Category Archives: साझी संस्कृति

पंज प्यारे – जातिवाद पर कड़ा प्रहार और जनवाद का प्रतीक

अपना शीश देने के लिए तैयार हुए पांचों व्यक्तियों में से ज्यादा समाज द्वारा नीची समझी जाने वाली जातियों में थे और खासतौर पर दस्तकार थे। उनमें से एक खत्री था, एक जाट, एक धोबी, एक नाई और एक कुम्हार था। इस से पता चलता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी को तमाम जातियों और खासकर छोटी समझी जाने वाली जनता का अपार समर्थन था। उसे मेहनतकश किसान और मजदूरों का समर्थन हासिल था। उसे व्यापारी वर्ग का समर्थन था।

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‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ – पंजाब में होली नहीं मनाया जाता है होल्ला-मोहल्ला

‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ –

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कुछ स्मरणीय सूक्तियां-गांधी का भारत

गांधी जी की कुछ स्मरणीय सूक्तियां-   हमें ये सारी बातें भुला देनी हैं कि ‘मैं हिंदू हूं, तुम मुसलमान हो’, या ‘मैं गुजराती हूं, तुम मद्रासी हो।’ ‘मैं’ और ‘मेरा’ को हमें भारतीय राष्ट्रीयता की भावना के अंदर डुबो देना है। हम आजाद तभी होंगे, जब एक ही साथ जीने या मरने का निश्चय करने वालों की काफी बड़ी

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ज़िन्दा जला कर शहीद कर दिया था क्रांति कुमार को

क्रांति कुमार कौन? नौजवान भारत सभा का पहला महासचिव । शहीद भगत सिंह का चहेता प्यारा दोस्त । जेल में रहते ही तो भगत सिंह ने इसे क्रांति कुमार नाम दिया था । वास्तव में उनके हंस राज नाम का एक साथी पुलिस का मुखबिर बन गया तो भगत सिंह ने अपने इस दूसरे साथी जिसका भी नाम हंसराज था

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हरियाणा सृजन उत्सव 2019

  तीसरे हरियाणा सृजन उत्सव  का आगाज हो चुका है। हर वर्ष यह कार्यक्रम फरवरी के महीने में कुरूक्षेत्र में आयोजित किया जाता है। यह एक साहित्यिक-सांस्कृतिक और समाजिक गतिविधियों का कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम का आयोजन देस हरियाणा पत्रिका  की तरफ से किया जाता है। सृजन उत्सव हरियाणा में होने वाला साहित्यिक महाकुम्भ माना जाता है। इसकी शुरूआत वर्ष 2016

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भक्ति आंदोलन और भक्ति

 डा. सेवा सिंह डा. सेवा सिंह की भक्ति और भक्ति आंदोलन पर कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, इनके अध्ययन के निष्कर्षों ने भक्ति और भक्ति आंदोलन संबंधी चिंतन को एक नई दिशा प्रदान की है। उनकी आधार प्रकाशन पंचकूला से सद्य प्रकाशित पुस्तक ‘भक्ति और भक्ति आंदोलन’ के निष्कर्षों को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, जो एक नई बहस

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डेरों व मठाधीशों के ‘प्रवचन-उपदेश’  सांस्कृतिक शून्यता में क्षणिक राहत       

बूटा सिंह सिरसा            सिरसा डेरा के मामले में कोर्ट का फैसला आया है। उसके बाद हुई  हिंसा व आगजनी से जानमाल के नुकसान की खबरें मीडिया ने चटखारे ले लेकर दिखाई हैं। लेकिन डेरों में लोगों की अंध आस्था के बुनियादी कारणों को समझने में मीडिया ने कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं दी। समस्या के बुनियादी

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भेदभाव व जागरूकता के अभाव में उगते समानान्तर सत्ता के द्वीप

मुकेश साढ़े दस साल पहले रोहतक के करौंथा आश्रम व आर्य समाजियों में भी खूनी संघर्ष हुआ था। सेना बुलाकर आश्रम को खाली कराया गया था। बाबा की फौज व भारतीय फौज अपने-अपने मोर्चों पर तीन दिन तक डटी रही थी। पुलिस के साथ बीच-बीच में झड़पें हुई। एक नवयुवक, चार महिलाएं व एक बच्चे को जान से हाथ धोना

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बस दो-चार बातें : एक मन्टो यह भी

 मोहनरमणीक (रमणीक मोहन जाट कालेज, रोहतक से अंग्रेजी साहित्य के एसोसिएट प्रोफेसर पद से सेवानिवृत हुए। साहित्यिक-सांस्कृतिक-शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े  हैं। सांझी संस्कृति, भाईचारा व अमन के लिए विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से निरंतर सक्रिय हैं। हरकारा पत्रिका का वर्षों तक संपादन किया। ‘सप्तरंग’ नामक संस्था के माध्यम से प्रगतिशील मूल्यों को समाज में स्थापित करने के लिए संघर्षरत हैं

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ईसामसीह की दयालुता

डा. कामिल बुल्के ईसामसीह के दिल में सबके लिए प्रेम था। वह किसी से भी घृणा नहीं करते थे। लोग जिन्हें पापी और बुरा मानते थे, उनके लिए भी ईसा के दिल में दया का भाव रहता था। उनके जमाने में एक सम्प्रदाय था फरीसी। उस सम्प्रदाय के मानने वाले मूसा-संहिता की बहुत ही संकीर्ण व्याख्या करते थे और उस

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