Category: कविता

उत्सव हरियाणा सृजन – सिद्दीक अहमद मेव

Post Views: 674 कविता एक साथ इतने हैं रंग, देख के मैं तो रह गया दंग,, कोई गा रहा दफ पर यहां, कोई बजा रहा है मृदंग, उत्सव हरियाणा सृजन।

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ब्रजेश कृष्ण की कविताएं

सबुकछ जानती है पृथ्वी…
ये कैसी डरावनी परछाइयाँ
कि छिप रहे हैं हम
अपनी ही चालाक हँसी के पीछे
तहस-नहस हो रहे हैं घोंसले
डूब रही है पक्षियों की आवाज
मर रहा है हवा का संगीत … Continue readingब्रजेश कृष्ण की कविताएं

खबर मिली मुझे, सृजन उत्सव की

खबर मिली मुझे, और मैं उत्सव में चला आया।
सैनी जी ने कॉल कर, उत्सव से अवगत कराया।।
सृजन से कराया अवगत, मैंने राह मेवात से पकरी।
गुरु सिद्दीक मेव संग, जा पंहुचा धर्मनगरी।। … Continue readingखबर मिली मुझे, सृजन उत्सव की

बखत पुराणा – विनोद वर्मा दुर्गेश

दस-दस कोस सफर काटते
मोटर ठेल्या का टोटा था।
रेहङू पै खेता म्है जाणा,
राबड़ी का ठंडा कलेवा था। … Continue readingबखत पुराणा – विनोद वर्मा दुर्गेश

कड़वा सच, नेक सुबह व कुण्डलियां – दयालचंद जास्ट

सिर पर ईंटें पीठ पर नवजात शिशु शिखर दुपहरी दो जून रोटी के लिए पसीने से तर-बतर यह मजदूरनी नहीं जानती कि किसे वोट करना है मालिक जहां बटन दबाएगा वोट हो जाएगा हमारे लोकतंत्र का यही है कड़वा सच स्रोत ः देस हरियाणा (नवम्बर-दिसम्बर, 2015), पेज- 55

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ये कविताएं – जयपाल

Post Views: 403   ये कविताएं उन हाथों के लिएजो जंजीरों में जकड़े हैंलेकिन प्रतिरोध में उठते हैंउन पैरों के लिएजो महाजन के पास गिरवी हैंलेकिन जुलूस में शामिल हैंउन

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धर्मेन्द्र कंवारी

धर्मेन्द्र कंवारी की हरियाणवी कविता
मोल की लुगाई
रामफळ गेल या कै मुसीबत आई
किल्ले तीन अर घरां चार भाई
मां खाट म्ह पड़ी रोज सिसकै
मन्नै बहू ल्यादौ, मन्नै आग्गा दिक्खै
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सुरे��ा की कविताएं

बागी लड़कियां
मैं जानती हूं
बहुत सारी बागी लड़कियों की पहचान
यहां तक कि उनके
नाम व पते भी
परन्तु आपको नहीं बताउंगी,
वरना हो सकता है
आप उन्हें ढूंढ निकाले
अपने घर के उस अन्दर वाले कमरे में
जिसकी कोई खिड़की बाहर नहीं खुलती।
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दामिनी यादव की कविताएं माहवारी और बिकी हुई कलम

हरियाणा सृजन उत्सव में 23 फरवरी को राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में दामिनी यादव ने अपनी माहवारी कविता सुनाई। इस तरह की कविताओं को आमतौर पर सुनाने का रिवाज नहीं है, लेकिन दामिनी ने आधी आबादी के अनुभव को जिन संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत किया और जिस गंभीरता से सुनाया था 500 के करीब मौजूद श्रोता अपने साथ इस कविता को लेकर गए. कविता का टेक्सट और दामिनी की ही आवाज में कविता आपके लिएः … Continue readingदामिनी यादव की कविताएं माहवारी और बिकी हुई कलम

हरभगवान चावला की कविताएं

ये किया हमने
हमने स्त्रियों की पूजा की 
और लहूलुहान कर दिया
हमने नदियों की पूजा की 
और ज़हर घोल दिया 
हमने गायों की पूजा की 
और पेट में कचरा उड़ेल दिया
हमने ईश्वर की पूजा की 
उसके क़त्ल के लिए हमने 
नायाब तरीका चुना
हमने एक ईश्वर के 
कई ईश्वर बनाए 
और सब को आपस में लड़ा दिया । … Continue readingहरभगवान चावला की कविताएं