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एक अजीब-सी मुश्किल – कुंवर नारायण

Post Views: 5 एक अजीब-सी मुश्किल में हूँ इन दिनों— मेरी भरपूर नफ़रत कर सकने की ताक़त दिनोंदिन क्षीण पड़ती जा रही अँग्रेज़ी से नफ़रत करना चाहता जिन्होंने दो सदी…

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पूंजीवादी समाज के प्रति – गजानन माधव मुक्तिबोध

Post Views: 11 इतने प्राण, इतने हाथ, इनती बुद्धिइतना ज्ञान, संस्कृति और अंतःशुद्धिइतना दिव्य, इतना भव्य, इतनी शक्तियह सौंदर्य, वह वैचित्र्य, ईश्वर-भक्तिइतना काव्य, इतने शब्द, इतने छंद –जितना ढोंग, जितना…

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अनिल कुमार पाण्डेय की पांच कविताएं

Post Views: 5 बरखा में धींगामुश्ती तेज घाम में बरखा बरसे  देखो कैसा अचरज !    देखो दो – दो धनक सजे हैं,   सुंदर, दिव्य और मनमोहक सावन के धराधर…

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देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

Post Views: 66 यदि तुम्हारे घर केएक कमरे में आग लगी होतो क्या तुमदूसरे कमरे में सो सकते हो?यदि तुम्हारे घर के एक कमरे मेंलाशें सड़ रहीं होंतो क्या तुमदूसरे…

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किसान- गौहर रज़ा

गौहर रज़ा (जन्म 17 अगस्त 1956) पेशे से एक भारतीय वैज्ञानिक हैं, और एक प्रमुख उर्दू कवि, सामाजिक कार्यकर्ता और वृत्तचित्र फिल्म निर्माता, जो आम जनता के बीच विज्ञान की समझ को लोकप्रिय बनाने के लिए काम कर रहे हैं.
प्रस्तुत है किसान संघर्ष से प्रेरित गौहर रज़ा की एक नज़्म ‘किसान’

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मजदूर-किसान: कुछ कविताएं- जयपाल

जयपाल अपनी कविताओं में हमारे समय के यथार्थ के विभिन्न पक्षों को बहुत विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करते हैं। सामाजिक-शक्तियों के बीच चल रहे संघर्षों का वर्णन करती ये कविताएं जनता के पक्ष को मजबूत करने के लिए समाज में मौजूद प्रचलित धारणाओं को तोड़ती हैं। जनता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता कविताओं में सीधे तौर पर मौजूद है। जनता के संघर्ष व आन्दोलन कविताओं का विषय नहीं है, लेकिन विचाराधारात्मक परिप्रेक्ष्य शोषित-वंचित वर्ग का है।- प्रो. सुभाष चन्द्र