placeholder

इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर – हरिशंकर परसाई

‘इंस्पेक्टर मातादीन चाँद पर’ हरिशंकर पारसी की महत्वपूर्ण व्यंग्य प्रधान कहानी है. यह कहानी पारसी के कहानी संग्रह ‘ठिठुरता हुआ गणतंत्र’ में शामिल है. इस कहानी में परसाई जी भारतीय पुलिस व्य्चव्स्था तथा उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार पर व्यंग्य करते हैं.

placeholder

पिता- ज्ञानरंजन

साठोत्तरी पीढ़ी के ‘चार यार’ के रूप में प्रसिद्ध मंडली के चार सदस्यों – ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह एवं रवीन्द्र कालिया में से एक ज्ञानरंजन ने केवल 25 कहानियों की रचना की है जिसमें से एक भी सभी कहनियाँ अपने शिल्प और वस्तु के स्तर पर बेजोड़ है. इन्हीं कहानियों में से कहानी है ‘पिता’. इस कहानी में ज्ञानरंजन ने नई और पुरानी पीढ़ी के संस्कारों तथा मान्यताओं में टकराहट और अन्तर्विरोध का शानदार चित्रण मिलता है.

placeholder

राजा निरबंसिया- कमलेश्वर

‘राजा निरबंसिया’ कहानी नई कहानी आन्दोलन की वृहदत्रयी के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर कमलेश्वर के कहानी संग्रह ‘राजा निरबंसिया’ (1957) में प्रकाशित हुई थी. इस कहानी में कमलेश्वर ने राजा निरबंसिया की पौराणिक कथा तथा चंदा की आधुनिक कहानी को एक समानांतर रूप से कही है जिसमें आधुनिक जीवन की विसंगतियों को चित्रित किया गया है. नई कहानी आन्दोलन की वृहदत्रयी में अन्य दो महत्वपूर्ण हस्ताक्षर राजेंद्र यादव और मोहन राकेश हैं।

placeholder

परिन्दे-निर्मल वर्मा

1956 ई. में परिदें कहानी का प्रकाशन होता है। इसी नाम से उनका कहानी संग्रह भी है जिसमें कुल 7 कहानियाँ हैं. इस संग्रह की अंतिम कहानी परिंदे है। इस कहानी में निर्मल वर्मा ने मध्यवर्गीय समाज में अकेलेपन के कारण फैली उदासीनता को चित्रित किया है. इस उदासीनता की वजह से कहानी के पात्र मानसिक रूप से बिखराव के शिकार है.

placeholder

कानों में कंगना- राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह

राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह की कहानी ‘कानों में कंगना’ वर्ष 1913 में “इंदु” पत्रिका में प्रकाशित हुई. इस कहानी में विवाहित नायक नरेन्द्र के नशे की आदत तथा
वेश्या के प्रेम में पड़ने की वजह से हुए उसके चारित्रिक पतन को चित्रित किया गया है. कहानी की क्लिष्ट अलंकारिक भाषा को इसके शिल्प की विशेषता माना जा सकता है.

placeholder

दुनिया का सबसे अनमोल रत्न- प्रेमचन्द

दुनिया का सबसे अनमोल रतन प्रेमचंद की पहली कहानी थी। यह कहानी कानपुर से प्रकाशित होने वाली उर्दू पत्रिका ज़माना में 1907 में प्रकाशित हुई थी। यह प्रेमचंद के कहानी संग्रह सोज़े वतन में संकलित है। इस कहानी में प्रेमचन्द ने दिलफरेब और दिलफिगर के माध्यम से देशप्रेम की भावना को अभिव्यक्त किया गया है.

placeholder

ईदगाह- प्रेमचन्द

‘ईदगाह’ प्रेमचन्द की अत्यंत प्रचलित कहानी है. इसका प्रकाशन सन्1933 में चाँद पत्रिका में हुआ. इस कहानी का नायक एक गरीब-अनाथ बच्चा हामिद है जो गरीबी और अभावों के कारण अपनी मासूमियत खोकर बचपन में ही बड़ों की तरह व्यवहार करने लगता है. यह कहानी प्रेमचन्द की बाल मनोविज्ञान की बेहतरीन समझ का नमूना है.

placeholder

राही- सुभद्रा कुमारी चौहान

‘राही’ कहानी सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा लिखी गई कहानी है जिसकी पृष्ठभूमि में गरीबी के कारण उत्पन हुआ अपराध तथा कांग्रेसी नेताओं की सत्ता लोलुपता है. इस कहानी में लेखिका ने गरीबों के कल्याणार्थ कार्य को ही सच्ची देशभक्ति के रूप में स्वीकार किया गया है.

placeholder

एक टोकरी भर मिट्टी- माधवराव सप्रे

माधवराव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ को हिंदी की पहली कहानी के रूप में ख्याति प्राप्त है. यह कहानी एक आदर्शवादी कहानी है जिसमें एक गरीब बूढी विधवा द्वारा एक बड़े जमींदार का हृदय परिवर्तन होना दिखाया गया है.

placeholder

चंद्रदेव से मेरी बातें- बंगमहिला / राजेंद्र बाला घोष

बंग महिला (राजेन्द्रबाला घोष) की यह रचना कहानी के रूप में 1904 में सरस्वती में प्रकाशित हुई थी। कुछ विद्वानों के मतानुसार यह एक रोचक निबन्ध है. यह कहानी सन् 1904 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. इस कहानी में नायिका द्वारा चन्द्रदेव को एक पत्र लिखा गया है जिसमें तत्कालीन व्यवस्था पर करार व्यंग्य किया गया है.