Category: कविता

मैं ही अवाम, जनसमूह – कार्ल सैंडबर्ग, अनुवाद- दीपक वोहरा

Post Views: 44 मैं ही अवाम – जनसैलाब मैं ही हुजूम ख़ल्क़-ए-ख़ुदा1 क्या आपको मालूम है कि दुनिया के श्रेष्ठ काम मेरे द्वारा हुए हैं? मैं ही मज़दूर , मैं

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कविताएँ – राजेश भारती

राजेश भारती हरियाणा के कैथल जिले के गाँव काकौत के रहने वाले हैं। अपने आस पास होने वाली अप्रिय-अमानवीय घटनाओं से वाकिफ रहते हैं । राजेश भारती की ये कविताएँ शोषितों-वंचितों, महिलाओं के हक़ की बात करती हैं और वर्तमान में देशभर में व्याप्त धार्मिक उन्माद और नफरत के विरोध में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती हैं। प्रस्तुत हैं राजेश भारती की पांच कविताएँ- … Continue readingकविताएँ – राजेश भारती

कविताएं- कपिल भारद्वाज

कपिल भारद्वाज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शोध छात्र हैं। इधर की हिंदी कविता में निरंतर सक्रिय रहते हैं। कपिल की कविता में प्रतिरोध के साथ साथ जीवन और प्रेम निरंतर अपनी उपस्थिति बनाए रखते हैं। यह सामंजस्य उनकी विकासशील काव्यगत दृष्टि के साथ साथ गहरी संवेदनशीलता का भी द्योतक है। प्रस्तुत हैं कपिल भारद्वाज की कविताएं- … Continue readingकविताएं- कपिल भारद्वाज

मणिपुर तै इक विडियो आई दिन धौळी- मंगत राम शास्त्री

मणिपुर में घटी शर्मनाक घटना का दर्द पुरे देश के दिल में है। देश भर में लोग इस घटना के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। हरियाणा के साहित्यकार मंगत राम शास्त्री ने इस व्यथा को एक कविता की शक्ल दी है। इस कविता को चमन ने गाया है। यहाँ आप इस कविता को पढ़ और सुन सकते हैं- … Continue readingमणिपुर तै इक विडियो आई दिन धौळी- मंगत राम शास्त्री

खान मनजीत भावड़िया की पांच हरियाणवी रचनाएँ

मनजीत भावड़िया का सम्बन्ध हरियाणा प्रदेश में सोनीपत के भावड़ गाँव से है. वर्तमान में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में उर्दू पढ़ाते हैं. कविता लेखन में लगातार सक्रीय हैं. उनकी तीन पुस्तकें “हरियाणवी झलक” (काव्य संग्रह), “सच चुभै सै” (काव्य संग्रह) और “हकीकत” (उर्दू कविता) नाम से प्रकाशित हैं. हाल फिलहाल जनवादी लेखक संघ भावड, सोनीपत की विकास शिक्षा समिति के महासचिव हैं. 09671504409 के माध्यम से उनसे बात की जा सकती है.
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चाँद, जो केवल ‘चाँद’ नहीं

Post Views: 62 कविता मैं लिखता हूँ कविताएँ चाँद पर,इसलिए नहीं कि चाँद अब तक के कवियों काप्रिय विषय है, और मैंउनका अनुसरणकर्ता हूँ। बल्कि इसलिए किचाँद पहुँचता है आज भीपोषक

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भारतमाता – सुमित्रानंदन पंत

Post Views: 40 कविता भारत माताग्रामवासिनी।खेतों में फैला है श्यामलधूल भरा मैला सा आँचल,गंगा यमुना में आँसू जल,मिट्टी कि प्रतिमाउदासिनी। दैन्य जड़ित अपलक नत चितवन,अधरों में चिर नीरव रोदन,युग युग

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कर्मचंद केसर

लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर

विश्व पर्यावरण दिवस पर लिखी गई कर्मचंद केसर की कविता – लाग रही सै घणी मस्ताई माणस नै। … Continue readingलाग रही सै घणी मस्ताई माणस नैं – कर्मचंद केसर

कर्मचंद केसर

मनै तेरे बिन सरदा कोनी – कर्मचंद केसर

Post Views: 16 मनै ते॒रे बिन सरदा कोनी।तौं क्यां तै हां भरदा कोनी। मिटदी नहीं तरिस्णा बैरण,जद लग माणस मरदा कोनी। अपणे दुक्ख तै दुखी नहीं वो,औरां का सुख जरदा

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कर्मचंद केसर

क्यूं मेरा गुंट्ठा मांगै सै – कर्मचंद केसर

Post Views: 102 मैं सूं गरीब भील का बेटा, कर लिए कुछ ख्याल मेरा,क्यूं मेरा गुंट्ठा मांगै सै मनै, के करया नुकस्यान तेरा। धनुष विद्या की चाहना थी, मन मैं

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