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दुलाईवाली- बंगमहिला/राजेंद्र बाला घोष

दुलाईवाली कहानी बंगमहिला जिनका सही नाम राजेंद्र बाला घोष था, द्वारा लिखी गई कहानी है. यह कहानी हिंदी की शुरुआती कहानियों में से है. इसका प्रकाशन सन् 1907 में सरस्वती पत्रिका में हुआ था. इस कहानी में नायक ‘नवलकिशोर’ के द्वारा अपने मित्र बंशीधर के साथ किए गए मजाक का रोचक वर्णन है.

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गुल्‍ली-डंडा – प्रेमचंद

Post Views: 10 हमारे अँग्रेजी दोस्त मानें या न मानें मैं तो यही कहूँगा कि गुल्ली-डंडा सब खेलों का राजा है। अब भी कभी लड़कों को गुल्ली-डंडा खेलते देखता हूँ,…

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ईदगाह – प्रेमचंद

Post Views: 8 रमजान के पूरे तीस रोजों के बाद ईद आयी है। कितना मनोहर, कितना सुहावना प्रभाव है। वृक्षों पर अजीब हरियाली है, खेतों में कुछ अजीब रौनक है,…

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ठाकुर का कुआँ – प्रेमचंद

Post Views: 5 हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस…

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पूस की रात – प्रेमचंद

Post Views: 10 हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक थे। उन्होंने सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि लगभग डेढ़ दर्जन उपन्यास तथा कफन, पूस…

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साइकिल की सवारी – सुदर्शन

Post Views: 21 सुदर्शन (1895-1967) प्रेमचन्द परम्परा के कहानीकार हैं। इनका दृष्टिकोण सुधारवादी है। ये आदर्शोन्मुख यथार्थवादी हैं। मुंशी प्रेमचंद और उपेन्द्रनाथ अश्क की तरह सुदर्शन हिन्दी और उर्दू में…

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डिप्टी कलक्टरी – अमरकांत

Post Views: 8 शकलदीप बाबू कहीं एक घंटे बाद वापस लौटे। घर में प्रवेश करने के पूर्व उन्होंने ओसारे के कमरे में झाँका, कोई भी मुवक्किल नहीं था और मुहर्रिर…

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दोपहर का भोजन – अमरकांत

Post Views: 11 सिद्धेश्वरी ने खाना बनाने के बाद चूल्हे को बुझा दिया और दोनों घुटनों के बीच सिर रख कर शायद पैर की उँगलियाँ या जमीन पर चलते चीटें-चीटियों…