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हिन्दी कहानी का भविष्य – डॉ. नामवर सिंह

कहानी के भविष्य की चिंता राजेन्द्र यादव को भी है और मुझे भी। लेकिन जैसा कि लेव तोल्सतोय ने अन्ना करेनिना के आरंभ में कहा है, सभी सुखी परिवार एक जैसे हैं लेकिन हर दुखी परिवार अपने-अपने ढंग से दुखी है।

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भारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

सम्मान का भाव रामविलास जी के प्रति हममें से प्रत्येक के मन में है, पर कहीं-न-कहीं उनकी व्याख्या के प्रति गंभीर संदेश भी है। मसलन सुधीरचन्द्र को भारतेन्दु में सर्वत्र एक प्रकार का दुचित्तापन दिखाई पड़ता है: राजभक्ति और देशभक्ति को लेकर भी, हिंदू-मुस्लिम भेदभाव के सवाल पर भी, यहां तक कि’ स्वदेशी’ के मामले में भी उनके आचार-विचार में फांक दिखती है।

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हिन्दी में ‘बिन्दी’ – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 53 काशी की नागरी-प्रचारिणी सभा हिन्दी में ‘बिन्दी’ चलाना चाहती है। यह ‘बिन्दी’ अक्षर के ऊपर नहीं, नीचे हुआ करेगी। ऐसी ‘बिन्दी’ लगाने का मतलब यह है कि…

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मानस’ की धर्म-भूमि – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

Post Views: 135 धर्म की रसात्मक अनुभूति का नाम भक्ति है, यह हम कहीं पर कह चुके हैं। धर्म है ब्रह्म के सत्स्वरूप की व्यक्त प्रवृत्ति, जिसकी असीमता का आभास…

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राष्ट्र का स्वरूप – वासुदेव शरण अग्रवाल

Post Views: 558 भूमि, भूमि पर बसने वाला जन और जन की संस्कृति इन तीनों के सम्मिलन से राष्ट्र का स्वरूप बनता है। भूमि का निर्माण देवों ने किया है,…

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नेता नहीं, नागरिक चाहिए – रामधारी सिंह दिनकर

नेता का पद आराम की जगह है, इससे बढ़कर दूसरा भ्रम भी नहीं हो सकता। अंग्रेजी में एक कहावत है कि किरीट पहननेवाला मस्तक बराबर चक्कर में रहता है। तब जो आदमी मेहनत और धीरज से भागता है, उससे यह कैसे उम्मीद की जाए की वह आठ पहर के इस चक्कर को बर्दाश्त करेगा और जिनमें धीरज नहीं, सबसे अधिक वे ही इस चक्कर को अपने माथे पर लेने को क्यों बेकरार हैं? दुनिया के सामने संगठनों से निकली हुई तैयार चीजें ही आती हैं, नेताओं के हस्ताक्षरों से भूषित कागज के पुर्जे नहीं। और कागज के इन निर्जीव पुों को लेकर दुनिया करेगी भी क्या?

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भीष्म को क्षमा नहीं किया गया – हजारी प्रसाद द्विवेदी

किस प्रकार पुराने इतिहास से वह वर्तमान समस्‍या के सही स्‍वरूप का उद्घाटन करते हैं और उसका विकासक्रम समझा देते है, वह चकित कर देता है। हर प्रश्‍न के तह में जाने की उनकी पद्धति आधुनिक युग में भी उपयोगी है।

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जाति व्यवस्था – पेरियार

ऐसे सूत्रों ने यह भी कहा कि हमारे देश में अनेक महत्त्वपूर्ण जातियाँ ऐसे ही आपसी मेलजोल से सामने आईं। उच्च जाति के लोग पथभ्रष्ट हुए इस और अपने नैतिक मानकों से डिगे, तो इसके परिणामस्वरूप पंचम जाति यानी सबसे पिछड़ी जाति अस्तित्व में आई ।

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क्रोध – रामचन्द्र शुक्ल  

Post Views: 70 क्रोध दु:ख के चेतन कारण से साक्षात्कार या अनुमन से उत्पन्न होता है। साक्षात्कार के समय दु:ख और उसके कारण के संबंध का परिज्ञान आवश्यक है। तीन…