Category: दलित विमर्श

सामाजिक व राजनीतिक समानता के लिए आरक्षण जरूरी – प्रियंका भारती

Post Views: 59 शिक्षा, रोजगार में आर्थिक सहायता सामाजिक व राजनीतिक समानता का पहला चरण – आरक्षण भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त एक सामाजिक व्यवस्था है। जिसका उद्देश्य देश को एकता

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ग़ज़लें – मनजीत भोला

Post Views: 37 मनजीत भोला की ग़ज़ल आम आदमी की ग़ज़ल है, आम आदमी से भी बढ़कर वह हाशिए पर जबरन धकेल दिए गए लोगों की ग़ज़ल है। भोला को

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जैसा भोजन वैसे मनुष्य का दर्शन – मुद्राराक्षस

Post Views: 66 उन्नीसवीं सदी के समाज विचारक और दार्शनिक लुडविग फायर बाख ने मनुष्य की सामाजिक ऐतिहासिक भूमिका पर विचार करते हुए एक बहुत दिलचस्प बात की थी- मनुष्य

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लाल सिंह दिल की कुछ अप्रकाशित कविताएं (अनुवाद – जयपाल)

Post Views: 41 कवि लाल सिंह दिल पंजाब के प्रगतिशील साहित्य के आन्दोलन के एक बड़े कवि माने जाते हैं। उनका जन्म पंजाब के रामदासिया (चमार) समुदाय के एक गरीब

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कविताएँ – ईशम सिंह

Post Views: 112 हाल ही में युवा कवि विनोद की दलित कविताएँ प्रकाशित हुई थी। उन कविताओं की सराहना की गई। हरियाणा की हिंदी कविता में ईशम सिंह दलित विमर्श

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संत रैदास को याद करते हुए – अरुण कैहरबा

Post Views: 47 उपजे एक बूंद तै का बामन का सूद। मूरख जन ना जानई सबमैं राम मौजूद।। रविदास जन्म के कारनै होत न कोऊ नीच। नर कूं नीच करि

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Savi Savarkar, ‘Untouchables’

पाँच कविताएँ – विनोद कुमार

Post Views: 265 विनोद कुमार ने हाल ही में हिंदी साहित्य में अपना एम.ए. पूरा किया है। दलित साहित्य के पठन – लेखन में विशेष रूचि है। जाति व्यवस्था के

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डॉक्टर आंबेडकर से मेरी भेंट – -सन्तराम बी.ए.

Post Views: 67 किसी विद्वान का व्याख्यान सुनने से या उसकी पुस्तक पढ़ने से जितना फायदा होता है उससे कहीं ज्यादा उस के सत्संग से होता है इसलिए हमारे यहां

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वीरांगना फूलन देवी की जयंती पर विशेष

Post Views: 23 वीरांगना फूलन देवी, यह नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। लोग फूलन देवी को बेंडिट क्‍वीन के नाम से भी जानते हैं।चंबल के बीहड़ों में डकैतों

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संत रैदास : वाणी और मानव-मुक्ति – डॉ. सेवा सिंह

रविदास की मानव मुक्ति में न पौराणिक स्वर्गारोहण है और न ही किसी अदृश्य लोक में बैकुण्ठ वास। इस मुक्ति में कोई दुरूह ब्रह्म विद्या ज्ञान भी नहीं है। वे अपनी वाणी में अपने परिवेश की समस्याओं का आत्मनिष्ठरूप प्रतिपादित करते हुए व्यक्ति को एक उच्चभावपूर्ण स्थिति में ले जाना चाहते हैं जिसमें उसके समस्त बन्धनों का अस्तित्व बना नहीं रह सकता। (लेख से) … Continue readingसंत रैदास : वाणी और मानव-मुक्ति – डॉ. सेवा सिंह