हिंदी में विश्व कविता – हरिमोहन शर्मा

विश्व के प्रसिद्ध कवियों की कविताएँ हिंदी में लाने का अनूठा काम ‘तनाव’ पत्रिका के माध्यम से वंशी माहेश्वरी पिछले पचास वर्षों से यह काम बखूबी कर रहे हैं। खुशी की बात है कि यह पत्रिका मात्र दस रुपये में अब भी छप रही है। संभावना प्रकाशन हापुड़ से इनका यह काम तीन खंडों में छप कर आगया है। इसमें 33 देशों के 103 कवियों की कविताएँ संकलित हैं। प्रस्तुत है यहां इसका संक्षिप्त परिचय- हरिमोहन शर्मा )

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एक दलित का दुख और इस के निहितार्थ – कैलाश दहिया

पिछले दिनों एक दलित लेखक ने अपनी फेसबुक वॉल पर एक संक्षिप्त पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने लिखा- “मुझे आज तक यह पता नहीं चल पाया कि मेरे हिंदू पड़ोसी वसुंधरा, गाजियाबाद जैसी पॉश कॉलोनी में भी मुझसे क्यों नफरत करते हैं?”

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पेरियार ई.वी.रामासामी : उसूलों पर अडिग महातार्किक – अमरनाथ

वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना, जिसके कारण समाज ऊँच और नीच जातियों में बाँटा गया है। ब्राह्मण हमें अंधविश्वास में निष्ठा रखने के लिए तैयार करता है। वह खुद आरामदायक जीवन जी रहा है। तुम्हे अछूत कहकर निंदा करता है। मैं आपको सावधान करता हूँ कि उनका विश्वास मत करो।

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राहुल सांकृत्यायनः सत्य की खोज का नायाब पथिक – अमरनाथ

Post Views: 55 “वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक सिर पर कुछ…

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इतिहास और पूर्वाग्रह – गणेश देवी

Post Views: 18 अज्ञेयवादी हूँ, लिहाज़ा न तो पूरी तरह आस्तिक हूँ, न धुर नास्तिक। फिर भी, बाज़ दफ़ा ऐसा होता है कि आस्था का प्रश्न अहम हो उठता है।…

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हिन्दी दुर्दशा- प्रो. सुभाष चन्द्र

भाषाओं में श्रेष्ठता के दावे नहीं चलते, जिस भाषा जो अभिव्यक्ति करता है उसके लिए वही भाषा महान होती है। दूसरी भाषाओं की कद्र करके ही हम अपनी भाषा के लिए सम्मान पा सकते हैं। भाषाओं में ऐसी संकीर्णताएं नहीं होती, ऐसी कोई भाषा नहीं जिसने दूसरी भाषाओं से शब्द न लिए हों। एक जगह से शब्द दूसरी जगह तक यात्रा करते हैं। जिस भाषा में ग्रहणशीलता को ग्रहण लग जाता है वह भाषा जल्दी ही मृत भी हो जाती है। (लेख से)

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भारतीय भाषाओं में छंद विधान- रामविलास शर्मा

हिंदी काव्य की नींव अवश्य गहरी और दृढ़ है, पर उसके ऊपर विद्यापति, जायसी, कबीर, सूर और तुलसी ने जो सुंदर भवन निर्मित किया, उसके निर्माण में सबसे बड़ी बाधा अपभ्रंश में साहित्य रचने की परंपरा थी । यदि विद्यापति इस परंपरा का अनुसरण करते चले जाते तो उनका युगांतकारी महत्त्व हिंदी काव्य की गहरी नींव के नीचे ही दबा रह जाता । (लेख से)

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होने वाले महाकवि के लिए- शमशेर बहादुर सिंह

शमशेर बहादुर सिंह द्वारा लिखा गया यह लेख नए कवियों के लिए एक जरूरी दस्तावेज की तरह है। इस संक्षिप्त लेख में वह एक ओर आने वाले कवियों को गहन अध्ययन तथा अपने परिवेश की गूढ़ समझ पैदा करने की महत्वपूर्ण सलाह दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर आधुनिक कविता के लिए भाषा, शिल्प, कथ्य आदि के उचित सामंजस्य के महत्व को भी स्पष्ट कर रहे हैं।

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कविता में किसान- प्रो. सुभाष चन्द्र

आजादी प्राप्त करने के बाद भी किसान की हालत बहुत नहीं बदली। अंग्रेजी साम्राज्यवादी शासन किसानों के अनाज को खलिहान से उठा ले जाता था, लेकिन आज की शोषक नीतियां फसल पकने से पहले ही खाद-तेल-दवाई-बीज के माधयम से पहले ही लूट लेती हैं। किसान के श्रम का शोषण ही है, जिसके कारण उसकी ऐसी दयनीय हालत है, वरन् वह न तो कामचोरी करता है और न ही फिजूलखर्ची।(लेख से )

‘उजाले हर तरफ़ होंगे’ (मनजीत भोला) की समीक्षा- डॉ० दिनेश दधीचि

प्रस्तुत समीक्षा का पाठ डॉ. दिनेश दधिची द्वारा 03.12.2021 को हिंदी विभाग, कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय कुरुक्षेत्र एवं देस हरियाणा पत्रिका के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित “उजाले हर तरफ होंगे” ग़ज़ल संग्रह पर केन्द्रित समीक्षा गोष्ठी में किया गया था.