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कोय देख ल्यो मेहनत करकै – कर्मचंद केसर

Post Views: 139 हरियाणवी ग़ज़ल कोय देख ल्यो मेहनत करकै। फल के कड़छै मिलैं सैं भरकै। पत्थर दिल सैं लीडर म्हारे, उनके कान पै जूँ ना सरकै। जिन्दगी नैं इसा…

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बुरे मणस का सग करै क्यूँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 172 हरियाणवी ग़ज़ल बुरे मणस का सग करै क्यूँ। मन की स्यान्ति भंग करै क्यूँ। मानवता कै बट्टा लाग्गै, दीन दुखी नैं तंग करै क्यूँ। काग बणैं नां…

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दुक्ख की इसी होई बरसात – कर्मचंद केसर

Post Views: 338 हरियाणवी ग़ज़ल दुक्ख की इसी होई बरसात। निखर गया सै मेरा गात। बिद्या बिन नर रह्ये अनाड़ी, जणु कोय दरखत सै बिन पात। बूढ़े माँ-बापां की खात्तर,…

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मुसाफिर जाग सवेरा होग्या – कर्मचंद केसर

Post Views: 245 हरियाणवी ग़ज़ल मुसाफिर जाग सवेरा होग्या। चाल आराम भतेरा होग्या। कलजुग म्हं सच चढ़ग्या फांसी, झूठे के सिर सेहरा होग्या। सारा कुणबा मिलकै रह था, इब सबका…

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रुक्खाँ जिसा सुभा बणा ले – कर्मचंद केसर

Post Views: 149 हरियाणवी ग़ज़ल रुक्खाँ जिसा सुभा बणा ले। सबनै हँंसकै गले लगा ले। जीणा भी तो एक कला सै, सोच-समझ कै टेम बित्या ले। राजा दुखिया रंक सुखी…

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बुरी संगत म्हं जो भी पड़ग्या – कर्मचंद केसर

Post Views: 177 हरियाणवी ग़ज़ल बुरी संगत म्हं जो भी पड़ग्या। उसका समझो डूंह्ड उजड़ग्या। कतल केस म्हं सजा भुगत कै, नेता बण संसद म्हं बड़ग्या। जद कोयल की कूक…

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बुराई तै बस वो बच्या सै – कर्मचंद केसर

Post Views: 143 हरियाणवी ग़ज़ल बुराई तै बस वो बच्या सै। जिसनैं हर का नाम रट्या सै। दीवै गेल्याँ लाकै यारी, देख पतंगा जल्यास पड़्या सै। नाव पाप की अधर…

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रहयी भारत माँ फटकार बखत – कर्मचंद केसर

Post Views: 194 हरियाणवी ग़ज़ल रहयी भारत माँ फटकार बखत। क्यूँ बदले तनै आसार बखत। मोटे माणस मोटे कर दिये, क्यूँ गरीब करे लाचार बखत। स्तपुरषां अर गुरुजनां का, आज…

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अफरा-तफरी मच रीह् सै संसार म्हं – कर्मचंद केसर

Post Views: 155 हरियाणवी ग़ज़ल अफरा-तफरी मच रीह् सै संसार म्हं। रूलदे फिरैं हँस काग्याँ की डार म्हं। जिनकी करणी-कथनी म्हं सै फर्क घणा, यें किसे लोग आ गए सरकार…

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अपणा फरज भुलावण लाग्गी – कर्मचंद केसर

Post Views: 151 हरियाणवी ग़ज़ल अपणा फरज भुलावण लाग्गी। बाड़ खेत नैं खावण लाग्गी। जिनकै मुस्से कलां करैं थे, उनकै माया आवण लग्गी। खुदगरजां तै बोट्टां पाकै, जनता फेर पछत्यावण…