Category Archives: कहानी

भैत्तर हजार की भोड़िया

 डा. नवरत्न पांडे                 भैत्तर हजार की भोड़िया के साथ गांव की साधारण भोड़िया की कहा सुनी हो गयी। बात कहासुनी से शुरू होकर पिलमा पछाड़ी तक पहुँच गयी। एक बुजुर्ग ने दोनों को अलग-अलग कर दिया। फिर दोनों लगी एक दूसरी को कोसने, गालियां देने …. लेकिन गालियां भैत्तर हजार की भोड़िया को भी आती हैं, वह बराबर गालियां

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फासला

ज्ञान प्रकाश विवेक वालैंट्री रिटायरमेंट स्कीम किसी उपकार की तरह पेश की गई थी, जिसमें लफाज्जियों का तिलिस्म था और कारपोरेट  जगत का मुग्धकारी छल! इस छल का मुझे बाद में पता चला। फिलहाल तो मैं इस बाईस लाख के चैक को देखकर अभिभूत था, जो मुझे कम्पनी ने थमाया था। बाईस लाख! मैं तो उछल पड़ा था। मैं खुद

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किश्तियाँ

हरभगवान चावला ‘भूमिहीन खेतिहर मज़दूर के लिए कुँवारी, परित्यक्ता, विधवा कैसी भी वधू चाहिए। शादी एकदम सादी, शादी का सारा ख़र्च वर पक्ष की ओर से होगा। अगर ज़रूरत हुई तो वधू के माता-पिता को उचित मुआवज़ा भी दिया जाएगा।’ विवाह का ऐसा विज्ञापन किसी अख़बार में नहीं छपता पर पंजाब के मालवा क्षेत्र तथा साथ लगते हरियाणा के अधिकांश

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बिरादरी को गोली मारो

रोहतास कहानी                 सेठ त्रिलोकचंद बंसल टूथपेस्ट के झाग कम, थूक ज्यादा उगल रहा है।                 अंधेरा आकाश से समाप्त हो चुका है। सूर्य लाल हो रहा है, शहर के गगन से टकराती इमारतों से होड़ ले चुका है।                 टॉयलेट से बाहर निकलती बंसल की बेटी के पांवों में एकाएक ‘दैनिक जागरण’ समाचार आकर गिरा।                 आधी उत्सुकता से

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तीन दृश्य :  एक चेहरा

कमलेश भारतीय तीन दृश्य मेरी आंखों में ठहरे हुए हैं और इन दृश्यों में एक ही चेहरा सामने आता है। सोते-जागते मैं इन्हें देखता रहता हूँ। उस दिन मेरी ड्यूटी नाइट-शिफ्ट में थी। अखबार के दफ्तर में क्या दिन तो क्या रात। लोगों का आना-जाना लगा ही रहता है और देर रात वह आया था। रिसेप्शन से फोन आया था

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क्यों हो भरोसा भभूत का!

राजगोपाल सिंह वर्मा (पत्रकारिता तथा इतिहास में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करके राजगोपाल सिंह वर्मा ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार में विभिन्न मंत्रालयों में प्रकाशन, प्रचार और जनसंपर्क के क्षेत्र में जिम्मेदार वरिष्ठ पदों पर कार्य किया। पांच वर्ष तक प्रदेश सरकार की साहित्यिक पत्रिका “उत्तर प्रदेश” का स्वतंत्र सम्पादन किया। कविता, कहानी तथा ऐतिहासिक व अन्य विविध विषयों पर

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सावी

 सतीश सरदाना (लेखक सतीश सरदाना का जोधपुर पाखर, जिला भटिंडा पंजाब में जन्म हुआ।  एम बी ए फाइनेंस की शिक्षा प्राप्त की।  कविता,लघुकथा, कहानी व विचोरोत्तेजक लेख लिखते हैं।  वर्तमान में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में प्रबंधक हैं।  गुड़गांव में रहते हैं। ) जब से इस घर में आई है सावी, एक दिन सुख का साँस नहीं लिया। रतिया की

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खुल्ला बारणा

साकी / एच. एच. मनरो, अनु – राजेन्द्र सिंह ‘साकी‘ प्रसिद्ध अंग्रेज लेखक एच. एच. मनरो का उपनाम है जिनका जन्म 1870 में ब्रिटिश बर्मा में हुआ।  उन दिनों बर्मा भारत की ही एक राजनैतिक इकाई था। जब 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ तो इनकी की आयु 40 से ऊपर थी, लेकिन कोई बाध्यता न होने के बावजूद

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कच्चे रास्तों का धनी-धोरी

अमित मनोज                 जिमाड़ों में हमारी खास रूचि हो गई थी। स्कूल में पढ़ाते हुए हम और चीजों की बजाय खाने-पीने में ही ज्यादा ध्यान देते। आस-पास के जिमाड़ों में हम सहर्ष शामिल होते और दूर के जिमाड़ों में भी निमंत्रण मिलने पर किराये की गाड़ी से पहुंच जाते। हममें से पीने वाले साथी इस तरह की स्वतंत्रताओं का बड़ा

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इज्जत की खातिर

नरेश कुमार  मां, सुन, रात को बबली और सोनिया की मौत हो गई। हां, बेटी ,उनके घर वाले कह रहे थे कि कल रात दोनों की पेट दर्द होने से मौत हो गई। मां, क्या इतना तेज दर्द होने पर भी उन्हें डाक्टर के पास नहीं ले गए? क्या पता बेटी, इनका परिवार ऐसा ही है, कभी अपने घर की

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