placeholder

आओ नया समाज बनाएं – राजेंद्र चौधरी

बुनियादी एवं व्यापक बदलाव के लिए अंतत आम जन का, सत्ता से वंचित तबकों का संगठित होना ज़रूरी है. केवल एक पार्टी या नेता के पक्ष में वोट डालने के लिए नहीं अपितु बहुसंख्यक आबादी के हक़ में देश को चलाने के लिए. ज़रूरत इस बात कि है कि पूरा समय शासन व्यवस्था की नकेल प्रभावी रूप से जनता के हाथ में रहे. पॉँच साल में एक बार नहीं अपितु पूरे पॉँच साल लगातार शासन करने वालों में जनता के प्रति जवाबदेही का भाव रहे और जनता की सत्ता में बैठे लोगों पर कड़ी निगाह रहे.

placeholder

हिन्दी कहानी का भविष्य – डॉ. नामवर सिंह

कहानी के भविष्य की चिंता राजेन्द्र यादव को भी है और मुझे भी। लेकिन जैसा कि लेव तोल्सतोय ने अन्ना करेनिना के आरंभ में कहा है, सभी सुखी परिवार एक जैसे हैं लेकिन हर दुखी परिवार अपने-अपने ढंग से दुखी है।

placeholder

भारतेन्दु और भारत की उन्नति – डॉ. नामवर सिंह

सम्मान का भाव रामविलास जी के प्रति हममें से प्रत्येक के मन में है, पर कहीं-न-कहीं उनकी व्याख्या के प्रति गंभीर संदेश भी है। मसलन सुधीरचन्द्र को भारतेन्दु में सर्वत्र एक प्रकार का दुचित्तापन दिखाई पड़ता है: राजभक्ति और देशभक्ति को लेकर भी, हिंदू-मुस्लिम भेदभाव के सवाल पर भी, यहां तक कि’ स्वदेशी’ के मामले में भी उनके आचार-विचार में फांक दिखती है।

placeholder

हिन्दी में ‘बिन्दी’ – बालमुकुंद गुप्त

Post Views: 28 काशी की नागरी-प्रचारिणी सभा हिन्दी में ‘बिन्दी’ चलाना चाहती है। यह ‘बिन्दी’ अक्षर के ऊपर नहीं, नीचे हुआ करेगी। ऐसी ‘बिन्दी’ लगाने का मतलब यह है कि…

placeholder

प्रतिभा और आरक्षण – रजनी दिसोदिया

आजकल आरक्षण विरोध का जो मुद्दा गरमाया है उसमें भी बड़ा कंफ्यूजन है। क्या यह पूरी आरक्षण व्यवस्था का विरोध है या अन्य पिछड़ा वर्ग के 27% आरक्षण का विरोध है या यह पिछले सत्तर वर्षों से भीतर ही भीतर सुलगती उस खुन्नस का विस्फोट है जिसे इस ओ.बी.सी. आरक्षण ने और हवा दे दी है।

placeholder

चाँद, जो केवल ‘चाँद’ नहीं

Post Views: 28 कविता मैं लिखता हूँ कविताएँ चाँद पर,इसलिए नहीं कि चाँद अब तक के कवियों काप्रिय विषय है, और मैंउनका अनुसरणकर्ता हूँ। बल्कि इसलिए किचाँद पहुँचता है आज भीपोषक…

placeholder

मोरनी हिल्ज़ः नरबलि और उसके बाद – सुरेंद्र पाल सिंह

Post Views: 338 हरियाणा के एकमात्र हिल स्टेशन मोरनी हिल्ज़ की खूबसूरत वादियों में हरी भरी पहाड़ियाँ, एक पुराना क़िला, घग्गर नदी का उतरता चढ़ता हुआ बहाव, पानी का एक…

placeholder

हाईड्रो प्रोजेक्ट्स नहीं रुके तो होगा आने वाले विधानसभा चुनावों का बहिष्कार – भगत सिंह किन्नर

Post Views: 13 शिमला के होटल पीटर हॉफ में मंगलवार को वर्ल्ड बैंक द्वारा हिमाचल प्रदेश सरकार को 200 मिलियन डॉलर का बड़ा कर्ज देने से पहले जन सुनवाई का…

placeholder

महात्मा जोतिबा फुले के भाषणों की आधुनिकता – डॉ. अमरनाथ

Post Views: 10 महात्मा जोतिबा फुले के भाषणों पर जब मैं यह प्रतिक्रिया लिख रहा हूँ तो दूसरी ओर नूपुर शर्मा नाम की एक भाजपा प्रवक्ता द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर…

placeholder

जाति-व्यवस्था का क्षय हो – ई. वी. रामासामी पेरियार

उच्च जाति के धूर्त व्यक्तियों ने अत्यन्त धूर्ततापूर्वक जाति और धर्म को आपस में जोड़ दिया; ताकि उनको अलग करना मुश्किल हो जाए। इसलिए, जब आप जाति को नष्ट करने का प्रयास करते हैं, तो आपको यह डर नहीं लगना चाहिए कि धर्म भी नष्ट हो जाएगा।