Post Views: 16 2019 में शब्दलोक प्रकाशन से छपी किताब ‘सत्ता की सूली’ को तीन पत्रकारों ने मिलकर लिखा है। इस किताब ने वर्तमान पत्रकारिता को चारण गाथा होने से…

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भौतिकवाद को हिंदी में विकसित और स्थापित करने का समर – गोपाल प्रधान

Post Views: 8 हिंदी भाषा में कुछ भी वैचारिक लिखने की कोशिश खतरनाक हो सकती है। देहात के विद्यार्थियों के लिए कुंजी लिखना ही इस भाषा का सर्वोत्तम उपयोग है।…

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खेती का इतिहास – गोपाल प्रधान

Post Views: 40 पठनीय पुस्तक 2020 में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास यानी नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित सुषमा नैथानी की किताब ‘अन्न कहाँ से आता है’ सही अर्थ में हिंदी की…

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मुग़लकालीन किसान आंदोलन – सूरजभान भारद्वाज

Post Views: 28 मुग़लकालीन किसान आंदोलन से संबंधित इतिहास के विद्वानों ने बहुत कम लिखा है। बहुत पहले इरफ़ान हबीब ने अपनी पुस्तक, Agrarian System of Mughul India 1963  प्रकाशित की थी।…

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पीठासीन अधिकारीः बेहतरीन कहानियों का गुलदस्ता- अरुण कुमार कैहरबा

Post Views: 41 हरियाणा के जिला यमुनानगर के जाने-माने कथाकार ब्रह्म दत्त शर्मा का तीसरा कहानी संग्रह ‘पीठासीन अधिकारी’ बीते वर्ष के आखिरी चरण में के.एल. पचौरी प्रकाशन, गाजियाबाद से…

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कब तक मारे जाओगे- डॉ . पूनम तुषामड़

हिन्दी साहित्य में दलित साहित्य की प्रतिनिधि डॉ. पूनम तुषामड़ का जन्म दिल्ली में एक निम्न आयवर्गीय परिवार में हुआ।दलित कविता की नई पीढ़ी के जिन रचनाकारों ने समकालीन साहित्य को प्रभावित किया है, उनमें डॉ. तुषामड़ का नाम उल्लेखनीय है। उनकी रचनाओं को हिन्दी जगह में व्यापक स्तर पर सराहा गया है। हिन्दी अकादमी, दिल्ली द्वारा चयनित काव्य संग्रह “माँ मुझे मत दो” से उन्हें विशेष ख्याति मिली। उनकी कविताओं में नए संदर्भों के साथ दलित चेतना का विकसित रूप अपनी विशिष्टता के साथ अभिव्यक्त हुआ है। “राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन” द्वारा सम्मानित एवं “सम्यक प्रकाशन” द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह “मेले में लड़की’ने भी पाठकों को खासा प्रभावित किया। वर्ष 2004 में हिन्दी अकादमी, दिल्ली का नवोदित लेखक पुरस्कार उनके कविता संग्रह “माँ मुझे मत दो” के लिए तथा 2010 में हिन्दी कविता कोश सम्मान-2010 व ”हम साथ-साथ हैं पत्रिका” द्वारा प्राप्त युवा रचनाकार सम्मान आदि शामिल हैं।

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‘हम नहीं रोनी सूरत वाले’ : सावित्रीबाई फुले की कविताई – बजरंग बिहारी तिवारी

Post Views: 2,088 जीवन की गहरी समझ के साथ काव्य-रचना में प्रवृत्त होने वाली सावित्रीबाई फुले (1831-1897) अपने दो काव्य-संग्रहों के बल पर सृजन के इतिहास में अमर हैं. उनका…

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शानदार तोहफा – जोतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और डा. भीम राव अम्बेडकर की संपूर्ण रचनाएं – सत्यशोधक फाऊंडेशन

Post Views: 825 पीडीएफ फार्मेट में पढ़ने और डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें जोतिबा फुले की संपूर्ण रचनाएं जोतिबा फुले संपूर्ण रचनावली जोतिबा फुले जीवनी – एन.सी.आर.टी.ई. गुलामगिरी –…