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जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा – महावीर ‘दुखी’

Post Views: 148 महावीर ‘दुखी’  जहां में खौफ़ का व्यापार क्यूं है सोचना होगा, तशद्दुद की यहां भरमार क्यूं है सोचना होगा। सुना था आदमी ने बेबसी पर पा लिया…

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न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता -महावीर ‘दुखी’

Post Views: 146 महावीर ‘दुखी’  न दीवानों से वाबस्ता, न फरज़ानों से वाबस्ता, रहा हूं मैं हमेशा आम इन्सानों से वाबस्ता। सुना है देवाओं का कभी था बास धरती पर,…

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धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप -कर्मचन्द ‘केसर’

Post Views: 151   कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल कलजुग के पहरे म्हं देक्खो, धरम घट्या अर बढ़ग्या पाप। समझण आला ए समझैगा, तीरथाँ तै बदध सैं माँ बाप। सारे चीब लिकड़ज्याँ…

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हालात तै मजबूर सूं मैं -कर्मचन्द केसर

Post Views: 147 कर्मचन्द ‘केसर’  ग़ज़ल हालात तै मजबूर सूँ मैं। दुनियां का मजदूर सूँ मैं। गरीबी सै जागीर मेरी, राजपाट तै दूर सूँ मैं। कट्टर सरमायेदारी नैं। कर दिया…

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जीन्दे जी का मेल जिन्दगी – कर्मचंद केसर

Post Views: 198 हरियाणवी ग़ज़ल जीन्दे जी का मेल जिन्दगी। च्यार दिनां का खेल जिन्दगी। फल लाग्गैं सैं खट्टे-मीठे, बिन पात्यां की बेल जिन्दगी। किसा अनूठा बल्या दीवा, बिन बात्ती…

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सादी भोली प्यारी माँ – कर्मचंद केसर

Post Views: 273 हरियाणवी ग़ज़ल सादी भोली प्यारी माँ, सै फुल्लां की क्यारी माँ। सबके चरण नवाऊं मैं, मेरी हो चै थारी माँ। सारी दुनियां भुल्ली जा, जाती नहीं बिसारी…

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महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ – एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया

Post Views: 226 गज़ल महेन्द्र प्रताप ‘चांद’ एक मधुर सपना था, आख़िर टूट गया तेरा दामन हाथ में आकर छूट गया! कितने मंज़र ओझल हुए निगाहों से बेटी से जब…

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गलती इतनी भारी नां कर – कर्मचंद केसर

Post Views: 185  हरियाणवी ग़ज़ल   गलती इतनी भारी नां कर। रुक्खां कान्नी आरी नां कर। मीठी यारी खारी नां कर, दोस्त गैल गद्दारी नां कर। नुमाइस की चीज नहीं…