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रविन्द्रनाथ टैगोर की कविता – धूलि-मन्दिर

Post Views: 19 भजन-पूजन साधना-आराधना सब-कुछ पड़ा रहे, अरे, देवालय का द्वार बन्द किए क्यों पड़ा है!अँधेरे में छिपकर अपने-आपचुपचाप तू किसे पूजता हैं? आँख खोलकर ध्यान से देख तो सही…

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प्रार्थना – रविंद्रनाथ टैगोर

Post Views: 13 हो चित्त जहाँ भय-शून्य, माथ हो उन्नतहो ज्ञान जहाँ पर मुक्त, खुला यह जग होघर की दीवारें बने न कोई काराहो जहाँ सत्य ही स्रोत सभी शब्दों…

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विज्ञापन सुंदरी- लीलाधर जगूड़ी

Post Views: 50 विज्ञापन सुंदरी द्वारा प्रस्तुत करने योग्य बनाया जायेगा इस जीवन को हमको इसमें क्या देखना क्या समझना है, एक तो यह कि जीवन और ज़रूरतों के हम…

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जन जन का चेहरा एक- गजानन माधव मुक्तिबोध

Post Views: 56 चाहे जिस देश, प्रान्त, पुर का हो जन-जन का चेहरा एक! एशिया की, यूरोप की, अमरीका की गलियों की धूप एक। कष्ट-दुख सन्ताप की, चेहरों पर पड़ी…

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पोस्टर और आदमी- सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Post Views: 102 मैं अपने को नन्हा-सा, दबा हुआ विशालकाय बड़े-बड़े पोस्टरों के अनुपात में खड़ा देख रहा हूँ, जिनकी ओर एक भीड़ देखती हुई गुज़र रही है, हँसती, गाती,…

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हिरोशिमा – अज्ञेय

Post Views: 31 एक दिन सहसासूरज निकलाअरे क्षितिज पर नहीं,नगर के चौक :धूप बरसी पर अन्तरिक्ष से नहीं,फटी मिट्टी से। छायाएं मानव-जन कीदिशाहीन सब ओर पड़ीं – वह सूरजनहीं उगा…

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हमारा देश- अज्ञेय

Post Views: 10 इन्हीं तृण-फूस छप्पर से ढके ढुलमुल गवारू झोंपड़ों में ही हमारा देश बसता है। इन्हीं के ढोल-मादल बाँसुरी के . उमगते सुर में हमारी साधना का रस…