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उत्तर-दक्षिण भाषा-सेतु के वास्तुकार: मोटूरि सत्यनारायण – प्रो. अमरनाथ

मोटूरि सत्यनारायण का जन्म दक्षिण भारत के आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के दोण्डापाडु नामक गाँव में हुआ था. प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्होंने नेशनल कॉलेज माचिलिपट्टनम से अंग्रेजी, तेलुगू और हिन्दी की शिक्षा प्राप्त की और गाँधी जी के विचारों से प्रभावित होकर दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा में स्वयंसेवक बन गए.(लेख से)

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ब्रह्म दत्त शर्मा का संग्रह ‘पीठासीन अधिकारी’ बेहतरीन कहानियों का गुलदस्ता- अरुण कुमार कैहरबा

पुस्तक समीक्षा
कहानी संग्रह-पीठासीन अधिकारी
लेखक- ब्रह्म दत्त शर्मा
प्रकाशक-के.एल. पचौरी प्रकाशन, गाजियाबाद
पृष्ठ-120
मूल्य: रूपये 150.

ब्रह्म दत्त शर्मा का संग्रह ‘पीठासीन अधिकारी’ बेहतरीन कहानियों का गुलदस्ता
कहानियों के कथानक, परिवेश, भाषा में पाठकों को बांधे रखने की क्षमता
-अरुण कुमार कैहरबा

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“क्रान्तिकारी दल में आज़ाद का प्रवेश”, साभार- अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद – विश्वनाथ वैशंपायन

बनारस के लक्सा मोहल्ले में क्रान्तिकारियों ने एक मकान ले रखा था। इसमें सामने के कमरे में तबला, हारमोनियम, बीड़ी, माचिस आदि पड़ा रहता था, ताकि देखनेवाले लोग यह समझें कि यहाँ कुछ शोहदे जमा होकर लफंगाई करते हैं। ऐसा सब करने का उद्देश्य यही था कि लोग चाहे गुंडा या आवारा समझें, पर क्रान्तिकारी न समझें। (लेख से )

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रैदास -प्रो. सुभाष चन्द्र

संत रविदास के प्रभाव को समाप्त करने के लिए ही उनके साथ इस तरह की कथाएं रची गई हैं। उनके साथ चमत्कार जोड़कर उनको एक सनातनी पंडित की तरह पूजा करता दिखाया गया है। इस सारी कवायद में रविदास में से असली रविदास निकाल कर उसकी जगह एक मनघडंत रविदास लोगों के दिमागों में प्रतिष्ठित कर दिया जाता है जो वही सिद्घांत लिए हैं जिनके खिलाफ रविदास ने ललकार दी थी। यह भी सच है कि वे अपने मकसद में कामयाब भी हुए हैं। (लेख से)

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किसानी चेतना की चार कविताएं- जयपाल

जयपाल अपनी कविताओं में हमारे समय के यथार्थ के विभिन्न पक्षों को बहुत विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करते हैं। सामाजिक-शक्तियों के बीच चल रहे संघर्षों का वर्णन करती ये कविताएं जनता के पक्ष को मजबूत करने के लिए समाज में मौजूद प्रचलित धारणाओं को तोड़ती हैं। जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कविताओं में सीधे तौर पर मौजूद है। जनता के संघर्ष व आन्दोलन कविताओं का विषय नहीं है, लेकिन विचाराधारात्मक परिप्रेक्ष्य शोषित-वंचित वर्ग का है।- प्रो. सुभाष चन्द्र

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वर्तमान किसान आंदोलन: एक नज़र- सुरेन्द्र पाल सिंह

हिंदू- मुस्लिम- सिक्ख ने अपनी अपनी नकारात्मक विरासतों को पीछे छोड़ते हुए सकारात्मक विरासत को आगे बढ़ाने का जिम्मा लिया है और यही है इस आंदोलन की रीढ़ की हड्डी। (लेख से )

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किसान- गौहर रज़ा

गौहर रज़ा (जन्म 17 अगस्त 1956) पेशे से एक भारतीय वैज्ञानिक हैं, और एक प्रमुख उर्दू कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और वृत्तचित्र फिल्म निर्माता, जो आम जनता के बीच विज्ञान की समझ को लोकप्रिय बनाने के लिए काम कर रहे हैं.
प्रस्तुत है किसान संघर्ष से प्रेरित गौहर रज़ा की एक नज़्म ‘किसान’