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गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना – बूटा सिंह सिरसा 

देश के आजादी आंदोलन में गदर पार्टी की भूमिका को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया जो मिलना चाहिए था। पंजाब व पंजाबी भाषायी क्षेत्र के बाहर बहुत कम लोग गदर पार्टी के बलिदानों से परिचित हैं। 1 जनवरी 2020 गदर पार्टी के पहले प्रधान सोहन सिंह भकना का 150 वां जन्म दिन है।

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शिक्षा, शिक्षक और बदलावः एक चुनौती, एक अवसर – मुलख सिंह 

शिक्षा का मतलब यह नहीं है कि दिमाग में कई ऐसी सूचनाएं एकत्रित कर ली जाएं जिसका जीवन में कोई इस्तेमाल ही नहीं हो। हमारी शिक्षा जीवन निर्माण, व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण पर आधारित होनी चाहिए। ऐसी शिक्षा हासिल करने वाला व्यक्ति उस व्यक्ति से अधिक शिक्षित माना जाना चाहिए जिसने पूरे पुस्तकालय को कण्ठस्थ कर लिया हो। अगर सूचनाएं ही शिक्षित होती तो पुस्तकालय ही संत हो गये हाते। – स्वामी विवेकानंद

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ज्ञान का दीप जलाओ साथी – राजकुमार जांगडा ‘राज’

Post Views: 16 ज्ञान का दीप जलाओ साथीअज्ञान अंधेरा मिटाओ साथी प्रेमपथ  को अपनाने कोनफ़रत  के मिट जाने कोसबको गले लग जाने कोअपनी बांहे फैलाओ साथी ज्ञान का दीप जलाओ…

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सिद्दिक अहमद ‘मेव’ की कविताएं

Post Views: 5 धर्म धर्म नाम पर कदी लड़ा ना, ना कदी कीनी हमने राड़, धर्म नाम पे लड़े जो पापी, वापे हाँ सौ-सौ धिक्कार । धर्म सिखावे प्यार-मुहब्बत, धर्म…

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कायमखानीःसाझी संस्कृति की मिसाल – सुरेंद्र पाल सिंह

आज हम ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जब इतिहास को एकपक्षीय और दुर्भावनापूर्ण तरीके से हमें परोसा जा रहा है। ऐसे में इतिहास के वे अध्याय जो साझी संस्कृति के उदाहरण हैं और तमाम तरह की साम्प्रदायिक संकीर्णता से ऊपर उठे हुए हैं उनका अध्ययन आवश्यक हो जाता है। सामाजिक- राजनीतिक आयाम को भी ऐतिहासिक तौर पर बेहतर तरीके से समझने के लिए इस प्रकार के वृतांत महत्वपूर्ण है।

सूचना कानून इतिहास और बदलाव – राजविंदर सिंह चंदी

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(a) के अनुसार हर भारतीय नागरिक को बोलने व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। हमने संसदीय लोकतंत्र अपनाया है। जनतंत्र में राज्य की सारी शक्तियाँ जनता में निहित होती हैं। जनता द्वारा अपने कार्यों जिनमें नीतियां, कानून-व्यवस्था,परियोजनाओं, निर्णय, प्राशसनिक गतिविधियों का क्रियान्वयन आदि शामिल है, के लिए सरकार चुनी जाती है।

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औरत की कहानी – रामफल गौड़

Post Views: 9 रागनी देवी अबला पां की जूत्ती, मिले खिताब हजार मनैं, जब तै बणी सृष्टि, कितने ओट्टे अत्याचार मनैं ।।टेक।। परमगति हो सती बीर की, पति की गैल…

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पहाड़ के पितामह चंडीप्रसाद भट्ट – अमर नाथ

नदियाँ हिन्दुस्तान की धमनियाँ हैं। इनमें जल रूपी रक्त का संचार पहाड़ों से होता है। इन धमनियों की अविरलता बनाए रखने के लिए पहाडों और उनके जंगलों को बचाए रखना अनिवार्य है। चंडीप्रसाद भट्ट ने पर्यावरण के संबंध में अपना ज्ञान अपने अनुभव से अर्जित किया। वे पहाड़ पर जन्मे, पहाड़ पर पले -बढे और उन्होंने पहाड़ को कर्मस्थली बनाकर उसे जिया।

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मार्क्सवादी आलोचक शिवकुमार मिश्र – अमर नाथ

शिवकुमार मिश्र प्रतिबद्ध मार्क्सवादी आलोचक हैं. ‘जनवादी लेखक संघ’ के राष्ट्रीय महासचिव और बाद में अध्यक्ष के रूप में उन्होंने लम्बे समय तक लेखक संगठन का नेतृत्व किया. उनकी समीक्षा साफ सुथरी और निर्णयात्मक है. मिश्र जी की आलोचनाएं सैद्धांतिक भी हैं और व्यावहारिक भी.

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गाँधीवादी आलोचक विश्वनाथप्रसाद तिवारी – अमर नाथ

“ महान साहित्य घृणा नहीं, करुणा पैदा करता है. घृणित चरित्र के प्रति भी एक गहरी करुणा. यदि साहित्य घृणा, हिंसा और असहिष्णुता पैदा करने लगे तो दुनिया बदरंग हो जाएगी. रचना हृदय परिवर्तन की एक अहिंसक प्रक्रिया है. वह हिंसा का विकल्प नहीं है.”