Category Archives: साझी संस्कृति

भेदभाव व जागरूकता के अभाव में उगते समानान्तर सत्ता के द्वीप

मुकेश साढ़े दस साल पहले रोहतक के करौंथा आश्रम व आर्य समाजियों में भी खूनी संघर्ष हुआ था। सेना बुलाकर आश्रम को खाली कराया गया था। बाबा की फौज व भारतीय फौज अपने-अपने मोर्चों पर तीन दिन तक डटी रही थी। पुलिस के साथ बीच-बीच में झड़पें हुई। एक नवयुवक, चार महिलाएं व एक बच्चे को जान से हाथ धोना

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बस दो-चार बातें : एक मन्टो यह भी

 मोहनरमणीक (रमणीक मोहन जाट कालेज, रोहतक से अंग्रेजी साहित्य के एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवानिवृत हुए। साहित्यिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े  हैं। सांझी संस्कृति, भाईचारा व अमन के लिए विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से निरंतर सक्रिय हैं। हरकारा पत्रिका का वर्षों तक संपादन किया। ‘सप्तरंग’ नामक संस्था के माध्यम से प्रगतिशील मूल्यों को समाज में स्थापित करने के लिए संघर्षरत हैं

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ईसामसीह की दयालुता

डा. कामिल बुल्के ईसामसीह के दिल में सबके लिए प्रेम था। वह किसी से भी घृणा नहीं करते थे। लोग जिन्हें पापी और बुरा मानते थे, उनके लिए भी ईसा के दिल में दया का भाव रहता था। उनके जमाने में एक सम्प्रदाय था फरीसी। उस सम्प्रदाय के मानने वाले मूसा-संहिता की बहुत ही संकीर्ण व्याख्या करते थे और उस

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अमूल्य धरोहर है सांस्कृतिक मेवात

सिद्दीक अहमद ‘मेव’   ( सिद्दीक अहमद मेव पेशे से इंजीनियर हैं, हरियाणा सरकार में कार्यरत हैं। मेवाती समाज, साहित्य, संस्कृति के  इतिहासकार हैं। इनकी मेवात पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। मेवाती लोक साहित्य और संस्कृति के अनछुए पहलुओं पर शोधपरक लेखन में निरंतर  सक्रिय हैं। मेवाती संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को उद्घाटित करता उनका लेख यहां प्रस्तुत है

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भारत  विभाजन  के उत्तरदायी

असगर अली इंजीनियर, अनु. डा. सुभाष चंद्र साम्प्रदायिक सवाल मुख्यत: सत्ता में हिस्सेदारी से जुड़ा था, चूंकि सत्ता में हिस्सेदारी के सवाल का आखिर तक कोई संतोषजनक हल नहीं निकला और अंतत: देश का विभाजन हो गया। यहां तक कि जिन्ना के चौदह सूत्री मांग पत्र, जो उन्होंने 1929 के प्रारंभ में ही (नेहरू रिपोर्ट विवाद के बाद) तैयार कर

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लोक देवता गुग्गा पीर का बदलता स्वरूप

सुरेंद्रपाल सिंह  (राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में गुग्गा पीर की विशेष मान्यता है। यह लोकनायक सांझी संस्कृति का विशिष्ट उदाहरण है। यहां हिंदू-मुस्लिम धर्म के लोग बराबर सहभागिता करते रहे हैं। गुग्गा का संबंध पौराणिक-शास्त्रीय कथाओं से नहीं, बल्कि ब्राह्मणी परंपराओं व मान्यताओं के चौखटे से बाहर हुआ है। लेकिन बदली

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आचरणगत धर्म और कर्मकांडी धर्म में फर्क करो

ओम सिंह अशफाक 6 दिसंबर 2018 बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्माण दिवस के अवसर पर. धर्म और राजनीति विषय पर परिचर्चा में ओम सिंह अशफाक ने गुरु रविदास कबीर दास के माध्यम से अपनी बात कहते हुए जोर दिया कि आचरणगत धर्म ही धर्म का सच्चा स्वरूप है। पाखंड से धर्म विकृत होता है। यदि राजनीति से धर्म

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धर्म व्यक्ति का निजी मामला है

  मास्टर बलबंत सिंह – ६ दिसंबर बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर के परिनिर्माण दिवस के अवसर पर. धर्म और राजनीति विषय पर परिचर्चा में तर्कशील आंदोलन के पुरोधा मास्टर बलबंत सिंह.

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