Category: अनुवाद

संत राम उदासी की कविताएँ

Post Views: 36 20 अप्रैल 1930 को जन्मे संत राम उदासी भूमिहीन मजहबी पृष्ठभूमि के एक सिख कवि थे। उन्होंने उस समय वह कविता लिखी जिसे आज हम दलित कविता

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तानाशाही मानसिकता को बेपर्दा करता उपन्यास ‘गोरी हिरनी’

Post Views: 52 लेखकः गुलजार सिंह संधुहिंदी अनुवादकः गुरबख्श मोंगा और वंदना सुखीजाप्रकाशकः गार्गीपृष्ठः 134मूल्यः रू. 120 यह बेहद उत्सुकता की बात हो सकती है कि कोई तानाशाह किस प्रकार

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परिवार और महिला की आजादी- अनुवाद – सोनिया

Post Views: 89 सवालों की मर्यादा से बाहर मत जाओ गार्गी वरना सिर धड़ से अलग कर दिया जाएगा ऋषि याज्ञवल्क्या ने जनक राजा के दरबार में शास्त्रार्थ के दौरान

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आइंस्टीन का पत्र

(इस पर आइंस्टीन के अलावा अन्य कई गणमान्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर थे। यह पत्र 2 दिसंबर 1948 को लिखा गया और 4 दिसंबर 1948 को प्रकाशित हुआ) … Continue readingआइंस्टीन का पत्र

कैप्टन और सांवली प्रिन्सेस – लेफ़्टिनेंट कर्नल भीम सेन त्यागी, अनुवाद – सुरेन्द्र पाल सिंह

(अंग्रेज़ी कहानी ‘Worse than That’ का हिंदी में अनुवाद: सुरेंद्र पाल सिंह) … Continue readingकैप्टन और सांवली प्रिन्सेस – लेफ़्टिनेंट कर्नल भीम सेन त्यागी, अनुवाद – सुरेन्द्र पाल सिंह

रीढ़ – कुसुमाग्रज

Post Views: 56 रीढ़ “सर मुझे पहचाना क्या?” बारिश में कोई आ गया कपड़े थे मुचड़े हुए और बाल सब भीगे हुए पल को बैठा, फिर हँसा और बोला ऊपर

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एक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

पांच मिनट बीत गए पर कैदी ने कोई हरकत नहीं की। पंद्रह वर्ष के कारावास से उसे स्थिर बैठने का अभ्यास हो गया था। बैंकर ने अपनी उंगली से खिड़की पर दस्तक दी। जवाब में कैदी ने कोई हरकत नहीं की। फिर बैकर ने सावधानी से दरवाजे की सील तोड़ दी और ताले में चाबी घुमाई। जंग लगे ताले से एक कर्कश सी गुर्राने जैसी आवाज निकली। दरवाजा चरमरा उठा….(कहानी से) … Continue readingएक शर्त- एन्तॉन पावलेविच चेखव 

एक पाठक – मक्सिम गोर्की

“रुको नहीं, मेरे साथ तुम सही रास्ते पर हो” उसने कहा, “बात शुरू करो, तुम मुझे यह बताओ कि साहित्य का उद्देश्य क्या है ?” मेरा अचरज बढ़ता जा रहा था और आत्मसंतुलन घटना जा रहा था । आखिर यह आदमी मुझसे चाहता क्या है? और यह है कौन ? निस्संदेह वह एक दिलचस्प आदमी था, लेकिन मैं उससे खीज उठा था । (कहानी से) … Continue readingएक पाठक – मक्सिम गोर्की

‘ये मेला है’- सुरजीत पातर, हिंदी अनुवाद : परमानन्द शास्त्री

किसान आन्दोलन पर पंजाबी के जानेमाने कवि सुरजीत पातर की कविता- … Continue reading‘ये मेला है’- सुरजीत पातर, हिंदी अनुवाद : परमानन्द शास्त्री

अंतिम बेला में- रविंद्रनाथ ठाकुर, अनुवाद- योगेश शर्मा

योगेश शर्मा कुरुक्षेत्र विश्विद्यालय में हिंदी स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के छात्र और देस हरियाणा की प्रबन्धन टीम का हिस्सा हैं … Continue readingअंतिम बेला में- रविंद्रनाथ ठाकुर, अनुवाद- योगेश शर्मा