Author Archives: DESHARYANA

धर्म और हमारा स्वतन्त्रता संग्राम; भगत सिंह

धर्म और हमारा स्वतन्त्रता संग्राम – भगत सिंह“हमारी आज़ादी का अर्थ केवल अंग्रेजी चंगुल से छुटकारा पाने का नाम नहीं, वह पूर्ण स्वतंत्रता का नाम है जब लोग परस्पर घुल-मिलकर रहेंगे और दिमागी गुलामी से भी आज़ाद हो जायेंगे।” मई, 1928 के ‘किरती’ में यह लेख छपा। जिसमें भगत सिंह ने धर्म की समस्या पर प्रकाश डाला है। अमृतसर में

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पंज प्यारे – जातिवाद पर कड़ा प्रहार और जनवाद का प्रतीक

अपना शीश देने के लिए तैयार हुए पांचों व्यक्तियों में से ज्यादा समाज द्वारा नीची समझी जाने वाली जातियों में थे और खासतौर पर दस्तकार थे। उनमें से एक खत्री था, एक जाट, एक धोबी, एक नाई और एक कुम्हार था। इस से पता चलता है कि गुरु गोबिंद सिंह जी को तमाम जातियों और खासकर छोटी समझी जाने वाली जनता का अपार समर्थन था। उसे मेहनतकश किसान और मजदूरों का समर्थन हासिल था। उसे व्यापारी वर्ग का समर्थन था।

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म्हारै गाम का चौकीदार – #MainBhiChowkidar

म्हारै गाम का चौकीदार बोहत टैम पहल्यां की बात सै। म्हारै गाम म्हं एक चौकीदार था। उसके बोहत सारे काम थे। गाम कुछ भी होंदा उसका गोहा (संदेशा, मुनियादी) उसने ए देणा पड़े करदा। कोटा म्हं चीनी मिलणी होंदी, माटी का तेल मिलणा होंदा, पिलसण मिलणी होंदी, पंचैत होंदी, या फैर बोट पड़ने होंदे या सांग होंदा। ओ सारा गाम

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‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ – पंजाब में होली नहीं मनाया जाता है होल्ला-मोहल्ला

‘लोकां दियां होलियां, खालसे दा होला ए’ –

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यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? – #Desharyana_Counter_Fake_News

#Desharyana_Counter_Fake_News #देसहरियाणा-काउंटर-फेकन्यूज भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार सहिंता के अनुसार किसी मतदाता को मतदान करने के पक्ष में रिश्वत देना, डराना, धमकाना, मदतान केंद्र तक ले जाने के लिए वाहन आदि का प्रयोग करना अपराध है। पहली बार मतदान करने वाले युवकों को रिझाने के हथकंडे क्या यह मतदाताओं को रिश्वत तो नहीं ? लोकतंत्र का महापर्व कहे

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सोनकेसी – पहाड़ी लोक-कथा

एक बार एक साहुकार था। उसके चार पुत्र थे ।चार में से बड़े तीन पुश्तैनी धन्धे के साथ अपना-अपना काम धन्धा  भी करते थे पर सबसे छोटा बेटा कोई काम-धाम नहीं करता था । उसकी इस आदत की वजह से साहुकार उससे नाराज रहने लगा । बोल-चाल भी बंद हो गई । बाकी के भाई भी उससे खिंचे-खिंचे से रहने

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पूंजीवाद को संभावित विद्रोहों से है गंभीर खतरा – पूर्व गवर्नर रघुराम राजन

रघुराम राजन ने कहा कि समाज में संभावित ‘विद्रोह’ की स्थिति लोगों को अवसर नहीं मिल पाने के कारण पूंजीवाद खतरे में अवसर नहीं मिल पाने से पूंजीवाद के खिलाफ होता है विद्रोह 2008 के आर्थिक संकट से भी बड़ा होगा आने वाला संकट आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जताते हुए कहा है कि पूंजीवाद को ‘गंभीर

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अछूत समस्या – विद्रोही उर्फ भगत सिंह

अछूत समस्या – पीडीएफ डाउनलोड करें शहीद भगत सिंह ने जब यह लेख लिखा वह मात्र 16 वर्ष के किशोर थे। लेकिन इस लेख से हम अंदाजा लगा सकते हैं कि मात्र 16 वर्ष की आ यु में भी वह कितने महान बुद्धिजीवी थे। आज से 96 वर्ष पहले लिखे इस लेख में शहीद भगत सिंह ने अछूत समस्या का

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ तेज हो रहा है आदिवासियों का आंदोलन

आदिवासियों की हुंकार गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी को वाईल्ड लाई फ्रस्ट और वन विभाग के कुछ आला रिटायर अधिकारियों की याचिका पर सुनाई करते हुए देश के 20 लाख से अधिक आदिवासियों को उनकी जमीनों से बेदखल कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि जिन लोगों को वन अधिकार कानून 2006 के तहत दावे

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