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चसवाल साहेब यानी आबिद आलमी सिद्धांत के आदमी थे – शशिकांत श्रीवास्तव

अत्यंत धीर, गम्भीर चसवाल साहेब सिद्धांतों के आदमी थे, बल्कि यह कहना ज्यादा ठीक होगा कि वह सिद्धांतों के नहीं, बल्कि एक ही सिद्धांत के आदमी थे। उसी सिद्धांत ने उनकी तमाम शायरी को प्रेरित किया और वह उनकी सभी गतिविधियों के पीछे दिखाई देता था। चसवाल साहेब किसी भी शक्ल में किसी का भी, कहीं भी कोई शोषण नहीं सह पाते थे और उसके विरुद्ध आवाज उठाना वह अपना पहला इन्सानी फर्ज समझते थे।

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लोक-रंग की आंच में पकाया हबीब ने अपना रंग-लोक -डा. सुभाष चंद्र

Post Views: 996 लोक-रंग की आंच में पकाया हबीब ने अपना रंग-लोक सुभाष चंद्र रंगमंच की दुनिया में हबीब तनवीर एक ऐसा नाम है जो पिछले साठ साल से कलाकारों…

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औपनिवेशक दासता का ज्ञान-काण्ड -कृष्ण कुमार

Post Views: 224 औपनिवेशक दासता का ज्ञान-काण्ड  कृष्ण कुमार भारत लगभग दो सौ साल तक अग्रेंजी साम्राज्य के अधीन रहा। साम्राज्यवाद ने भारत के प्राकृतिक-भौतिक संसाधनों का केवल दोहन ही…

थिएटर ऑफ़ रेलेवंस

हरियाणा सृजन उत्सव में  24 फरवरी 2018 को ‘थिएटर ऑफ रेलेवंस’  के जनक मंजुल भारद्वाज से रंगकर्मी दुष्यंत के बीच परिचर्चा हुई और मौजूद श्रोताओं ने इसमें  शिरकत की। प्रस्तुत है इस संवाद की रिपोर्ट। सं.